
शिवसेना (UBT) नेता प्रियंका चतुर्वेदी ने NEET पेपर लीक विरोध प्रदर्शन पर छात्रों को जारी नोटिस की आलोचना करते हुए मंडल आयोग आंदोलन का उदाहरण दिया। उन्होंने अपने पति की गिरफ्तारी का जिक्र कर बीजेपी पर भी निशाना साधा।
NEET विरोध प्रदर्शन पर प्रियंका चतुर्वेदी का केंद्र सरकार और संस्थानों पर निशाना
नई दिल्ली। शिवसेना (UBT) की नेता प्रियंका चतुर्वेदी ने NEET पेपर लीक मामले को लेकर छात्रों के विरोध-प्रदर्शन पर उठे विवाद के बीच बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि पहले छात्रों को अपनी बात रखने और विरोध दर्ज कराने की पूरी आजादी होती थी, लेकिन अब हालात बदलते नजर आ रहे हैं। इसी मुद्दे पर उन्होंने मंडल आयोग (मंडल कमीशन) आंदोलन का उदाहरण देते हुए वर्तमान व्यवस्था पर सवाल खड़े किए।
मंडल आंदोलन का उदाहरण देकर कही यह बड़ी बात
प्रियंका चतुर्वेदी ने किसी शिक्षण संस्थान का नाम लिए बिना कहा कि मंडल आयोग की सिफारिशों के लागू होने के समय देशभर में बड़े स्तर पर विरोध-प्रदर्शन हुए थे। उस दौर में छात्र खुलकर अपनी राय रखते थे और किसी संस्थान की ओर से उन्हें प्रदर्शन में शामिल होने से रोकने जैसी स्थिति नहीं थी। उनके मुताबिक, लोकतंत्र में असहमति जताने का अधिकार हमेशा सुरक्षित रहना चाहिए।
पति का जिक्र कर सुनाया 1990 के दशक का अनुभव
अपने बयान में प्रियंका चतुर्वेदी ने निजी अनुभव साझा करते हुए बताया कि जब मंडल आयोग के खिलाफ आंदोलन चल रहा था, उस समय उनके पति IIT दिल्ली में पढ़ाई कर रहे थे। उन्होंने कहा कि उनके पति भी उस आंदोलन में शामिल हुए थे और विरोध प्रदर्शन के दौरान उन्हें हिरासत में लिया गया था। प्रियंका के अनुसार, उस समय छात्रों को अपनी बात रखने की स्वतंत्रता थी और शिक्षण संस्थान प्रदर्शन में भाग लेने से नहीं रोकते थे।
आरक्षण के मुद्दे पर भी बीजेपी को घेरा
प्रियंका चतुर्वेदी ने अपने बयान के दौरान आरक्षण के मुद्दे पर भी अप्रत्यक्ष रूप से भारतीय जनता पार्टी (BJP) को निशाने पर लिया। उन्होंने कहा कि केंद्र में तत्कालीन वी.पी. सिंह सरकार ने बीजेपी के समर्थन के साथ मंडल आयोग की सिफारिशों को लागू किया था। उनका यह बयान ऐसे समय सामने आया है जब सोशल मीडिया पर आरक्षण को लेकर विभिन्न तरह की बहस और अभियान देखने को मिल रहे हैं।
NEET पेपर लीक विवाद के बीच आया बयान
प्रियंका चतुर्वेदी की यह टिप्पणी ऐसे समय आई है जब NEET पेपर लीक मामले को लेकर कई स्थानों पर छात्र विरोध-प्रदर्शन कर रहे हैं। कुछ शिक्षण संस्थानों द्वारा छात्रों को प्रदर्शन में शामिल होने को लेकर जारी किए गए नोटिस पर भी सवाल उठाए जा रहे हैं। इसी संदर्भ में उन्होंने लोकतांत्रिक अधिकारों और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का मुद्दा उठाते हुए अपनी बात रखी।
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