
Prayagraj News: उत्तर प्रदेश पुलिस की कार्यप्रणाली को लेकर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कड़ी नाराजगी जताई है। कोर्ट ने टिप्पणी करते हुए कहा कि प्रदेश के कई थाने अब कानून-व्यवस्था बनाए रखने के बजाय व्यावसायिक गतिविधियों के केंद्र बनते जा रहे हैं। अदालत ने इस मामले को बेहद गंभीर मानते हुए पुलिस महकमे के शीर्ष अधिकारियों को सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए हैं।
बलिया के रसड़ा थाने से जुड़ा मामला बना सुनवाई का आधार
यह टिप्पणी बलिया जिले के रसड़ा थाने में तैनात कांस्टेबल संतोष कुमार से जुड़े मामले की सुनवाई के दौरान की गई। आरोप है कि संबंधित पुलिसकर्मी ट्रांसपोर्ट का व्यवसाय संचालित कर रहा था और उसे विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों का संरक्षण भी प्राप्त था। हाईकोर्ट ने इसे पुलिस विभाग में व्याप्त भ्रष्टाचार और अनुशासनहीनता का गंभीर उदाहरण माना।
हाईकोर्ट ने DGP और गृह विभाग को दिए सख्त निर्देश
जस्टिस रोहित रंजन अग्रवाल की एकल पीठ ने उत्तर प्रदेश के पुलिस महानिदेशक (DGP) और अपर मुख्य सचिव (गृह) को पूरे मामले की विस्तृत जांच कराने का आदेश दिया है। अदालत ने निर्देश दिया कि रसड़ा थाने में तैनात सभी पुलिस अधिकारियों और कर्मचारियों की भूमिका की जांच की जाए और यदि अनियमितता सामने आती है तो उनके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।
10 दिन में हलफनामा दाखिल करने का आदेश
हाईकोर्ट ने डीजीपी को निर्देश दिया है कि इस मामले में की गई कार्रवाई का विस्तृत हलफनामा 10 दिनों के भीतर अदालत में प्रस्तुत किया जाए। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि मामले में केवल औपचारिक जांच नहीं, बल्कि प्रभावी और ठोस कार्रवाई की अपेक्षा की जाती है।
11 अगस्त को होगी अगली सुनवाई
इस मामले की अगली सुनवाई 11 अगस्त को निर्धारित की गई है। माना जा रहा है कि अगली सुनवाई में सरकार और पुलिस मुख्यालय की ओर से की गई कार्रवाई का पूरा ब्यौरा अदालत के सामने रखा जाएगा। इस मामले पर प्रदेशभर में पुलिस विभाग की कार्यप्रणाली और जवाबदेही को लेकर भी चर्चा तेज हो गई है।
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