सोमनाथ मंदिर के पास नॉनवेज बेचने पर रोक को गुजरात हाईकोर्ट ने हटाया, कलेक्टर के आदेश पर उठाए सवाल; कारोबारियों को मिली राहत

गुजरात के प्रसिद्ध सोमनाथ मंदिर के आसपास नॉनवेज खाद्य पदार्थों की बिक्री और भंडारण पर लगाई गई पाबंदी को लेकर बड़ा कानूनी घटनाक्रम सामने आया है। गुजरात हाईकोर्ट ने इस प्रतिबंध को चुनौती देने वाले कारोबारियों की याचिका पर फैसला सुनाते हुए सरकारी आदेश को रद्द कर दिया। अदालत ने माना कि जिला प्रशासन ने अपने अधिकारों का इस्तेमाल निर्धारित कानूनी सीमाओं से आगे जाकर किया। इस फैसले से उन होटल और रेस्टोरेंट संचालकों को राहत मिली है, जिनका कारोबार सरकारी प्रतिबंध से प्रभावित हो रहा था।

सोमनाथ मंदिर के आसपास क्यों लगाया गया था प्रतिबंध?

दरअसल, गुजरात सरकार और स्थानीय प्रशासन की ओर से अगस्त 2026 में सोमनाथ क्षेत्र के कुछ निर्धारित इलाकों में मांसाहारी खाद्य पदार्थों की बिक्री, तैयारी और भंडारण पर प्रतिबंध लगाने की अधिसूचना जारी की गई थी।

इस आदेश के तहत सोमनाथ मंदिर के 500 मीटर के दायरे सहित छह निर्धारित क्षेत्रों को प्रतिबंधित जोन में शामिल किया गया था। प्रशासन का तर्क था कि धार्मिक स्थल पर आने वाले श्रद्धालुओं की भावनाओं और तीर्थ क्षेत्र की धार्मिक पहचान को ध्यान में रखते हुए यह कदम उठाया गया है।

प्रतिबंध के दायरे में आने वाले कई होटल और रेस्टोरेंट संचालकों का कहना था कि वे लंबे समय से कानूनी लाइसेंस के साथ अपना कारोबार कर रहे हैं। अचानक प्रतिबंध लगाए जाने से उनकी आजीविका पर असर पड़ रहा है।

रेस्टोरेंट संचालकों ने हाईकोर्ट में दी थी चुनौती

सरकारी आदेश के खिलाफ सोमनाथ के रेस्टोरेंट और भोजनालय संचालकों ने गुजरात हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। याचिकाकर्ताओं का तर्क था कि संविधान के अनुच्छेद 19(1)(g) के तहत उन्हें कानूनी व्यवसाय करने का मौलिक अधिकार प्राप्त है।

उनका कहना था कि जिला प्रशासन किसी वैध व्यवसाय को बिना पर्याप्त कानूनी आधार के बंद नहीं करा सकता। याचिकाकर्ताओं ने यह भी आरोप लगाया कि प्रशासन ने अपनी शक्तियों का इस्तेमाल करते हुए स्थायी प्रतिबंध लगा दिया, जबकि इस तरह का फैसला लेने के लिए निर्धारित कानूनी प्रक्रिया का पालन जरूरी था।

सरकार ने धार्मिक भावनाओं का दिया था हवाला

मामले की सुनवाई के दौरान गुजरात सरकार ने प्रतिबंध का बचाव किया था। सरकार की ओर से दलील दी गई कि सोमनाथ केवल एक व्यावसायिक शहर नहीं है, बल्कि करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था से जुड़ा प्रमुख धार्मिक और ऐतिहासिक तीर्थस्थल है।

सरकार ने अदालत को बताया था कि बड़ी संख्या में श्रद्धालु सोमनाथ मंदिर पहुंचते हैं और तीर्थ क्षेत्र की धार्मिक प्रकृति को बनाए रखना प्रशासन की जिम्मेदारी है। सरकार का यह भी कहना था कि संबंधित रेस्टोरेंट पूरी तरह बंद नहीं किए जा रहे, बल्कि वे निर्धारित क्षेत्रों में शाकाहारी भोजन बेचकर अपना कारोबार जारी रख सकते हैं।

अदालत ने प्रशासनिक अधिकारों के इस्तेमाल पर उठाए सवाल

हाईकोर्ट के सामने मुख्य सवाल यह था कि क्या जिला प्रशासन को किसी वैध व्यवसाय पर इस तरह स्थायी प्रतिबंध लगाने का अधिकार है? अदालत ने प्रशासनिक आदेश की कानूनी वैधता और कलेक्टर की शक्तियों के दायरे पर विचार किया।

फैसले में प्रशासन की कार्रवाई को अधिकारों के गलत इस्तेमाल से जोड़ते हुए प्रतिबंधात्मक आदेश को रद्द किए जाने की जानकारी सामने आई है। इस फैसले को धार्मिक स्थलों के आसपास व्यापारिक गतिविधियों को नियंत्रित करने के प्रशासनिक अधिकारों और नागरिकों के व्यवसाय करने के मौलिक अधिकार के बीच महत्वपूर्ण कानूनी घटनाक्रम माना जा रहा है।

कारोबारियों के लिए क्या होगा फैसले का मतलब?

इस आदेश से प्रभावित कारोबारियों को राहत मिलने की उम्मीद है। हालांकि, इसका अर्थ यह नहीं है कि सोमनाथ क्षेत्र में खाद्य कारोबार पर लागू सभी नियम खत्म हो गए हैं। खाद्य सुरक्षा, स्थानीय निकायों के नियम, लाइसेंस और अन्य लागू कानूनी प्रावधान पहले की तरह प्रभावी रहेंगे।

अदालत के फैसले का वास्तविक दायरा उसके लिखित आदेश और उसमें निर्धारित शर्तों से स्पष्ट होगा।

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