‘उमर अब्दुल्ला और निधि राजदान की शादी नाजायज…’: बरेली के मौलाना शहाबुद्दीन रजवी के बयान से मचा सियासी और धार्मिक बवाल

जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला (Omar Abdullah) और वरिष्ठ पत्रकार निधि राजदान (Nidhi Razdan) की शादी को लेकर विवादों का दौर शुरू हो गया है। उत्तर प्रदेश के बरेली जिले के प्रमुख मुस्लिम धर्मगुरु और दरगाह आला हजरत से जुड़े मौलाना शहाबुद्दीन रजवी (Maulana Shahabuddin Razvi) ने इस विवाह पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए इसे इस्लामिक शरीयत के खिलाफ और ‘नाजायज’ करार दिया है, जिससे राजनीतिक और धार्मिक गलियारों में हलचल तेज हो गई है।

मौलाना शहाबुद्दीन रजवी ने क्या दिया बयान?

मौलाना शहाबुद्दीन रजवी ने मीडिया से बातचीत करते हुए इस शादी पर आपत्ति जताई और शरीयत के नियमों का हवाला दिया:

  • निकाह और धर्म परिवर्तन का मुद्दा: मौलाना ने कहा कि इस्लाम धर्म के मुताबिक शादी (निकाह) के लिए दोनों पक्षों का मुस्लिम होना या निकाह के नियमों का पालन करना अनिवार्य है। उन्होंने कहा कि स्पेशल मैरेज एक्ट के तहत हुई इस तरह की शादियां इस्लामिक कानून (शरीयत) की नजर में मान्य नहीं हैं।

  • शरिया के खिलाफ करार: मौलाना ने बयान देते हुए कहा कि इस तरह के रिश्ते और विवाह शरीयत के दायरे से बाहर हैं, इसलिए इसे वैध नहीं माना जा सकता। उनके इस बयान के सामने आने के बाद से सोशल मीडिया और विभिन्न मंचों पर इस पर बहस छिड़ गई है।

राजनीतिक और सामाजिक हलकों में चर्चाएं तेज

उमर अब्दुल्ला और निधि राजदान ने स्पेशल मैरेज एक्ट के तहत अपने जीवन के नए सफर की शुरुआत की है, जिसकी तस्वीरें सोशल मीडिया पर खूब वायरल हुई थीं। हालांकि, अब इस विवाह पर धार्मिक गुरुओं की तीखी प्रतिक्रिया आने के बाद यह मामला केवल व्यक्तिगत नहीं, बल्कि एक बार फिर अंतर-धार्मिक विवाह और पर्सनल लॉ के पुराने बहसों के केंद्र में आ गया है।

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