Major Abhilasha Barak UN Military Gender Advocate Award 2026: भारतीय सेना की मेजर अभिलाषा बराक ने एक बार फिर देश का नाम वैश्विक मंच पर रोशन किया है। संयुक्त राष्ट्र (UN) ने उन्हें प्रतिष्ठित ‘मिलिट्री जेंडर एडवोकेट ऑफ द ईयर अवॉर्ड 2025’ से सम्मानित किया है। इस उपलब्धि पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उन्हें बधाई देते हुए कहा कि उनकी सफलता देश की लाखों बेटियों और युवाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत है।
पीएम मोदी ने मेजर अभिलाषा बराक की उपलब्धि को बताया देश का गौरव
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट साझा कर मेजर अभिलाषा बराक को शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि लेबनान में संयुक्त राष्ट्र अंतरिम बल (UNIFIL) के तहत एंगेजमेंट टीम कमांडर और जेंडर फोकल प्वाइंट के रूप में कार्यरत मेजर बराक ने उत्कृष्ट सेवा का परिचय दिया है। प्रधानमंत्री ने कहा कि यह सम्मान न केवल उनकी व्यक्तिगत उपलब्धि है, बल्कि संयुक्त राष्ट्र शांति अभियानों में भारत की मजबूत और दीर्घकालिक भूमिका को भी दर्शाता है।
उन्होंने कहा कि मेजर बराक की यह सफलता उन अनगिनत युवाओं, विशेषकर बेटियों के लिए प्रेरणा है, जो देश और मानवता की सेवा का सपना देखती हैं।
कौन हैं मेजर अभिलाषा बराक?
मेजर अभिलाषा बराक भारतीय सेना की पहली महिला कॉम्बैट हेलीकॉप्टर पायलट के रूप में जानी जाती हैं। उन्होंने भारतीय सशस्त्र बलों में महिलाओं की बढ़ती भूमिका को नई पहचान दिलाई है। अपने साहस, नेतृत्व क्षमता और उत्कृष्ट सैन्य सेवा के दम पर उन्होंने कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाई हैं।
संयुक्त राष्ट्र द्वारा मिला यह सम्मान उन्हें शांति अभियानों में महिलाओं की भागीदारी और लैंगिक समानता को बढ़ावा देने के लिए प्रदान किया गया है। इसके साथ ही वह इस प्रतिष्ठित सम्मान को पाने वाली भारत की तीसरी महिला सैन्य अधिकारी बन गई हैं।
संयुक्त राष्ट्र महासचिव ने भी की सराहना
संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने पुरस्कार प्रदान करते हुए मेजर अभिलाषा बराक की विशेष प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि मेजर बराक उन लोगों के लिए प्रेरणास्रोत हैं जिनके साथ वह काम करती हैं और जिनकी सेवा करती हैं। उनके नेतृत्व और समर्पण ने शांति मिशनों में महिलाओं की भूमिका को और अधिक मजबूत बनाया है।
लेबनान में निभा रही हैं महत्वपूर्ण जिम्मेदारी
वर्तमान में मेजर अभिलाषा बराक लेबनान में संयुक्त राष्ट्र शांति मिशन के तहत तैनात हैं। यह क्षेत्र वर्तमान समय में संयुक्त राष्ट्र के सबसे चुनौतीपूर्ण और संवेदनशील शांति अभियानों में से एक माना जाता है। ऐसे कठिन हालात में उनकी भूमिका को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सराहा गया है।
‘सपनों का कोई जेंडर नहीं होता’ – मेजर अभिलाषा बराक
पुरस्कार मिलने के बाद मेजर अभिलाषा बराक ने कहा कि सपनों, नेतृत्व, साहस और मानवता की सेवा की भावना का कोई जेंडर नहीं होता। उन्होंने कहा कि यह सम्मान इस बात का संदेश देता है कि स्थायी शांति तभी संभव है जब समाज के हर वर्ग की आवाज सुनी जाए और सभी को समान अवसर मिलें।
उन्होंने कहा कि महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने से शांति अभियानों की प्रभावशीलता भी बढ़ती है और समाज में सकारात्मक बदलाव लाने की क्षमता मजबूत होती है।
भारत के लिए गर्व का क्षण
मेजर अभिलाषा बराक को मिला यह अंतरराष्ट्रीय सम्मान भारत के लिए गर्व का विषय है। उनकी उपलब्धि न केवल भारतीय सेना में महिलाओं की बढ़ती भागीदारी का प्रमाण है, बल्कि यह भी दिखाती है कि भारतीय महिला अधिकारी वैश्विक स्तर पर नेतृत्व और सेवा के नए मानक स्थापित कर रही हैं।
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