
तेहरान: अमेरिका और ईरान के बीच जारी जंग को लेकर तेहरान की ओर से बड़ा और बेहद आक्रामक बयान सामने आया है। ईरान की ताकतवर सैन्य इकाई इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) के कमांडर-इन-चीफ के वरिष्ठ सलाहकार मोहम्मद रजा नकदी ने दावा किया है कि ईरान अमेरिका के खिलाफ युद्ध को लंबे समय तक जारी रखने की क्षमता रखता है। उन्होंने यहां तक कहा कि जंग को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के मौजूदा कार्यकाल के खत्म होने तक खींचा जा सकता है। उनके मुताबिक, इस रणनीति का मकसद अमेरिका को इतना नुकसान पहुंचाना है कि भविष्य में वह ईरान पर हमला करने से पहले कई बार सोचे।
ट्रंप के कार्यकाल तक जंग जारी रखने की बात
मोहम्मद रजा नकदी ने एक इंटरव्यू में ईरान की संभावित युद्ध रणनीति का जिक्र करते हुए कहा कि संघर्ष को तब तक जारी रखा जा सकता है, जब तक अमेरिका में अगले राष्ट्रपति का कार्यकाल शुरू नहीं हो जाता। उनका कहना है कि इस दौरान दुश्मन को भारी नुकसान पहुंचाना जरूरी होगा। ईरानी अधिकारी के मुताबिक, अगर किसी देश को यह भरोसा हो जाए कि ईरान पर हमला करने की कीमत बहुत बड़ी होगी, तो भविष्य में वह किसी सैन्य कार्रवाई का फैसला लेने से पहले सावधानी बरतेगा।
नकदी का यह बयान ऐसे समय आया है जब अमेरिका और ईरान के बीच संघर्ष को लेकर तनाव बेहद गंभीर बना हुआ है। उनके बयान से संकेत मिलता है कि ईरान केवल तत्काल सैन्य टकराव पर ध्यान नहीं दे रहा, बल्कि लंबे समय तक चलने वाले संघर्ष के लिए भी रणनीति तैयार कर रहा है।
IRGC सलाहकार ने किया ईरान के जीतने का दावा
IRGC के वरिष्ठ सलाहकार मोहम्मद रजा नकदी ने दावा किया कि मौजूदा जंग में ईरान बढ़त बनाए हुए है। हालांकि, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि तेहरान ने अभी अपना अंतिम लक्ष्य हासिल नहीं किया है। उनके मुताबिक, ईरान की रणनीति सिर्फ युद्ध जीतने तक सीमित नहीं है, बल्कि ऐसी स्थिति पैदा करना भी है जिसमें भविष्य में कोई दुश्मन उस पर हमला करने की हिम्मत न करे।
नकदी के अनुसार, युद्ध को लंबा खींचकर अमेरिका को भारी नुकसान पहुंचाना इसी रणनीति का हिस्सा हो सकता है। उनका तर्क है कि यदि किसी संभावित हमलावर को पहले से पता हो कि ईरान पर हमला करने के बाद उसे बहुत बड़ी कीमत चुकानी पड़ेगी, तो वह सैन्य कार्रवाई का फैसला लेने से पहले दोबारा विचार करेगा।
ईरान का मकसद सिर्फ जंग जीतना नहीं
ईरानी अधिकारी के बयान से यह संकेत मिलता है कि तेहरान मौजूदा संघर्ष को केवल सैन्य मुकाबले के रूप में नहीं देख रहा है। उसकी रणनीति में लंबे समय तक दबाव बनाए रखना और दुश्मन के भीतर भविष्य के हमले को लेकर डर पैदा करना भी शामिल है। नकदी ने इसी संदर्भ में कहा कि ईरान को ऐसी स्थिति बनानी होगी, जहां उसके खिलाफ सैन्य कार्रवाई का विचार ही संभावित दुश्मन के लिए भारी कीमत वाला फैसला बन जाए।
उनकी इस टिप्पणी को ईरान की दीर्घकालिक प्रतिरोध रणनीति से जोड़कर देखा जा रहा है। यानी तेहरान तत्काल संघर्ष के बजाय लंबे युद्ध के जरिए अपने विरोधी पर रणनीतिक दबाव बढ़ाने की कोशिश कर सकता है।
ट्रंप ने होर्मुज जलडमरूमध्य पर किया बड़ा दावा
वहीं, दूसरी तरफ अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर बड़ा दावा किया है। ट्रंप ने कहा है कि इस रणनीतिक समुद्री मार्ग पर अमेरिका का पूरा नियंत्रण है। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि वॉशिंगटन इस नियंत्रण को आगे भी बनाए रखना चाहता है।
ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘ट्रुथ सोशल’ पर एक पोस्ट में होर्मुज जलडमरूमध्य का जिक्र करते हुए कहा कि अमेरिका के पास इस क्षेत्र पर पूरा नियंत्रण है और उन्हें लगता है कि अमेरिका इसे बनाए रखेगा। होर्मुज जलडमरूमध्य वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिए बेहद महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग माना जाता है, इसलिए इस पर अमेरिका और ईरान के दावों ने संघर्ष की गंभीरता को और बढ़ा दिया है।
अमेरिका-ईरान तनाव में आगे क्या होगा?
एक तरफ ईरान की ओर से युद्ध को लंबे समय तक जारी रखने की बात कही जा रही है, तो दूसरी तरफ ट्रंप होर्मुज जलडमरूमध्य पर अमेरिकी नियंत्रण बनाए रखने का दावा कर रहे हैं। ऐसे में दोनों देशों के बीच टकराव सिर्फ मौजूदा सैन्य संघर्ष तक सीमित रहने के बजाय लंबा खिंचने की आशंका पर चर्चा तेज हो गई है।
मोहम्मद रजा नकदी का बयान खास तौर पर इसलिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि इसमें ईरान की ओर से संघर्ष को अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप के कार्यकाल के अंत तक जारी रखने जैसी रणनीति का संकेत दिया गया है। हालांकि, युद्ध की वास्तविक दिशा और इसके आगे के परिणाम आने वाले समय में सैन्य और राजनीतिक घटनाक्रम पर निर्भर करेंगे।
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