UP Budget 2026 Live: ‘9 वर्ष के नवनिर्माण की गाथा’—CM योगी का बड़ा दावा, 9.12 लाख करोड़ के बजट में किसान-युवा-महिला पर फोकस

 उत्तर प्रदेश विधानसभा में वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए 9,12,696.35 करोड़ रुपये का विशाल बजट पेश किया गया। बजट पेश होने के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इसे प्रदेश के “9 वर्ष के नवनिर्माण की गाथा” करार दिया। उन्होंने कहा कि यह बजट विकास, निवेश, रोजगार और कल्याणकारी योजनाओं के समन्वय का दस्तावेज है, जिसमें किसान, युवा और महिलाओं को केंद्र में रखा गया है।

लगातार 10 बजट, बिना नया कर—सीएम का जोर

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि पहली बार किसी सरकार ने लगातार 10 बजट पेश किए हैं। बीते 9 वर्षों में प्रदेशवासियों पर कोई नया कर नहीं लगाया गया, फिर भी विकास की रफ्तार को बनाए रखा गया। उन्होंने दावा किया कि उत्तर प्रदेश आज देश की तीन सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में शुमार है और मजबूत वित्तीय प्रबंधन के जरिए राज्य ने अपनी आर्थिक स्थिति को नई ऊंचाई दी है।

सीएम ने कहा कि यह बजट रोजगार सृजन को गति देगा और एमएसएमई व कौशल विकास के जरिए युवाओं के लिए नए अवसर खोलेगा। उनके अनुसार, उत्तर प्रदेश अब ‘रोजगार जनरेटर’ की भूमिका में उभर रहा है।

बजट का आकार 9.12 लाख करोड़, 12.9% की वृद्धि

वित्त मंत्री सुरेश कुमार खन्ना ने सदन में बजट का विस्तृत ब्यौरा पेश करते हुए बताया कि वर्ष 2026-27 का कुल बजट 9,12,696.35 करोड़ रुपये है, जो पिछले वित्तीय वर्ष 2025-26 की तुलना में लगभग 12.9 प्रतिशत अधिक है। कुल बजट में पूंजीगत व्यय का हिस्सा 19.5 प्रतिशत रखा गया है, जिससे आधारभूत संरचना और दीर्घकालिक परियोजनाओं को बल मिलेगा।

शिक्षा के लिए कुल बजट का 12.4 प्रतिशत और स्वास्थ्य सेवाओं के लिए 6 प्रतिशत आवंटित किया गया है। कृषि और संबद्ध सेवाओं को 9 प्रतिशत हिस्सा दिया गया है, जिससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलने की उम्मीद है।

राजकोषीय घाटा 3% की सीमा में, कर्ज अनुपात घटाने का लक्ष्य

16वें केंद्रीय वित्त आयोग की सिफारिशों के अनुरूप वित्तीय वर्ष 2026-27 में राजकोषीय घाटे की सीमा 3 प्रतिशत निर्धारित की गई है, जो वर्ष 2030-31 तक प्रभावी रहेगी। राज्य सरकार ने मजबूत वित्तीय अनुशासन और ऋण नियंत्रण के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई है।

वित्त मंत्री ने बताया कि वर्ष 2016-17 में प्रदेश को 29.3 प्रतिशत ऋण-जीएसडीपी अनुपात विरासत में मिला था, जिसे 2019-20 तक घटाकर 27.9 प्रतिशत कर दिया गया। कोविड-19 के प्रभाव से यह अनुपात 2021-22 में 33.4 प्रतिशत तक पहुंचा, लेकिन सुनियोजित प्रबंधन के चलते 2024-25 में इसे फिर 27 प्रतिशत से नीचे लाया गया है। वर्ष 2026-27 में इसे घटाकर 23.1 प्रतिशत करने का लक्ष्य रखा गया है और चरणबद्ध तरीके से 20 प्रतिशत से नीचे लाने का संकल्प व्यक्त किया गया है।

मजदूरों के लिए लेबर अड्डे और सुरक्षा कवच

बजट में असंगठित श्रमिकों और प्रवासी मजदूरों के लिए भी अहम प्रावधान किए गए हैं। शहरों में काम करने वाले श्रमिकों के लिए ‘लेबर अड्डों’ का निर्माण कराया जाएगा। ई-श्रम पोर्टल पर पंजीकृत श्रमिकों को दुर्घटना में मृत्यु या पूर्ण दिव्यांगता की स्थिति में 2 लाख रुपये तथा आंशिक दिव्यांगता पर 1 लाख रुपये की सहायता दी जा रही है।

निर्माण श्रमिकों के स्वास्थ्य परीक्षण और स्वास्थ्य शिक्षा के लिए मोबाइल हेल्थ वैन की शुरुआत पायलट प्रोजेक्ट के रूप में की गई है। साथ ही, राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर रोजगार उपलब्ध कराने के उद्देश्य से उत्तर प्रदेश रोजगार मिशन का गठन किया गया है।

रोजगार और एमएसएमई पर विशेष जोर

सरकार ने बजट को रोजगार उन्मुख बताते हुए एमएसएमई, स्टार्टअप, कौशल विकास और निवेश प्रोत्साहन को प्राथमिकता दी है। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में निवेश का अनुकूल वातावरण तैयार हुआ है, जिसका सीधा लाभ युवाओं को रोजगार के रूप में मिलेगा। बजट में आधारभूत ढांचे के विस्तार और औद्योगिक विकास के माध्यम से दीर्घकालिक आर्थिक मजबूती पर बल दिया गया है।

उत्तर प्रदेश का यह बजट आकार और प्राथमिकताओं के लिहाज से अब तक का सबसे बड़ा बजट माना जा रहा है। सरकार का दावा है कि यह दस्तावेज प्रदेश को ट्रिलियन डॉलर इकोनॉमी की दिशा में आगे बढ़ाने का रोडमैप है

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