
ढाका/वॉशिंगटन। भारत के पड़ोस बांग्लादेश में चीन की बढ़ती सक्रियता ने अमेरिका की चिंता बढ़ा दी है। आम चुनाव से ठीक पहले वॉशिंगटन ने संकेत दिया है कि नई बनने वाली सरकार को वह चीन के हथियारों के विकल्प के तौर पर उन्नत एयर डिफेंस सिस्टम और अन्य सैन्य साजो-सामान उपलब्ध कराने को तैयार है। यह बयान ऐसे समय आया है जब ढाका और बीजिंग के बीच भारत की सीमा के करीब ड्रोन फैक्ट्री स्थापित करने का समझौता चर्चा में है। दक्षिण एशिया में रणनीतिक संतुलन को लेकर अमेरिका और चीन के बीच खींचतान अब खुलकर सामने आती दिख रही है।
चुनाव के बाद नई सरकार पर टिकी नजर
बांग्लादेश में गुरुवार को आम चुनाव होने हैं। मुख्य मुकाबला बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) और जमात-ए-इस्लामी के नेतृत्व वाले गठबंधन के बीच माना जा रहा है। जुलाई 2024 में अपदस्थ प्रधानमंत्री शेख हसीना की अवामी लीग पर चुनाव लड़ने से रोक लग चुकी है और वे फिलहाल भारत में शरण लिए हुए हैं। राजनीतिक परिदृश्य में आए इस बदलाव ने चीन को बांग्लादेश में अपनी रणनीतिक मौजूदगी मजबूत करने का अवसर दिया है। अमेरिका अब चुनाव के बाद बनने वाली सरकार के रुख पर करीबी नजर रखे हुए है।
चीन-बांग्लादेश रक्षा सहयोग से बढ़ी हलचल
हाल के महीनों में चीन ने बांग्लादेश के साथ रक्षा सहयोग को नई गति दी है। भारत की सीमा के निकट ड्रोन निर्माण इकाई स्थापित करने का समझौता दोनों देशों के रिश्तों की गहराई का संकेत माना जा रहा है। इसके अलावा ढाका, पाकिस्तान के साथ मिलकर विकसित किए गए मल्टीरोल कॉम्बैट एयरक्राफ्ट JF-17 थंडर की संभावित खरीद पर भी विचार कर रहा है। चटगांव में नौसैनिक अड्डे के विकास, बांग्लादेश को दो पुरानी पनडुब्बियों की आपूर्ति और सैन्य प्रशिक्षण जैसे कदमों ने क्षेत्रीय सुरक्षा समीकरण को जटिल बना दिया है।
अमेरिका का संकेत: चीनी सिस्टम का विकल्प तैयार
बांग्लादेश में अमेरिकी राजदूत ब्रैंट टी. क्रिस्टेंसन ने एक साक्षात्कार में कहा कि दक्षिण एशिया में चीन के बढ़ते प्रभाव को लेकर अमेरिका सतर्क है। उन्होंने स्पष्ट किया कि वॉशिंगटन ढाका के साथ मिलकर संभावित सुरक्षा चुनौतियों पर संवाद के लिए तैयार है। उनके मुताबिक अमेरिका और उसके सहयोगी देश बांग्लादेश की सैन्य जरूरतों को पूरा करने के लिए कई विकल्प दे सकते हैं, ताकि चीनी रक्षा प्रणालियों पर निर्भरता कम की जा सके। हालांकि उन्होंने किसी विशेष सिस्टम का नाम नहीं लिया, लेकिन एयर डिफेंस और उन्नत सुरक्षा उपकरणों की पेशकश के संकेत दिए।
बीजिंग की दो टूक: दखल बर्दाश्त नहीं
अमेरिकी रुख पर चीन ने भी तीखी प्रतिक्रिया दी है। चीनी विदेश मंत्रालय ने कहा कि चीन और बांग्लादेश के बीच राजनीतिक, आर्थिक और सुरक्षा सहयोग आपसी लाभ पर आधारित है और यह किसी तीसरे देश के खिलाफ नहीं है। साथ ही बीजिंग ने यह भी स्पष्ट किया कि वह किसी बाहरी दखलअंदाजी को स्वीकार नहीं करेगा।
भारत के लिए क्यों अहम है यह घटनाक्रम?
बांग्लादेश की भौगोलिक स्थिति भारत के पूर्वोत्तर और बंगाल की खाड़ी के लिए रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण है। ऐसे में यदि ढाका का झुकाव किसी एक वैश्विक शक्ति की ओर बढ़ता है, तो उसका असर क्षेत्रीय सुरक्षा, समुद्री गतिविधियों और रक्षा संतुलन पर पड़ सकता है। अमेरिका का ताजा संकेत इस बात का प्रमाण है कि दक्षिण एशिया अब वैश्विक शक्तियों की रणनीतिक प्रतिस्पर्धा का प्रमुख केंद्र बन चुका है।
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