
मॉस्को/तेहरान। रूस और ईरान के बीच सैन्य सहयोग को लेकर एक नया दावा सामने आया है। NBC News की रिपोर्ट के मुताबिक, रूस कथित तौर पर एक गुप्त समुद्री रास्ते के जरिए ईरान के सैन्य भंडार को मजबूत करने में मदद कर रहा है। रिपोर्ट में दावा किया गया है कि रूस से ईरान भेजी जाने वाली खेप में TNT विस्फोटक, ड्रोन के कलपुर्जे और गोला-बारूद शामिल हैं। कुछ सामग्री के बैलिस्टिक मिसाइलों के निर्माण में इस्तेमाल होने की आशंका भी जताई गई है।
यूरोपीय दस्तावेज में क्या दावा किया गया?
NBC News ने एक यूरोपीय सरकार के दस्तावेज का हवाला देते हुए बताया कि सैटेलाइट तस्वीरों से कुछ ऐसी गतिविधियों के संकेत मिले हैं, जिनसे ईरान तक सैन्य सामग्री पहुंचाए जाने की आशंका पैदा हुई है। दस्तावेज के मुताबिक, भेजी जा रही सामग्री में ऐसे कुछ पार्ट्स भी हो सकते हैं, जिनका इस्तेमाल बैलिस्टिक मिसाइल तैयार करने में किया जा सकता है।
यह दावा ऐसे समय सामने आया है, जब हालिया अमेरिका-इजराइल और ईरान के बीच संघर्ष के दौरान ईरान के सैन्य भंडार को नुकसान पहुंचने की बात कही गई थी। ऐसे में रूस की ओर से संभावित सैन्य सप्लाई ईरान के लिए अहम मानी जा रही है।
कैस्पियन सागर बना कथित सप्लाई रूट
रिपोर्ट के अनुसार, रूस इस कथित सप्लाई के लिए कैस्पियन सागर के समुद्री रास्ते का इस्तेमाल कर रहा है। कैस्पियन सागर के आसपास रूस, ईरान, कजाकिस्तान, तुर्कमेनिस्तान और अजरबैजान स्थित हैं। इस भौगोलिक स्थिति के कारण यह रास्ता रूस और ईरान के बीच सामान की आवाजाही के लिए एक अहम समुद्री गलियारा बन सकता है।
रिपोर्ट में दावा किया गया है कि इस रास्ते का इस्तेमाल पश्चिमी देशों की निगरानी से बचने के लिए भी किया जा सकता है। समुद्र में चलने वाले जहाजों के लिए इस्तेमाल होने वाला ऑटोमेटिक आइडेंटिफिकेशन सिस्टम यानी AIS बंद किया जा सकता है, जिससे जहाज की वास्तविक आवाजाही पर नजर रखना मुश्किल हो जाता है।
ट्रैकिंग सिस्टम बंद होने से बढ़ती है निगरानी की चुनौती
AIS एक ऐसी प्रणाली है, जिसके जरिए समुद्री जहाजों की स्थिति और आवाजाही से जुड़ी जानकारी ट्रैक की जा सकती है। किसी जहाज का यह सिस्टम बंद होने पर उसकी गतिविधियों की निगरानी कठिन हो जाती है। इसी वजह से कैस्पियन सागर का रास्ता संवेदनशील सैन्य सामग्री की संभावित आवाजाही के लिहाज से चर्चा में आया है।
हालांकि, सामने आई जानकारी मुख्य रूप से NBC News की रिपोर्ट और उसके द्वारा उद्धृत यूरोपीय सरकारी दस्तावेज पर आधारित है। उपलब्ध दावों से यह संकेत मिलता है कि रूस और ईरान के बीच सैन्य सामग्री की संभावित आपूर्ति को लेकर पश्चिमी देशों की चिंता बढ़ी हुई है।
ईरान के सैन्य भंडार पर क्यों है नजर?
अमेरिका और इजराइल के साथ हालिया संघर्ष में ईरान ने बड़ी मात्रा में मिसाइल और ड्रोन क्षमता का इस्तेमाल किया था। संघर्ष के दौरान उसके सैन्य ठिकानों और हथियारों के भंडार को नुकसान पहुंचने की खबरें भी सामने आई थीं। ऐसे में यदि रूस से सैन्य सामग्री की सप्लाई होती है, तो इससे ईरान अपनी क्षतिग्रस्त सैन्य क्षमता को दोबारा मजबूत करने की कोशिश कर सकता है।
रूस की ओर से कथित तौर पर भेजे जा रहे सामान में ड्रोन पार्ट्स, गोला-बारूद और विस्फोटक जैसी सामग्री का जिक्र किया गया है। इसके अलावा बैलिस्टिक मिसाइलों से जुड़े संभावित पार्ट्स का दावा इस पूरे मामले को और संवेदनशील बना देता है।
कैस्पियन रूट से सप्लाई ने बढ़ाई पश्चिमी देशों की चिंता
कैस्पियन सागर के रास्ते होने वाली संभावित आवाजाही की निगरानी करना पश्चिमी देशों के लिए चुनौतीपूर्ण हो सकता है। खासकर तब, जब जहाजों की ट्रैकिंग के लिए इस्तेमाल होने वाला AIS सिस्टम बंद कर दिया जाए। यही वजह है कि रूस से ईरान तक सैन्य सामग्री पहुंचाने के कथित समुद्री रूट को लेकर सुरक्षा एजेंसियों की निगाहें बढ़ सकती हैं।
फिलहाल, सामने आई रिपोर्ट में जिन गतिविधियों का उल्लेख किया गया है, उन्हें सैटेलाइट तस्वीरों और एक यूरोपीय सरकार के दस्तावेज के आधार पर सामने रखा गया है। रूस और ईरान की ओर से इन दावों पर क्या आधिकारिक प्रतिक्रिया आती है, यह इस मामले में आगे महत्वपूर्ण होगा।
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