
नई दिल्ली। कांग्रेस नेता शशि थरूर की राहुल गांधी को लेकर की गई टिप्पणी के बाद पार्टी के भीतर बयानबाजी तेज हो गई है। कांग्रेस महासचिव केसी वेणुगोपाल ने रविवार को पार्टी नेताओं को सार्वजनिक मंचों से ऐसे बयान देने से बचने की नसीहत दी, जिनसे भारतीय जनता पार्टी को राजनीतिक फायदा या खुशी मिले। वेणुगोपाल की यह प्रतिक्रिया थरूर की उस टिप्पणी के बाद आई है, जिसमें उन्होंने राहुल गांधी के ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम के जेन-जी के बीच अपेक्षित प्रभाव नहीं छोड़ पाने पर सवाल उठाए थे।
मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, शशि थरूर ने शुक्रवार को एक कार्यक्रम के दौरान राहुल गांधी के ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम और ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ के विरोध प्रदर्शनों की तुलना करते हुए कहा था कि छात्रों के बीच राहुल गांधी का कार्यक्रम उतना प्रभाव पैदा नहीं कर पाया, जितना विरोध प्रदर्शनों ने किया।
वेणुगोपाल ने थरूर की टिप्पणी पर क्या कहा?
केसी वेणुगोपाल ने कहा कि उन्होंने शशि थरूर के बयान के बारे में कुछ मीडिया चैनलों पर पढ़ा है। उनका कहना था कि उन्होंने थरूर की पूरी टिप्पणी ठीक से नहीं सुनी है। ऐसे में बयान का सही संदर्भ जानने के लिए थरूर से ही सीधे सवाल किया जाना चाहिए।
वेणुगोपाल ने यह भी कहा कि उन्हें नहीं लगता कि शशि थरूर ने जानबूझकर राहुल गांधी या पार्टी नेतृत्व के खिलाफ इस तरह की टिप्पणी की होगी। हालांकि उन्होंने पार्टी नेताओं को सार्वजनिक बयान देते समय शब्दों के चयन को लेकर सतर्क रहने की सलाह दी।
‘राहुल गांधी में गलती निकालेंगे तो भाजपा खुश होगी’
कांग्रेस महासचिव ने कहा कि पार्टी के नेताओं को इस बात का ध्यान रखना चाहिए कि सार्वजनिक रूप से कही गई बातों का राजनीतिक असर क्या हो सकता है। उन्होंने कहा कि चाहे कोई बात जानबूझकर कही गई हो या अनजाने में, नेताओं को सार्वजनिक बयान देते समय सावधानी बरतनी चाहिए।
वेणुगोपाल ने कहा कि अगर कोई राहुल गांधी की गलतियां गिनाता है या उनके बारे में दो नकारात्मक बातें कहता है, तो इससे भाजपा को खुशी होगी। उनके मुताबिक, विपक्षी दल के लिए राहुल गांधी को लेकर कांग्रेस के भीतर से आने वाली नकारात्मक टिप्पणियां राजनीतिक रूप से फायदेमंद हो सकती हैं।
थरूर ने ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम पर क्या कहा था?
दरअसल, 7 अगस्त को महाराष्ट्र में एक कार्यक्रम के दौरान शशि थरूर से राहुल गांधी के ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम को लेकर सवाल किया गया था। उनसे पूछा गया कि जंतर-मंतर पर हुए विरोध प्रदर्शनों की तुलना में राहुल गांधी की ओर से आयोजित ‘छात्रों की गूंज’ रैलियां युवाओं और खासकर जेन-जी के बीच उतना असर क्यों नहीं पैदा कर पाईं।
इस पर थरूर ने माना था कि इस मुद्दे पर कांग्रेस को आत्ममंथन करना चाहिए। उन्होंने सवाल उठाया था कि क्या पार्टी छात्रों की बात सही तरीके से सुनने में विफल रही या फिर वह युवाओं की अपेक्षाओं और उनकी नब्ज को समझने में कहीं पीछे रह गई।
थरूर ने कहा था कि पार्टी को यह विचार करना होगा कि आखिर उससे क्या चूक हुई। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि क्या कांग्रेस उस पुराने राजनीतिक सिद्धांत पर खरी नहीं उतर सकी, जिसमें जनता की नब्ज को समझना जरूरी माना जाता है। उनके मुताबिक, यह भी देखना होगा कि कहीं पार्टी की उंगली जेन-जी की नब्ज से तो नहीं हट गई।
विवाद बढ़ा तो थरूर ने दी सफाई
थरूर की टिप्पणी सामने आने के बाद राजनीतिक विवाद बढ़ गया। इसके अगले दिन यानी 8 अगस्त को शशि थरूर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर सफाई दी। उन्होंने कहा कि मीडिया में उनके बयान को इस तरह पेश किया जा रहा है, जैसे उन्होंने अपनी ही पार्टी या कांग्रेस नेतृत्व पर हमला किया हो।
थरूर ने स्पष्ट किया कि उनकी टिप्पणी का मकसद पार्टी या उसके नेतृत्व की आलोचना करना नहीं था। उनका जोर इस बात पर था कि राजनीतिक दलों को अपनी कार्यप्रणाली और पहुंच को व्यापक बनाना चाहिए। उन्होंने कहा कि राजनीति में अगली पीढ़ी को जगह देने और उसे राजनीतिक प्रक्रिया से जोड़ने के रास्ते तैयार करना जरूरी है।
तीन शहरों में हो चुका है ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम
राहुल गांधी की ओर से आयोजित ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम का उद्देश्य छात्रों और युवाओं से संवाद करना तथा उनके मुद्दों को सामने लाना रहा है। यह कार्यक्रम तीन शहरों में आयोजित किया जा चुका है। अब इसका दिल्ली कार्यक्रम होना बाकी है।
इसी कार्यक्रम के असर को लेकर शशि थरूर की टिप्पणी ने कांग्रेस के भीतर नई राजनीतिक बहस को जन्म दिया है। एक तरफ थरूर ने युवाओं तक पार्टी की पहुंच और संवाद को लेकर आत्ममंथन की जरूरत बताई, वहीं केसी वेणुगोपाल ने पार्टी नेताओं को सार्वजनिक बयान देते समय विशेष सावधानी बरतने का संदेश दिया है। ऐसे में अब नजर इस बात पर है कि दिल्ली में होने वाले ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम के जरिए कांग्रेस युवाओं के बीच अपनी राजनीतिक पहुंच को कितना मजबूत कर पाती है।
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