
सार: बिहार के रोहतास से निकले अभिषेक आनंद ने IIT कानपुर से केमिस्ट्री की पढ़ाई की और नौकरी के लिए जापान पहुंच गए। वहां उन्होंने क्रिकेट का साथ नहीं छोड़ा। क्लब क्रिकेट में प्रदर्शन और अनुशासन के दम पर महज तीन साल में जापान की राष्ट्रीय टीम तक पहुंच गए। भारत-जापान के ऐतिहासिक टी20 मुकाबले से पहले उनकी कहानी एक बार फिर चर्चा में है। हालांकि, 22 सितंबर को भारत के खिलाफ होने वाले मुकाबले के लिए जापान की 15 सदस्यीय टीम में अभिषेक का नाम नहीं है।
रोहतास से निकले, IIT कानपुर में बनाई क्रिकेट टीम में पहचान
बिहार के रोहतास जिले से ताल्लुक रखने वाले 28 वर्षीय अभिषेक आनंद की कहानी आम क्रिकेटरों से कुछ अलग है। उन्होंने IIT कानपुर से केमिस्ट्री की पढ़ाई पूरी की। कॉलेज के दौरान पढ़ाई के साथ क्रिकेट भी जारी रखा और संस्थान की टीम की कप्तानी तक की। उनके लिए क्रिकेट सिर्फ शौक भर नहीं था, बल्कि वह खेल को अपनी जिंदगी का अहम हिस्सा मानते रहे।
ग्रेजुएशन के बाद अभिषेक के सामने करियर को लेकर कई रास्ते थे। इसी दौरान जापान में नौकरी का मौका आया और उनकी जिंदगी ने ऐसा मोड़ लिया, जिसकी उन्होंने खुद भी कल्पना नहीं की थी।
जापान जाने का फैसला सिर्फ दो घंटे में लिया
अभिषेक के मुताबिक, कॉलेज प्लेसमेंट के दौरान जापानी कंपनियां कैंपस में आई थीं। उस समय विदेश जाकर नौकरी करना उनकी प्राथमिक योजना नहीं थी। वह भारत में रहकर नौकरी और क्रिकेट दोनों को जारी रखना चाहते थे। इसके बावजूद उन्होंने इंटरव्यू दिया और उन्हें एक्सेंचर जापान से नौकरी का ऑफर मिल गया।
दिलचस्प बात यह है कि ऑफर स्वीकार करने या छोड़ने के लिए अभिषेक के पास महज करीब दो घंटे का समय था। उन्होंने इसी दौरान जापान में क्रिकेट की स्थिति के बारे में जानकारी जुटाई। उन्हें पता चला कि जापान की क्रिकेट टीम अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आगे बढ़ रही है और ईस्ट एशिया-पैसिफिक वर्ल्ड कप क्वालिफायर में भी जगह बना चुकी है। इसके बाद उन्होंने ऑफर स्वीकार किया और जापान चले गए।
नौकरी के साथ क्रिकेट नहीं छोड़ा
जापान पहुंचने के बाद अभिषेक ने टोक्यो फाल्कन्स क्रिकेट क्लब का रुख किया। नौकरी की व्यस्तता के बावजूद वह क्लब क्रिकेट खेलते रहे। करीब तीन साल तक उन्होंने जापान के घरेलू क्रिकेट में खुद को साबित किया। इसी दौरान उनके प्रदर्शन और खेल के प्रति अनुशासन पर भी ध्यान गया।
अभिषेक को शुरुआत में लगता था कि जापान की राष्ट्रीय टीम तक पहुंचने में चार-पांच साल लग सकते हैं। लेकिन उनकी उम्मीद से पहले ही रास्ता खुल गया। करीब तीन साल के भीतर उन्हें जापान की राष्ट्रीय टीम में जगह मिल गई।
जापान की नेशनल टीम में कैसे मिली जगह?
अभिषेक ने बताया है कि जापान की राष्ट्रीय टीम में चयन के लिए पात्रता से जुड़ी शर्तों में जापान में लगातार तीन साल रहना, जापान में जन्म लेना या जापानी पासपोर्ट होना शामिल है। उनके मामले में लगातार तीन साल जापान में रहने वाली शर्त पूरी हुई। इसके साथ घरेलू क्रिकेट में प्रदर्शन और अनुशासन भी अहम रहा।
यानी IIT कानपुर से निकलकर जापान पहुंचने के बाद अभिषेक ने सिर्फ नौकरी नहीं की, बल्कि वहां के क्रिकेट ढांचे में लगातार अपनी जगह बनाने पर भी काम किया। इसी मेहनत ने उन्हें क्लब क्रिकेट से राष्ट्रीय टीम तक पहुंचा दिया।
9 मई 2025 को किया था T20I डेब्यू
अभिषेक आनंद ने 9 मई 2025 को कुक आइलैंड्स के खिलाफ जापान की ओर से अपना टी20 अंतरराष्ट्रीय डेब्यू किया था। इसके बाद वह जापान के लिए नियमित तौर पर खेलते रहे। उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक वह अब तक 18 टी20 अंतरराष्ट्रीय मुकाबलों में जापान का प्रतिनिधित्व कर चुके हैं। उनके खाते में 275 रन हैं और उनका सर्वश्रेष्ठ स्कोर 55 रन है। गेंदबाजी में भी उनके नाम एक विकेट दर्ज है।
भारत के खिलाफ मैदान पर नहीं उतरेंगे अभिषेक
भारत और जापान के बीच 22 सितंबर 2026 को होने वाला मुकाबला दोनों देशों के सीनियर पुरुष क्रिकेट इतिहास में खास है। इस मैच को लेकर अभिषेक आनंद की चर्चा इसलिए भी बढ़ गई क्योंकि वह मूल रूप से भारत के बिहार से हैं, लेकिन अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में जापान का प्रतिनिधित्व करते हैं।
हालांकि, भारत के खिलाफ होने वाले इस मुकाबले में अभिषेक खेलते हुए नजर नहीं आएंगे। जापान ने मैच के लिए 15 सदस्यीय टीम घोषित की है और उसमें अभिषेक आनंद का नाम शामिल नहीं है। यानी भारतीय क्रिकेट टीम के खिलाफ उनके मैदान पर उतरने की संभावना इस मुकाबले में नहीं है।
अभिषेक ने बताया कि वह मैच को लेकर उत्साहित हैं और टीम के साथ रहकर जापान का समर्थन करेंगे। उनका कहना है कि वह भारत से हैं, इसलिए इस मुकाबले को लेकर उनके लिए दोनों टीमों से भावनात्मक जुड़ाव है।
‘बिहारी कहां नहीं है भाई’ वाला वीडियो हुआ वायरल
भारत-जापान मुकाबले से पहले अभिषेक आनंद का एक वीडियो सोशल मीडिया पर चर्चा में है। इसमें उनसे जापान के लिए क्रिकेट खेलने वाले बिहारी होने को लेकर सवाल किया गया। जवाब में उनका ‘बिहारी कहां नहीं है भाई’ वाला अंदाज लोगों को पसंद आया और वीडियो चर्चा में आ गया।
अभिषेक की कहानी इसलिए भी खास बन जाती है क्योंकि उन्होंने क्रिकेट को अपना प्राथमिक पेशा बनाए बिना अंतरराष्ट्रीय स्तर तक पहुंच बनाई। IIT से पढ़ाई, जापान में नौकरी और उसके साथ क्लब क्रिकेट—इन तीनों को संतुलित करते हुए उन्होंने राष्ट्रीय टीम में अपनी जगह बनाई।
जापान में क्रिकेट के बढ़ते दायरे का भी गवाह है सफर
अभिषेक का कहना है कि जब से वह जापान पहुंचे हैं, वहां क्रिकेट में काफी बदलाव आया है। पुरुष और महिला दोनों क्रिकेट टीमों में विकास देखने को मिला है। उनका मानना है कि आने वाले वर्षों में जापानी क्रिकेट की पहचान अंतरराष्ट्रीय स्तर पर और मजबूत हो सकती है।
बिहार के रोहतास से शुरू हुआ अभिषेक आनंद का सफर IIT कानपुर तक पहुंचा, फिर नौकरी उन्हें टोक्यो ले गई और क्रिकेट के जुनून ने जापान की राष्ट्रीय टीम तक पहुंचा दिया। भारत के खिलाफ ऐतिहासिक मुकाबले में भले ही वह मैदान पर न उतरें, लेकिन इस मैच से पहले उनकी कहानी ने यह जरूर दिखा दिया है कि क्रिकेट का रास्ता अब सिर्फ पारंपरिक क्रिकेट देशों तक सीमित नहीं रह गया है।
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