UN CERD का भारत पर बड़ा आरोप: पहलगाम के बाद रोहिंग्या, दलित और आदिवासियों को लेकर जताई गंभीर चिंता

संयुक्त राष्ट्र की नस्लीय भेदभाव उन्मूलन समिति (CERD) ने भारत में दलितों, आदिवासियों, अनुसूचित जातियों और रोहिंग्या समेत कुछ अन्य समुदायों के साथ कथित भेदभाव और हिंसा को लेकर गंभीर चिंता जताई है। समिति ने कानून प्रवर्तन एजेंसियों पर जातीय और नस्लीय पहचान के आधार पर कथित प्रोफाइलिंग, अत्यधिक बल प्रयोग, हिरासत और अन्य मानवाधिकार उल्लंघनों के आरोपों का जिक्र किया है। CERD ने भारत से इन आरोपों की निष्पक्ष और पूरी जांच कराने तथा जिम्मेदार लोगों की जवाबदेही सुनिश्चित करने को कहा है।

पहलगाम हमले के बाद रोहिंग्या और अन्य समूहों पर कार्रवाई का जिक्र

CERD की ओर से 25 अगस्त 2026 को जारी निष्कर्षों में कहा गया है कि रोहिंग्या, बंगाली भाषी मुसलमानों, प्रवासियों और शरण मांगने वालों को निशाना बनाकर कानून प्रवर्तन अभियान बढ़ने की रिपोर्ट सामने आई है। समिति ने खास तौर पर 2017 के गृह मंत्रालय के आदेश और अप्रैल 2025 में हुए पहलगाम आतंकी हमले के बाद की कार्रवाई का उल्लेख किया है।

समिति के अनुसार, पहचान की जांच और पुलिस रोक-टोक के दौरान कथित नस्लीय प्रोफाइलिंग के मामले सामने आए हैं। CERD का कहना है कि ऐसी कार्रवाइयों के कारण कुछ मामलों में बिना उचित कानूनी प्रक्रिया के गिरफ्तारी और हिरासत, यातना तथा दुर्व्यवहार के आरोप लगाए गए हैं।

दलितों और आदिवासियों को लेकर भी जताई चिंता

संयुक्त राष्ट्र की समिति ने अनुसूचित जनजातियों और अनुसूचित जातियों, खासकर दलितों, से जुड़े मामलों को भी अपने निष्कर्षों में प्रमुखता दी है। CERD ने कानून लागू करने वाली एजेंसियों पर जातीय और सामाजिक पहचान से जुड़े समूहों के खिलाफ कथित हिंसा और अत्यधिक बल प्रयोग की रिपोर्टों पर चिंता व्यक्त की।

समिति ने जिन आरोपों का उल्लेख किया है, उनमें नस्लीय रूप से प्रेरित हिंसा, अत्यधिक बल प्रयोग, कथित फर्जी या न्यायेतर हत्याएं, मनमाने तरीके से लंबे समय तक हिरासत में रखना, यातना, दुर्व्यवहार और यौन हिंसा जैसे गंभीर आरोप शामिल हैं। CERD ने भारत से इन सभी आरोपों की जल्द, गहन और निष्पक्ष जांच कराने की अपील की है।

रोहिंग्या के खिलाफ भेदभाव और नफरत पर भी चिंता

CERD ने भारत से रोहिंग्या, बंगाली भाषी मुसलमानों, प्रवासियों और शरणार्थियों के खिलाफ भेदभाव, नफरत फैलाने वाले भाषण और हेट क्राइम से तत्काल निपटने को कहा है। समिति ने इन समुदायों के अधिकारों की सुरक्षा पर जोर देते हुए सामूहिक निष्कासन से बचने की बात कही है।

समिति ने अंतरराष्ट्रीय संरक्षण की जरूरत वाले लोगों को जबरन ऐसे स्थान पर वापस नहीं भेजने के सिद्धांत यानी ‘नॉन-रिफाउलमेंट’ का भी उल्लेख किया है। CERD के मुताबिक भारत को इस सिद्धांत के अनुरूप अंतरराष्ट्रीय संरक्षण तक पहुंच सुनिश्चित करनी चाहिए।

क्या है CERD और भारत से क्या कहा?

CERD संयुक्त राष्ट्र की एक स्वतंत्र विशेषज्ञ समिति है, जो ‘नस्लीय भेदभाव के सभी रूपों के उन्मूलन पर अंतरराष्ट्रीय कन्वेंशन’ के तहत सदस्य देशों द्वारा किए जा रहे प्रयासों की समीक्षा करती है। भारत पर समिति की ताजा समीक्षा उसके 118वें सत्र के दौरान हुई, जो 10 से 25 अगस्त 2026 तक जिनेवा में आयोजित किया गया। इस सत्र में भारत के साथ फिनलैंड, होंडुरास और कुवैत की भी समीक्षा की गई।

भारत के लिए जारी निष्कर्षों में समिति ने कथित मानवाधिकार उल्लंघनों की जांच और दोषियों की जवाबदेही के साथ-साथ कमजोर और भेदभाव का सामना कर रहे समुदायों की सुरक्षा मजबूत करने पर जोर दिया है।

भारत पर UN समिति की रिपोर्ट क्यों अहम है?

CERD की यह टिप्पणी ऐसे समय आई है जब भारत में सुरक्षा, नागरिक अधिकारों, प्रवासन और अल्पसंख्यक समुदायों से जुड़े मुद्दे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चा में हैं। समिति के निष्कर्ष भारत के खिलाफ किसी अदालत का फैसला नहीं हैं, बल्कि नस्लीय भेदभाव से जुड़े अंतरराष्ट्रीय कन्वेंशन के तहत भारत की स्थिति की समीक्षा के बाद जारी किए गए निष्कर्ष और सिफारिशें हैं। संयुक्त राष्ट्र की आधिकारिक जानकारी के मुताबिक भारत से कथित उल्लंघनों की जांच, जवाबदेही, भेदभाव और नफरत से जुड़े अपराधों पर कार्रवाई तथा प्रभावित समूहों के अधिकारों की रक्षा सुनिश्चित करने को कहा गया है।

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