1973 से अब तक 51.6% घटा पुरुषों का स्पर्म काउंट, भारत के आंकड़े भी बेहद चिंताजनक; जानिए क्या है इसके पीछे की मुख्य वजहें

आज के दौर में खराब जीवनशैली और खानपान से जुड़ी कई समस्याएं तेजी से पैर पसार रही हैं, जिनमें पुरुषों में घटता स्पर्म काउंट (Sperm Count Decline) एक गंभीर वैश्विक और स्वास्थ्य चिंता का विषय बनता जा रहा है। इसका सीधा असर पुरुषों की फर्टिलिटी (Fertility) क्षमता पर पड़ रहा है। हाल ही में सामने आए आंकड़े और रिसर्च रिपोर्ट्स डराने वाली हैं, जिसमें खुलासा हुआ है कि पिछले कुछ दशकों में पुरुषों के स्पर्म काउंट में आधी से ज्यादा की भारी गिरावट दर्ज की गई है।

क्या कहते हैं दुनिया और भारत के आंकड़े?

एक प्रमुख वैश्विक अध्ययन के चौंकाने वाले आंकड़े सामने आए हैं:

  • 51.6% की भारी गिरावट: इस रिपोर्ट के मुताबिक, साल 1973 से 2018 के बीच दुनिया भर के पुरुषों के स्पर्म काउंट में 51.6 प्रतिशत की भारी गिरावट दर्ज की गई है।

  • साल 2000 के बाद और तेज हुई रफ्तार: वैज्ञानिकों का कहना है कि साल 2000 के बाद से स्पर्म काउंट घटने की यह रफ्तार और अधिक तेज हो गई है।

  • भारत में भी स्थिति गंभीर: वैश्विक ट्रेंड की तरह ही भारत में भी महानगरों और शहरी इलाकों में रहने वाले युवाओं और पुरुषों में फर्टिलिटी से जुड़ी समस्याएं तेजी से बढ़ रही हैं, जो विशेषज्ञों के लिए चिंता का बड़ा कारण है।

(नोट: स्पर्म काउंट कम होने का मतलब यह कतई नहीं है कि पुरुष पिता नहीं बन सकता, लेकिन यह फर्टिलिटी की संभावनाओं और सफलता की दर को काफी हद तक कमजोर जरूर कर देता है।)

स्पर्म काउंट में गिरावट के प्रमुख कारण

स्वास्थ्य विशेषज्ञों और डॉक्टरों के अनुसार, पुरुषों के स्पर्म काउंट में आ रही इस गिरावट के पीछे कई आधुनिक और लाइफस्टाइल से जुड़े कारक जिम्मेदार हैं:

  1. खराब जीवनशैली और खानपान: अत्यधिक जंक फूड, प्रोसेड फूड का सेवन और पोषक तत्वों की कमी का सीधा असर हॉर्मोन्स और स्पर्म क्वालिटी पर पड़ता है।

  2. तनाव और एंग्जायटी: मानसिक तनाव, काम का अत्यधिक दबाव और नींद पूरी न होना शरीर में हॉर्मोनल असंतुलन पैदा करता है।

  3. बढ़ता प्रदूषण और टॉक्सिन: हवा में मौजूद प्रदूषण, प्लास्टिक में पाए जाने वाले केमिकल्स (जैसे BPA) और हानिकारक विकिरण (रेडिएशन) का प्रभाव।

  4. बैठकर काम करने की आदत (Sedentary Lifestyle): लंबे समय तक एक ही जगह बैठे रहना, शारीरिक श्रम की कमी और अत्यधिक धूम्रपान व शराब का सेवन भी इसके मुख्य कारणों में शामिल है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि समय रहते खानपान में सुधार, नियमित एक्सरसाइज और हेल्दी लाइफस्टाइल को अपनाया जाए, तो इस गिरावट की रफ्तार को काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है।

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