बिठूर की मिट्टी की गुल्लकों को योगी सरकार ने दी नई पहचान, IIT कानपुर के साथ मिलकर बदल रही पारंपरिक माटीकला की तस्वीर

उत्तर प्रदेश में पारंपरिक कला और स्थानीय कारीगरों को नई पहचान दिलाने की दिशा में मुख्यमंत्री Yogi Adityanath की सरकार लगातार काम कर रही है। इसी कड़ी में कानपुर के ऐतिहासिक क्षेत्र Bithoor की प्रसिद्ध मिट्टी की गुल्लकों को आधुनिक रूप देकर नया जीवन देने की पहल शुरू की गई है। अब ये पारंपरिक गुल्लकें आकर्षक डिजाइन, चमकदार रंगों और नए स्वरूप में तैयार की जा रही हैं, जिससे बच्चों के साथ-साथ युवाओं में भी इनका आकर्षण बढ़ रहा है।

आईआईटी कानपुर और जिला प्रशासन की संयुक्त पहल से इस पारंपरिक माटीकला को तकनीकी सहयोग दिया जा रहा है। खास बात यह है कि इस अभियान का उद्देश्य केवल स्थानीय कारीगरों को रोजगार देना नहीं, बल्कि बच्चों को बचत की आदत और भारतीय संस्कारों से जोड़ना भी है।

मिट्टी की गुल्लक बनेगी बचत और संस्कार का प्रतीक

एक समय था जब दादी-नानी बच्चों को मिट्टी की गुल्लक देकर बचत की सीख देती थीं। बदलते दौर में डिजिटल भुगतान और आधुनिक लाइफस्टाइल के कारण यह परंपरा धीरे-धीरे खत्म होती जा रही थी। अब योगी सरकार इस पारंपरिक संस्कृति को फिर से जीवित करने की दिशा में काम कर रही है।

जिला प्रशासन ने इस पहल को केवल हस्तशिल्प तक सीमित नहीं रखा है, बल्कि इसे भावनात्मक और सामाजिक अभियान का रूप दिया जा रहा है। अधिकारियों का मानना है कि मिट्टी की गुल्लक बच्चों में आर्थिक अनुशासन, बचत की आदत और परिवार से जुड़ाव विकसित करने का सबसे सरल माध्यम बन सकती है।

IIT कानपुर दे रहा तकनीकी सहयोग

Indian Institute of Technology Kanpur के रंजीत सिंह रोजी शिक्षा केन्द्र प्रोजेक्ट के तहत स्थानीय कारीगरों को आधुनिक तकनीक और डिजाइनिंग की ट्रेनिंग दी जा रही है। इससे पारंपरिक गुल्लकों को नया लुक मिल रहा है और बाजार में उनकी मांग भी बढ़ने लगी है।

कारीगरों को बेहतर गुणवत्ता, टिकाऊपन और आकर्षक रंग संयोजन के बारे में प्रशिक्षित किया जा रहा है, ताकि ये उत्पाद राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी अपनी पहचान बना सकें। इससे बिठूर के कुम्हार परिवारों को आर्थिक मजबूती मिलने की उम्मीद है।

स्थानीय कारीगरों को मिलेगा बड़ा फायदा

सरकार की इस पहल से वर्षों से पारंपरिक माटीकला से जुड़े कारीगरों में नई उम्मीद जगी है। आधुनिक बाजार की मांग के अनुसार तैयार हो रही गुल्लकों से उनकी आय बढ़ने की संभावना है। प्रशासन का कहना है कि आने वाले समय में इन उत्पादों को मेलों, प्रदर्शनियों और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स के जरिए बड़े स्तर पर प्रमोट किया जाएगा।

विशेषज्ञों का मानना है कि अगर इसी तरह तकनीक और परंपरा का संतुलन बनाया गया तो उत्तर प्रदेश की पारंपरिक कला को देश-दुनिया में नई पहचान मिल सकती है।

बच्चों को बचत की सीख देने की तैयारी

जिलाधिकारी जितेन्द्र प्रताप सिंह के अनुसार आज के समय में बच्चों में बढ़ते अनावश्यक खर्चों को देखते हुए बचत की आदत विकसित करना बेहद जरूरी हो गया है। मिट्टी की गुल्लक इस दिशा में सबसे प्रभावी और आसान माध्यम साबित हो सकती है। यही वजह है कि इस अभियान को स्कूलों और सामाजिक कार्यक्रमों से भी जोड़ने की तैयारी की जा रही है।

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