नई दिल्ली: उत्तर प्रदेश में रोजी-रोटी की तलाश में घर-आंगन छोड़ने वाले मजदूरों को लेकर सरकार ने संसद में चौंकाने वाली रिपोर्ट पेश की है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, यूपी के असंगठित क्षेत्र के 2 लाख 48 हजार 657 मजदूर पलायन कर दूसरे राज्यों में जा चुके हैं। इस पलायन की सबसे अधिक मार पूर्वी उत्तर प्रदेश (Purvanchal) पर पड़ी है। आंकड़ों के मुताबिक, जौनपुर जिले के लोग काम की तलाश में सबसे आगे हैं, जबकि पश्चिम यूपी के हापुड़ जिले में पलायन की दर सबसे कम दर्ज की गई है। सरकार ने यह जानकारी लोकसभा में समाजवादी पार्टी की सांसदों के सवालों के जवाब में दी।
जौनपुर से सबसे ज्यादा पलायन, हापुड़ में सबसे कम: जानें टॉप 5 जिलों की लिस्ट
लोकसभा में श्रम और रोजगार राज्य मंत्री शोभा कारान्दलाजे द्वारा पेश किए गए आंकड़ों के अनुसार, पलायन के मामले में जौनपुर जिला प्रदेश में नंबर वन पर है। यहाँ से 15,463 मजदूरों ने अपना जिला छोड़ा है। इस सूची में दूसरे स्थान पर आजमगढ़ (11,247) है। वहीं, बलिया 8,116 कामगारों के साथ तीसरे, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का गृह जनपद गोरखपुर 7,840 मजदूरों के साथ चौथे और देवरिया 7,767 कामगारों के साथ पांचवें पायदान पर है। इसके उलट, पश्चिम यूपी के हापुड़ जिले से सबसे कम यानी मात्र 293 लोगों ने पलायन किया है। कम पलायन वाले जिलों में ललितपुर, शामली, सोनभद्र और अमरोहा भी शामिल हैं, जहाँ मजदूरों की संख्या 1000 से कम रही है।
मजदूरों की पहली पसंद बना महाराष्ट्र, लक्षद्वीप जाने वालों की संख्या सबसे कम
यूपी के मजदूरों के लिए सपनों का शहर और पसंदीदा राज्य आज भी महाराष्ट्र ही बना हुआ है। पिछले पांच सालों में उत्तर प्रदेश के 57,577 कामगार महाराष्ट्र गए हैं। पलायन की इस सूची में हरियाणा (48,049) दूसरे, देश की राजधानी दिल्ली (40,015) तीसरे और गुजरात (34,167) चौथे स्थान पर है। पंजाब पांचवें नंबर पर है, जहाँ 19,588 मजदूर काम के लिए पहुंचे हैं। वहीं, सबसे कम पलायन लक्षद्वीप के लिए हुआ है, जहाँ यूपी के मात्र 4 मजदूर पहुंचे हैं। इसके अलावा मिजोरम, पुदुचेरी, लद्दाख और त्रिपुरा जैसे राज्यों में भी यूपी के मजदूरों की संख्या बेहद कम रही है।
ई-श्रम पोर्टल के जरिए खुला राज, सांसदों ने संसद में पूछा था सवाल
यह महत्वपूर्ण खुलासा समाजवादी पार्टी की सांसद पुष्पेंद्र सरोज, प्रिया सरोज और इकरा चौधरी के सवालों के बाद हुआ है। उन्होंने सरकार से पिछले पांच वर्षों में जिलावार पलायन का ब्योरा और मजदूरों के कल्याण के लिए चल रही योजनाओं की जानकारी मांगी थी। सरकार ने बताया कि यह डेटा ‘ई-श्रम पोर्टल’ (e-Shram Portal) के माध्यम से जुटाया गया है, जिसकी शुरुआत अगस्त 2021 में हुई थी। इस पोर्टल पर अब तक देशभर के 31.49 करोड़ से अधिक असंगठित कामगार अपना पंजीकरण करा चुके हैं, जिससे उनके प्रवास और काम की प्रकृति पर नजर रखना आसान हो गया है।
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