‘312 सीटों वाली जीत याद दिलाने आया हूं’, अमित शाह का यूपी BJP को चुनावी मंत्र; 2027 के लिए बूथ मैनेजमेंट पर खास जोर

उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 को लेकर भारतीय जनता पार्टी ने अपनी संगठनात्मक और चुनावी तैयारियां तेज कर दी हैं। इसी सिलसिले में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह शुक्रवार, 30 अक्टूबर को लखनऊ में आयोजित भाजपा की प्रदेश कार्यसमिति की महाबैठक में शामिल हुए। यहां उन्होंने पार्टी के हजारों नेताओं और कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए 2017 के विधानसभा चुनाव में मिली ऐतिहासिक जीत की याद दिलाई। शाह ने कहा कि वह कार्यकर्ताओं को 312 सीटों वाली रिकॉर्ड जीत याद दिलाने आए हैं। उन्होंने कार्यकर्ताओं से एक बार फिर पूरी ताकत के साथ चुनावी मैदान में उतरने का आह्वान किया।

2017 की जीत को बनाया 2027 की तैयारी का आधार

अमित शाह ने अपने संबोधन में कहा कि 2017 के विधानसभा चुनाव में उत्तर प्रदेश के कार्यकर्ताओं ने 40 प्रतिशत वोट हासिल करके भाजपा को 312 सीटों पर जीत दिलाई थी। उन्होंने 2022 के विधानसभा चुनाव का भी जिक्र किया और कहा कि उस चुनाव में पार्टी को करीब 41 प्रतिशत वोट मिले थे।

शाह ने कार्यकर्ताओं से कहा कि पार्टी की असली ताकत उसका बूथ स्तर का कार्यकर्ता है। चुनाव में जीत हासिल करने के लिए संगठन को मजबूत करना और हर बूथ पर प्रभावी मौजूदगी बनाए रखना जरूरी है।

उन्होंने कार्यकर्ताओं को अर्जुन की तरह लक्ष्य पर ध्यान केंद्रित करने का संदेश दिया और कहा कि पार्टी को 2027 में फिर से बहुमत की सरकार बनाने के लिए अभी से मेहनत करनी होगी।

लखनऊ में 2,850 प्रतिनिधियों की महाबैठक

भाजपा की यह प्रदेश कार्यसमिति बैठक लखनऊ स्थित डॉ. राम मनोहर लोहिया राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय के डॉ. भीमराव आंबेडकर सभागार में आयोजित की गई।

इस दो दिवसीय बैठक के लिए प्रदेशभर से लगभग 2,850 प्रतिनिधियों को आमंत्रित किया गया। इसमें केंद्रीय मंत्री, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य और ब्रजेश पाठक, सांसद, विधायक, विधान परिषद सदस्य, जिलाध्यक्ष और संगठन के वरिष्ठ पदाधिकारी शामिल हुए।

बैठक की अध्यक्षता भाजपा प्रदेश अध्यक्ष और केंद्रीय वित्त राज्यमंत्री पंकज चौधरी ने की। अमित शाह पहले दिन मुख्य वक्ता के रूप में शामिल हुए, जबकि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का संबोधन समापन सत्र के लिए निर्धारित था।

2014 और 2017 का चुनावी फॉर्मूला फिर अपनाने की तैयारी

भाजपा की इस बैठक में पार्टी के पुराने चुनावी अनुभवों को 2027 की रणनीति से जोड़ने पर जोर दिया गया। पार्टी 2014 के लोकसभा चुनाव और 2017 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में अपनाए गए संगठनात्मक मॉडल की समीक्षा कर रही है।

इस रणनीति में बूथ प्रबंधन, सामाजिक समीकरण, स्थानीय कार्यकर्ताओं की सक्रियता और सरकारी योजनाओं को जनता तक पहुंचाने जैसे मुद्दे शामिल हैं।

2024 के लोकसभा चुनाव में उत्तर प्रदेश में भाजपा को अपेक्षित प्रदर्शन नहीं मिला था। समाजवादी पार्टी ने राज्य में बेहतर प्रदर्शन करते हुए राजनीतिक मुकाबले को नया रूप दिया। ऐसे में भाजपा के सामने अपने संगठन को दोबारा मजबूत करने और विभिन्न सामाजिक वर्गों तक पहुंच बढ़ाने की चुनौती है।

योगी सरकार की तारीफ, माफिया और कानून-व्यवस्था का मुद्दा उठाया

अपने भाषण में अमित शाह ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सरकार की भी तारीफ की। उन्होंने कहा कि प्रदेश में कानून-व्यवस्था को मजबूत करने और माफिया के खिलाफ कार्रवाई करने के लिए सरकार ने कदम उठाए हैं।

शाह ने राम मंदिर, अनुच्छेद 370 और समान नागरिक संहिता (UCC) जैसे मुद्दों का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि जिन राज्यों में समान नागरिक संहिता लागू हो चुकी है, उसी तरह उत्तर प्रदेश में भी भाजपा की सरकार बनने पर इसे लागू करने की दिशा में काम किया जाएगा।

उन्होंने समाजवादी पार्टी पर भी राजनीतिक हमला बोला और 2027 में भाजपा की सरकार दोबारा बनाने का दावा किया।

2024 के झटके से उबरने की चुनौती

लोकसभा चुनाव 2024 में उत्तर प्रदेश की राजनीतिक तस्वीर भाजपा के लिए चुनौतीपूर्ण रही थी। समाजवादी पार्टी और कांग्रेस के गठबंधन ने बेहतर प्रदर्शन किया था। इसके बाद भाजपा संगठन में बूथ स्तर पर कामकाज, सामाजिक समीकरणों और चुनावी रणनीति को लेकर समीक्षा की जरूरत महसूस की गई।

लखनऊ की प्रदेश कार्यसमिति बैठक को इसी संगठनात्मक कवायद का हिस्सा माना जा रहा है। पार्टी का जोर केवल बड़े नेताओं के भाषणों तक सीमित रहने के बजाय जिला, मंडल और बूथ स्तर पर कार्यकर्ताओं की जिम्मेदारी तय करने पर है।अब देखना होगा कि भाजपा की यह रणनीति 2027 के विधानसभा चुनाव में किस तरह जमीन पर उतरती है।

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