ईरान युद्ध के बीच अमेरिका-सऊदी परमाणु समझौते पर लगी मुहर, ट्रम्प की मंजूरी से बढ़ी हलचल; विशेषज्ञों ने जताया परमाणु हथियारों की नई दौड़ का खतरा

वॉशिंगटन डीसी: मिडिल ईस्ट में जारी तनाव और ईरान से जुड़े हालात के बीच अमेरिका और सऊदी अरब के बीच एक महत्वपूर्ण परमाणु समझौते पर हस्ताक्षर किए गए हैं। इस समझौते के तहत अमेरिका सऊदी अरब को असैन्य उद्देश्यों, विशेष रूप से बिजली उत्पादन के लिए परमाणु तकनीक उपलब्ध कराएगा। हालांकि इस फैसले ने क्षेत्रीय और वैश्विक स्तर पर नई बहस को जन्म दे दिया है। कई सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि भविष्य में यह समझौता परमाणु हथियारों की नई प्रतिस्पर्धा की आशंका को बढ़ा सकता है।

सऊदी अरब के लिए बड़ी कूटनीतिक उपलब्धि माना जा रहा समझौता

यह परमाणु समझौता सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान के लिए बड़ी कूटनीतिक सफलता के रूप में देखा जा रहा है। बताया जा रहा है कि वह पिछले पांच वर्षों से अधिक समय से अमेरिका के साथ इस तरह के समझौते को अंतिम रूप देने की कोशिश कर रहे थे। अब इस पर हस्ताक्षर होने के बाद दोनों देशों के रणनीतिक और ऊर्जा संबंधों को नई मजबूती मिलने की संभावना जताई जा रही है।

ट्रम्प की मंजूरी के बाद समझौते पर बढ़ी चर्चा

रिपोर्ट्स के अनुसार, इस समझौते को अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की मंजूरी मिलने के बाद आगे बढ़ाया गया। हालांकि इस फैसले को लेकर अमेरिका के कुछ अधिकारियों, परमाणु मामलों के विशेषज्ञों और इजराइल की ओर से गंभीर आपत्तियां भी सामने आई थीं। विरोध करने वालों का तर्क है कि यदि भविष्य में सऊदी अरब को यूरेनियम संवर्धन (Uranium Enrichment) से जुड़ी तकनीक तक पहुंच मिलती है, तो इससे परमाणु हथियार विकसित करने की संभावनाएं भी बढ़ सकती हैं।

विशेषज्ञों ने जताई मिडिल ईस्ट में परमाणु हथियारों की नई होड़ की आशंका

परमाणु सुरक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि मौजूदा भू-राजनीतिक परिस्थितियों में इस तरह का समझौता पूरे मिडिल ईस्ट में सामरिक संतुलन को प्रभावित कर सकता है। उनका मानना है कि यदि क्षेत्र के अन्य देश भी इसी दिशा में कदम बढ़ाते हैं तो परमाणु हथियारों की नई दौड़ शुरू होने का खतरा पैदा हो सकता है, जिससे पहले से तनावग्रस्त क्षेत्र की सुरक्षा चुनौतियां और बढ़ सकती हैं।

ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर पहले भी दे चुके हैं संकेत

सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान पहले भी सार्वजनिक रूप से कह चुके हैं कि यदि ईरान परमाणु हथियार विकसित करने में सफल होता है, तो सऊदी अरब भी अपनी सुरक्षा जरूरतों को ध्यान में रखते हुए परमाणु हथियार हासिल करने की दिशा में कदम उठा सकता है। ऐसे में अमेरिका के साथ हुआ यह नया परमाणु समझौता क्षेत्रीय राजनीति और वैश्विक सुरक्षा के नजरिए से बेहद अहम माना जा रहा है।

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