लखनऊ: उत्तर प्रदेश में अपनी ही धुन में रहने वाले प्रशासनिक अधिकारियों और थानेदारों की अब खैर नहीं है। विधायकों की फोन कॉल को अनसुना करने वाले अफसरों पर विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना ने कड़ा रुख अपनाया है। सदन में विपक्ष की भारी नाराजगी और शिकायतों के बाद स्पीकर ने दो टूक निर्देश जारी किए हैं कि अधिकारियों को हर हाल में जनप्रतिनिधियों का फोन उठाना ही होगा और उन्हें उचित सम्मान देना होगा।
सदन में गूंजा ‘अनसुनी’ का मुद्दा, विपक्ष ने घेरा
बुधवार को विधानसभा की कार्यवाही के दौरान नेता प्रतिपक्ष माता प्रसाद पांडेय सहित कई विधायकों ने अफसरों की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए। विधायकों का आरोप था कि जिले के थानेदार से लेकर आला अधिकारी तक उनके फोन नहीं उठाते हैं। जनप्रतिनिधियों ने शिकायत की कि जब वे जनता की समस्याओं के लिए अधिकारियों से संपर्क करने की कोशिश करते हैं, तो उन्हें घंटों इंतजार कराया जाता है या उनकी कॉल इग्नोर कर दी जाती है।
सतीश महाना की सख्त चेतावनी: ‘अफसरों को देना होगा समय’
विधायकों की पीड़ा सुनने के बाद विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना ने नाराजगी जाहिर करते हुए इसे सदन की गरिमा के खिलाफ बताया। उन्होंने कहा, “जनप्रतिनिधियों का फोन न उठाना और उन्हें सम्मान न देना पूरी तरह गलत है। अधिकारियों से यह अपेक्षा की जाती है कि वे जनहित के मुद्दों पर विधायकों का सहयोग करें और उन्हें पर्याप्त समय दें।” उन्होंने स्पष्ट किया कि लोकतंत्र में जनता द्वारा चुने गए प्रतिनिधियों की अनदेखी बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
थानेदारों की मनमानी पर नेता प्रतिपक्ष का प्रहार
सपा के वरिष्ठ नेता और नेता प्रतिपक्ष माता प्रसाद पांडेय ने सदन में कहा कि निचले स्तर के पुलिस अधिकारी (थानेदार) भी जनप्रतिनिधियों को गंभीरता से नहीं ले रहे हैं। विपक्ष के नेताओं ने इसे ‘प्रशासनिक तानाशाही’ करार देते हुए कहा कि जब विधायक का फोन नहीं उठता, तो आम जनता की सुनवाई की उम्मीद कैसे की जा सकती है? इस मुद्दे पर सत्ता पक्ष के भी कुछ विधायकों ने दबे स्वर में सहमति जताई, जिसके बाद स्पीकर ने इसे अनुशासन का मुद्दा बताते हुए सख्त आदेश पारित किए।
क्या बदलेगी यूपी की ब्यूरोक्रेसी की कार्यशैली?
विधानसभा अध्यक्ष के इस निर्देश के बाद अब शासन स्तर पर नए दिशा-निर्देश जारी होने की उम्मीद है। सूत्रों की मानें तो प्रोटोकॉल का पालन न करने वाले अधिकारियों पर अब विभागीय कार्रवाई की तलवार लटक सकती है। विधानसभा अध्यक्ष ने जोर देकर कहा कि अधिकारी सरकारी तंत्र का हिस्सा हैं और उनका दायित्व जनता की समस्याओं को जनप्रतिनिधियों के माध्यम से हल करना है, न कि उनसे दूरी बनाना।
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