
रूस ने एक बार फिर दुनिया को अपनी सैन्य ताकत का एहसास कराने के लिए बड़ा कदम उठाया है। यूक्रेन युद्ध के बीच रूस ने बेलारूस के साथ संयुक्त परमाणु सैन्य अभ्यास शुरू कर दिया है। इस सैन्य अभ्यास को लेकर यूरोप से लेकर अमेरिका तक हलचल तेज हो गई है। रूस का यह कदम सीधे तौर पर यूक्रेन और नाटो देशों को कड़ा संदेश माना जा रहा है। खास बात यह है कि इस अभ्यास में परमाणु क्षमता वाली मिसाइलों, आधुनिक फाइटर जेट और भारी हथियारों की तैनाती की गई है। बताया जा रहा है कि करीब 65 हजार सैनिक इस युद्धाभ्यास में हिस्सा ले रहे हैं।
परमाणु हथियारों के साथ शक्ति प्रदर्शन
रूस और बेलारूस की सेनाएं इस अभ्यास में रणनीतिक परमाणु हथियारों के इस्तेमाल से जुड़े ऑपरेशन का अभ्यास कर रही हैं। रूसी रक्षा मंत्रालय के अनुसार इस सैन्य अभ्यास का मकसद सेना की युद्ध तैयारी और आपातकालीन हालात में प्रतिक्रिया क्षमता को मजबूत करना है। अभ्यास के दौरान मिसाइल यूनिट, एयर डिफेंस सिस्टम और लड़ाकू विमानों की तैनाती भी की गई है।
रूस ने साफ संकेत दिए हैं कि अगर उसके खिलाफ किसी भी तरह की बड़ी सैन्य चुनौती खड़ी की जाती है तो वह जवाब देने के लिए पूरी तरह तैयार है। माना जा रहा है कि यह अभ्यास ऐसे समय में किया जा रहा है जब पश्चिमी देश लगातार यूक्रेन को सैन्य मदद दे रहे हैं।
NATO देशों में बढ़ी चिंता
रूस और बेलारूस का यह संयुक्त परमाणु अभ्यास नाटो देशों के लिए चिंता का विषय बन गया है। यूरोपीय देशों को डर है कि यूक्रेन युद्ध के बीच तनाव और ज्यादा बढ़ सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि रूस इस अभ्यास के जरिए यह दिखाना चाहता है कि वह किसी भी स्थिति से निपटने की क्षमता रखता है।
पिछले कुछ महीनों में रूस और पश्चिमी देशों के बीच तनाव लगातार बढ़ा है। अमेरिका और नाटो की ओर से यूक्रेन को आधुनिक हथियार और सैन्य सहायता देने के बाद रूस पहले भी कई बार चेतावनी दे चुका है।
बेलारूस की भूमिका भी हुई अहम
इस सैन्य अभ्यास में बेलारूस की भूमिका भी काफी अहम मानी जा रही है। बेलारूस पहले से ही रूस का करीबी सहयोगी रहा है और यूक्रेन युद्ध के दौरान उसने रूस को रणनीतिक समर्थन दिया है। अब संयुक्त परमाणु अभ्यास ने दोनों देशों की सैन्य साझेदारी को और मजबूत कर दिया है।
रूस और बेलारूस की बढ़ती सैन्य गतिविधियों पर पूरी दुनिया की नजर बनी हुई है। आने वाले दिनों में यह अभ्यास अंतरराष्ट्रीय राजनीति और सुरक्षा समीकरणों पर बड़ा असर डाल सकता है।
दुनिया भर में बढ़ी निगरानी
रूस के इस कदम के बाद वैश्विक स्तर पर सुरक्षा एजेंसियां और रक्षा विशेषज्ञ हालात पर नजर बनाए हुए हैं। परमाणु हथियारों से जुड़े किसी भी सैन्य अभ्यास को दुनिया गंभीरता से देखती है क्योंकि इससे क्षेत्रीय और वैश्विक सुरक्षा पर असर पड़ सकता है। फिलहाल यूक्रेन युद्ध के बीच रूस का यह शक्ति प्रदर्शन दुनिया के लिए बड़ा संकेत माना जा रहा है।
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