ईरान पर अमेरिकी मिसाइलों की बरसात, 12 की मौत और 68 घायल; जवाब में जॉर्डन-बहरीन तक पहुंची तेहरान की स्ट्राइक

अमेरिका और ईरान के बीच तनाव एक बार फिर खतरनाक मोड़ पर पहुंच गया है। बुधवार को दोनों देशों के बीच लंबे समय बाद सबसे बड़े सैन्य टकराव में अमेरिकी सेना ने ईरान के दक्षिणी तट पर कई ठिकानों को निशाना बनाया। इसके जवाब में ईरान ने भी मध्य पूर्व में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर मिसाइल और ड्रोन हमले शुरू कर दिए। इस जवाबी कार्रवाई की जद में जॉर्डन, बहरीन, कुवैत और इराक तक के अमेरिकी सैन्य ठिकाने आए हैं। Reuters के मुताबिक, ईरान ने अमेरिकी हमलों में कम से कम 12 लोगों की मौत और 68 लोगों के घायल होने की बात कही है। हालांकि, इन आंकड़ों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हो सकी है।

अमेरिकी हमले में ईरान के दक्षिणी इलाके को बनाया निशाना

अमेरिकी सेना ने ईरान के दक्षिणी तट और रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के आसपास कई सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया। अमेरिकी सेना के अनुसार, हमलों में ईरानी रिवोल्यूशनरी गार्ड की वायु रक्षा प्रणालियों, रडार, समुद्री सैन्य क्षमताओं, संचार ठिकानों और समुद्र में बारूदी सुरंग बिछाने की क्षमता से जुड़े ठिकानों को टारगेट किया गया।

अमेरिका का दावा है कि ये कार्रवाई ईरान की उन गतिविधियों के जवाब में की गई, जिनसे स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में समुद्री यातायात को खतरा पैदा हो सकता था। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी ईरान की ओर से समुद्री मार्ग में बारूदी सुरंगें बिछाने की कोशिश और जॉर्डन में अमेरिकी सैन्य ठिकाने पर मिसाइल हमले का हवाला देते हुए कार्रवाई को सही ठहराया है।

ईरान ने बताया 12 लोगों की मौत, 68 घायल

ईरानी पक्ष ने अमेरिकी हमलों के बाद कम से कम 12 लोगों के मारे जाने की जानकारी दी है। ईरानी मीडिया के अनुसार, दक्षिणी ईरान के सिरिक इलाके में एक घर पर हुए हमले में पांच लोगों की मौत हुई, जिनमें एक चार साल का बच्चा भी शामिल बताया गया है। रिपोर्ट के मुताबिक, इस घटना में बड़ी संख्या में लोग घायल हुए और घायलों की संख्या 68 तक बताई गई है।

ईरानी मीडिया ने दावा किया कि हमला एक ऐसे घर पर हुआ जहां शादी समारोह चल रहा था। हालांकि, Reuters ने इस घटना और बताए गए हताहतों के आंकड़ों को स्वतंत्र रूप से सत्यापित नहीं किया है। अमेरिकी अधिकारियों ने भी इस आरोप पर तत्काल कोई टिप्पणी नहीं की।

जवाबी कार्रवाई में अमेरिकी ठिकानों पर ईरानी मिसाइल और ड्रोन

अमेरिकी हमले के बाद ईरान ने पलटवार करते हुए मध्य पूर्व में अमेरिकी सैन्य मौजूदगी को निशाना बनाने का दावा किया। ईरानी सेना ने जॉर्डन, बहरीन, कुवैत और इराक में अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर मिसाइल और ड्रोन हमले किए।

जॉर्डन की सेना के अनुसार, ईरान की ओर से दागी गई 13 मिसाइलों का पता चला, जिनमें से 10 को हवा में ही रोक दिया गया, जबकि तीन मिसाइलें दूरदराज के इलाकों में गिरीं। ईरान ने जॉर्डन में अमेरिकी सैनिकों को नुकसान पहुंचाने का दावा किया, लेकिन अमेरिकी अधिकारियों के शुरुआती आकलन में वहां किसी अमेरिकी सैनिक के हताहत होने की पुष्टि नहीं हुई।

बहरीन में भी अमेरिकी सैन्य ठिकाने निशाने पर

ईरान ने बहरीन में भी अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाने का दावा किया है। बहरीन में अमेरिकी नौसेना की पांचवीं फ्लीट का क्षेत्रीय मुख्यालय मौजूद है, जिसके कारण यह देश अमेरिका के लिए मध्य पूर्व में बेहद महत्वपूर्ण सैन्य केंद्र माना जाता है।

बहरीन की ओर से कहा गया कि ईरान की तरफ से आने वाले ड्रोन को इंटरसेप्ट कर नष्ट किया गया। क्षेत्र में अमेरिकी सैन्य मौजूदगी को देखते हुए ईरान की इस कार्रवाई ने संघर्ष के और फैलने की आशंका बढ़ा दी है।

कुवैत और इराक में भी हमले का दावा

ईरान ने कुवैत में स्थित अमेरिकी अली अल सलेम एयर बेस और इराक के एरबिल इलाके में अमेरिकी सैन्य ठिकानों को भी निशाना बनाने का दावा किया। कुवैत की अग्निशमन सेवा के मुताबिक, एक ईरानी ड्रोन के हमले के बाद एक आवासीय परिसर में आग लगी, हालांकि किसी के हताहत होने की जानकारी नहीं दी गई।

इराक के एरबिल में भी ईरान ने अमेरिकी सैन्य सुविधाओं पर मिसाइल और ड्रोन हमले का दावा किया है। ईरानी रिवोल्यूशनरी गार्ड ने कई अमेरिकी सैन्य संसाधनों को नुकसान पहुंचाने और अमेरिकी कर्मियों के मारे जाने का दावा किया, लेकिन इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि तत्काल नहीं हुई।

स्ट्रेट ऑफ होर्मुज बना संघर्ष का सबसे बड़ा केंद्र

अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते टकराव में स्ट्रेट ऑफ होर्मुज सबसे संवेदनशील क्षेत्र बन गया है। यह संकरा समुद्री मार्ग वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। ईरान ने यहां से गुजरने वाले जहाजों पर नियंत्रण और चेतावनी देने की कोशिश की है, जबकि अमेरिका समुद्री यातायात को सुरक्षित रखने के नाम पर अपनी सैन्य कार्रवाई को जायज ठहरा रहा है।

अमेरिकी हमलों के बाद तेल की कीमतों में तेजी और वैश्विक बाजारों में दबाव भी देखने को मिला। संघर्ष अगर और लंबा खिंचता है तो इसका असर केवल मध्य पूर्व तक सीमित रहने के बजाय वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति और अर्थव्यवस्था पर भी पड़ सकता है।

बढ़ता जा रहा है अमेरिका-ईरान टकराव

ताजा घटनाक्रम से साफ है कि अमेरिका और ईरान के बीच संघर्ष एक बार फिर गंभीर स्तर पर पहुंच चुका है। एक तरफ अमेरिका ईरान की सैन्य और समुद्री क्षमताओं को निशाना बना रहा है, तो दूसरी तरफ तेहरान क्षेत्र में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर जवाबी हमले कर रहा है।सबसे बड़ी चिंता यह है कि लड़ाई अब केवल अमेरिका और ईरान तक सीमित नहीं रह गई है। जॉर्डन, बहरीन, कुवैत और इराक में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर हमलों ने पूरे मध्य पूर्व को इस संघर्ष के दायरे में ला दिया है। आने वाले दिनों में दोनों पक्षों की अगली सैन्य कार्रवाई यह तय करेगी कि यह टकराव सीमित रहता है या क्षेत्रीय युद्ध का रूप लेता है।

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