उपेंद्र द्विवेदी का बड़ा दौरा: महाराष्ट्र-गुजरात-गोवा मुख्यालय में ऑपरेशनल तैयारी की समीक्षा, चार सैनिकों को ऑन-द-स्पॉट प्रशस्ति पत्र

नई दिल्ली: भारतीय सेना के प्रमुख उपेंद्र द्विवेदी ने महाराष्ट्र, गुजरात और गोवा क्षेत्र के सैन्य मुख्यालय का व्यापक दौरा कर जमीनी स्तर पर परिचालन तैयारियों का आकलन किया। इस दौरान वरिष्ठ अधिकारियों ने उन्हें परिचालन रसद, प्रशिक्षण ढांचे, प्रशासनिक व्यवस्थाओं और बदलते सुरक्षा परिदृश्यों के अनुरूप की गई तैयारियों की विस्तृत जानकारी दी। सेना प्रमुख के समक्ष रियर एरिया सुरक्षा को मजबूत करने, एकीकृत रसद प्रणाली को और प्रभावी बनाने तथा सैन्य-नागरिक समन्वय को निर्बाध रखने की रणनीति पर विशेष प्रस्तुति दी गई।

बदलते सुरक्षा परिदृश्य में सेना की तैयारी पर फोकस

दौरे के दौरान अधिकारियों ने बताया कि किसी भी आपात या संवेदनशील स्थिति में ऑपरेशन को बिना बाधा जारी रखने के लिए बहु-स्तरीय सुरक्षा ढांचा तैयार किया गया है। एकीकृत लॉजिस्टिक सपोर्ट सिस्टम के जरिए आवश्यक संसाधनों की त्वरित उपलब्धता सुनिश्चित की जा रही है। सेना प्रमुख ने इस बात पर जोर दिया कि मजबूत कमान संरचना और समर्थन तंत्र ही परिचालन उत्कृष्टता की असली आधारशिला हैं। उन्होंने सभी रैंकों के सैन्य कर्मियों की पेशेवर प्रतिबद्धता और अनुशासन की सराहना करते हुए सैनिकों के कल्याण को सर्वोच्च प्राथमिकता देने की बात दोहराई।

चार सैन्य कर्मियों को मौके पर सम्मान

इस अवसर पर सेना प्रमुख ने उत्कृष्ट सेवा देने वाले चार सैन्य कर्मियों को मौके पर ही प्रशस्ति पत्र प्रदान किए। उन्होंने कहा कि जमीनी स्तर पर समर्पण और तत्परता ही सेना की असली ताकत है। सैनिकों के मनोबल, प्रशिक्षण और कल्याण पर निरंतर ध्यान देना समय की आवश्यकता है, ताकि किसी भी चुनौती का सामना पूरी तैयारी के साथ किया जा सके।

आगरा में HADR क्षमता का प्रदर्शन, 25 देशों के पत्रकार रहे मौजूद

इसी कड़ी में सेना ने मानवीय सहायता और आपदा राहत (HADR) अभियानों में अपनी विशेषज्ञता का भी प्रदर्शन किया। समाचार एजेंसी आईएएनएस के मुताबिक आगरा में आयोजित विशेष कार्यक्रम में दुनिया के 25 देशों से आए 28 रक्षा पत्रकारों ने भारतीय सेना की उस विशेष यूनिट की कार्यप्रणाली को करीब से देखा, जो मानवतावादी सहायता और आपदा राहत अभियानों में विशेषज्ञ मानी जाती है।

भूकंप, बाढ़, चक्रवात में सबसे पहले पहुंचने की क्षमता

सेना अधिकारियों ने बताया कि भूकंप, बाढ़, चक्रवात या किसी भी बड़ी प्राकृतिक आपदा की सूचना मिलते ही पूर्व-निर्धारित योजना के तहत टीमें सक्रिय कर दी जाती हैं। किस टीम को जाना है, कौन सा उपकरण साथ ले जाना है और कितने समय में रवाना होना है—यह पूरा खाका पहले से तय रहता है। यही वजह है कि आपदा प्रभावित क्षेत्रों में सेना की त्वरित तैनाती संभव हो पाती है।

नागरिक प्रशासन और अंतरराष्ट्रीय समन्वय की मजबूत व्यवस्था

अधिकारियों ने यह भी स्पष्ट किया कि आपदा की स्थिति में नागरिक प्रशासन के साथ समन्वय बनाकर काम किया जाता है। आवश्यकता पड़ने पर अन्य देशों की सरकारों के साथ भी तालमेल स्थापित कर राहत कार्यों को गति दी जाती है। विशेष HADR कार्यबल को इस प्रकार प्रशिक्षित किया गया है कि वह तत्काल चिकित्सा सहायता, भोजन, पेयजल और आवश्यक सामग्री प्रभावित लोगों तक पहुंचा सके।

कार्यक्रम के दौरान आधुनिक बचाव उपकरणों का प्रदर्शन भी किया गया, जिनमें पानी में चलने वाली हल्की नावें, बाढ़ राहत उपकरण और तेजी से स्थापित किए जाने वाले अस्थायी पुल शामिल रहे। इन संसाधनों के जरिए सेना जटिल से जटिल परिस्थितियों में भी राहत एवं बचाव कार्यों को अंजाम देने में सक्षम है।

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