
Trishuli River Explosives: नेपाल में हालिया भयानक बाढ़ के बाद चीन सीमा के नजदीक त्रिशूली नदी के किनारे विस्फोटक पदार्थ मिलने से हड़कंप मच गया है। गोरखा जिले की शहीद लखन ग्रामीण नगरपालिका-3 के सिलिंगटार इलाके में नदी किनारे मिले इन विस्फोटकों को नेपाली सेना ने सुरक्षित तरीके से नष्ट कर दिया है। इस घटना के बाद जहां सुरक्षा को लेकर सवाल उठ रहे हैं, वहीं कुछ नेपाली पत्रकारों ने चीन की गतिविधियों और सीमा क्षेत्र में पर्यावरणीय बदलाव को लेकर गंभीर आरोप लगाए हैं।
त्रिशूली नदी के किनारे मिले विस्फोटक
जानकारी के मुताबिक, त्रिशूली नदी में पानी के तेज बहाव के साथ बहकर आया विस्फोटक पदार्थ गुरुवार दोपहर करीब 2:30 बजे नदी के किनारे मिला था। इसकी सूचना मिलने के बाद नेपाली सेना सक्रिय हुई। नेपाली सेना की रुद्रध्वज बटालियन की एक टीम ने मौके पर पहुंचकर विस्फोटक को सुरक्षित तरीके से नष्ट कर दिया।
बताया गया है कि इससे एक दिन पहले भी इस विस्फोटक पदार्थ को नष्ट करने का प्रयास किया गया था, लेकिन वह कोशिश सफल नहीं हो सकी। इसके बाद नेपाली सेना की टीम ने दोबारा कार्रवाई करते हुए इसे नष्ट किया।
बाढ़ के बाद विस्फोटक मिलने से बढ़ी चिंता
नेपाल में हाल में आई भयानक बाढ़ के बाद नदी के जलस्तर और बहाव को लेकर पहले से ही चिंता बनी हुई है। ऐसे में त्रिशूली नदी के किनारे विस्फोटक पदार्थ मिलने की घटना ने सुरक्षा और सीमा क्षेत्र में होने वाली गतिविधियों को लेकर नए सवाल खड़े कर दिए हैं।
विस्फोटक नदी के पानी के साथ बहकर वहां तक पहुंचा था या यह किसी अन्य वजह से नदी किनारे आया, इस संबंध में उपलब्ध जानकारी में कोई अंतिम निष्कर्ष सामने नहीं आया है। हालांकि, घटना ने स्थानीय स्तर पर चिंता जरूर बढ़ा दी है।
नेपाली पत्रकारों ने चीन को लेकर क्या दावा किया?
इस घटना के बीच नेपाली पत्रकारों की ओर से चीन को लेकर गंभीर आरोप लगाए गए हैं। एक बयान में रसुवा सीमा के पास बने गाइरोंग पोर्ट और नदी के बहाव का जिक्र करते हुए दावा किया गया कि इस बंदरगाह का निर्माण नदियों के संगम के पास जानबूझकर किया गया है।
पत्रकारों के मुताबिक, इस तरह की स्थिति से नेपाली इलाके की ओर नदी के पानी की गति बढ़ सकती है। बयान में इसे कथित तौर पर जानबूझकर किया गया पारिस्थितिक विनाश बताया गया है। हालांकि, चीन की ओर से इन आरोपों पर इस खबर में कोई प्रतिक्रिया उपलब्ध नहीं है।
गाइरोंग पोर्ट को लेकर भी उठे सवाल
रसुवा सीमा पर स्थित गाइरोंग पोर्ट को लेकर नेपाली पत्रकारों के बयान में पर्यावरणीय प्रभाव का मुद्दा उठाया गया है। आरोप लगाया गया है कि नदियों के संगम के पास बंदरगाह के निर्माण से पानी के बहाव पर असर पड़ सकता है और इसका प्रभाव नेपाल की तरफ दिखाई दे सकता है।
यह दावा ऐसे समय में सामने आया है जब नेपाल में बाढ़ और उसके बाद त्रिशूली नदी के किनारे विस्फोटक मिलने की घटना चर्चा में है। हालांकि, विस्फोटक मिलने और गाइरोंग पोर्ट के निर्माण के बीच किसी सीधे संबंध की आधिकारिक पुष्टि सामने नहीं आई है।
नेपाली सेना ने विस्फोटक को किया नष्ट
नेपाली सेना के मुताबिक, नदी के किनारे मिले विस्फोटक पदार्थ को रुद्रध्वज बटालियन की टीम ने सुरक्षित रूप से नष्ट कर दिया। इस कार्रवाई के बाद तत्काल खतरा टाल दिया गया है। घटना के स्रोत और विस्फोटक के नदी तक पहुंचने की परिस्थितियों को लेकर सवाल अभी भी बने हुए हैं।
त्रिशूली नदी नेपाल के महत्वपूर्ण नदी तंत्र का हिस्सा है और इसके किनारे विस्फोटक मिलने की घटना बाढ़ के बाद सामने आने के कारण विशेष रूप से ध्यान खींच रही है। फिलहाल उपलब्ध जानकारी में यह स्पष्ट नहीं है कि विस्फोटक कहां से आया था और उसका इस्तेमाल किस उद्देश्य से किया जाना था।
चीन-नेपाल सीमा क्षेत्र में बढ़ी निगाह
त्रिशूली नदी में विस्फोटक मिलने और इसके साथ नेपाली पत्रकारों की ओर से चीन को लेकर लगाए गए आरोपों ने सीमा क्षेत्र में गतिविधियों को लेकर बहस तेज कर दी है। हालांकि, किसी भी आरोप को आधिकारिक जांच या पुष्ट प्रमाण के बिना तथ्य के तौर पर नहीं माना जा सकता।
फिलहाल नेपाली सेना द्वारा विस्फोटक को नष्ट किए जाने की पुष्टि हुई है। वहीं, गाइरोंग पोर्ट और नदी के बहाव को लेकर लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि इस खबर में उपलब्ध नहीं है। ऐसे में घटना से जुड़े सभी पहलुओं पर आधिकारिक जानकारी और जांच के निष्कर्ष का इंतजार रहेगा।
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