इराक के रेगिस्तान में क्या देख बैठा चरवाहा? सीक्रेट इजराइली बेस का दावा, हेलिकॉप्टर से पीछा कर गोलियों से भूनने का आरोप

इराक के पश्चिमी रेगिस्तान से सामने आई एक सनसनीखेज घटना ने मध्य पूर्व की राजनीति और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर नए सवाल खड़े कर दिए हैं। 29 वर्षीय चरवाहे अवाद अल-शम्मारी की रहस्यमयी मौत अब अंतरराष्ट्रीय चर्चा का विषय बनती जा रही है। परिवार का दावा है कि अवाद ने गलती से इजराइल के एक गुप्त सैन्य ठिकाने को देख लिया था और इसके कुछ ही घंटों बाद उसकी हत्या कर दी गई।

जरूरी सामान लेने निकला था अवाद, फिर लौटी गोलियों से छलनी गाड़ी

सऊदी अरब और जॉर्डन की सीमा के करीब बसे रेगिस्तानी इलाके में रहने वाला अवाद अल-शम्मारी अपनी पिकअप गाड़ी लेकर रोजमर्रा का सामान लेने निकला था। उस क्षेत्र में गाड़ियों का आना-जाना सामान्य माना जाता है, इसलिए किसी को भी उसकी यात्रा पर शक नहीं हुआ।

लेकिन कुछ घंटे बाद इलाके में दहशत फैल गई, जब वही पिकअप ट्रक आग की लपटों में घिरा हुआ दिखाई दिया। स्थानीय लोगों के मुताबिक एक हेलिकॉप्टर लगातार उस वाहन का पीछा कर रहा था और ट्रक पर गोलियां बरसा रहा था। प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि तब तक फायरिंग होती रही, जब तक वाहन रेगिस्तान की रेत में रुक नहीं गया।

परिवार का दावा- गलती से पहुंच गया था सीक्रेट सैन्य अड्डे तक

अवाद के परिजनों के अनुसार वह अनजाने में एक ऐसे इलाके तक पहुंच गया था, जहां इजराइल का कथित गुप्त सैन्य बेस मौजूद था। परिवार का कहना है कि वहां उसने अस्थायी हवाई पट्टी, हेलिकॉप्टर, सैनिकों की गतिविधियां और तंबू देखे थे।

बताया जा रहा है कि यह सब देखने के बाद अवाद ने तुरंत इराकी सेना के क्षेत्रीय कमांड सेंटर को फोन कर जानकारी दी थी। परिवार का आरोप है कि इसी सूचना के कारण उसे निशाना बनाया गया और बाद में उसकी हत्या कर दी गई।

इजराइली सेना ने नहीं दी कोई प्रतिक्रिया

इस पूरे मामले पर इजराइली सेना की ओर से अब तक कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। सुरक्षा कारणों का हवाला देते हुए कई गवाहों और अधिकारियों ने अपनी पहचान गुप्त रखते हुए अंतरराष्ट्रीय मीडिया से बातचीत की है।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, मामले से जुड़े अधिकारियों ने दावा किया है कि पश्चिमी इराक में लंबे समय से गुप्त सैन्य गतिविधियां चल रही थीं, जिनकी जानकारी बेहद सीमित लोगों तक ही थी।

इराक में चल रहे थे इजराइल के दो सीक्रेट बेस!

क्षेत्रीय और इराकी अधिकारियों के हवाले से दावा किया गया है कि इजराइल पिछले एक साल से ज्यादा समय से इराक के पश्चिमी रेगिस्तान में दो गुप्त सैन्य अड्डे संचालित कर रहा था। इन ठिकानों का इस्तेमाल कथित तौर पर ईरान के खिलाफ सैन्य अभियानों की तैयारी और निगरानी के लिए किया जा रहा था।

अधिकारियों के मुताबिक अवाद ने जिन गतिविधियों को देखा था, वह इन्हीं में से एक सीक्रेट बेस से जुड़ी थीं। इससे पहले वॉल स्ट्रीट जर्नल ने भी इराक में एक इजराइली सैन्य ठिकाने का दावा किया था, लेकिन अब दूसरी लोकेशन की बात सामने आने से मामला और गंभीर हो गया है।

2025 की जंग से पहले शुरू हुई थी तैयारी

सूत्रों के अनुसार अमेरिका, इजराइल और ईरान के बीच जून 2025 में हुई 12 दिन की लड़ाई से पहले ही इन गुप्त अड्डों की तैयारी शुरू हो चुकी थी। एक क्षेत्रीय अधिकारी ने दावा किया कि इजराइल ने 2024 के आखिर में ही भविष्य के संभावित युद्धों को ध्यान में रखते हुए इन सीक्रेट बेस को विकसित करना शुरू कर दिया था।

माना जा रहा है कि इन ठिकानों का इस्तेमाल निगरानी, हवाई संचालन और सीमावर्ती सैन्य गतिविधियों के लिए किया जा रहा था। हालांकि इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि अभी तक नहीं हो पाई है।

मध्य पूर्व में बढ़ सकता है तनाव

अवाद अल-शम्मारी की मौत को लेकर उठ रहे सवाल अब केवल एक व्यक्ति की मौत तक सीमित नहीं हैं। यह मामला इराक, इजराइल और ईरान के बीच चल रहे जटिल भू-राजनीतिक संघर्ष की नई परत खोलता दिखाई दे रहा है। अगर इन सीक्रेट सैन्य अड्डों के दावे सही साबित होते हैं, तो आने वाले समय में मध्य पूर्व की राजनीति में बड़ा भूचाल आ सकता है।

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