वॉशिंगटन डीसी से बड़ी खबर सामने आई है। अमेरिका के राष्ट्रपति Donald Trump ने दावा किया है कि 3 जनवरी को वेनेजुएला में किए गए सैन्य ऑपरेशन के दौरान अमेरिका ने एक बेहद गुप्त और उन्नत हथियार का इस्तेमाल किया। उनके मुताबिक इस ‘सीक्रेट वेपन’ की वजह से रूस और चीन के डिफेंस सिस्टम पूरी तरह फेल हो गए और वेनेजुएलाई सैनिकों को जवाबी कार्रवाई का मौका तक नहीं मिला।
फोर्ट ब्रैग में ट्रम्प का खुलासा
नॉर्थ कैरोलिना स्थित Fort Bragg सैन्य बेस पर सैनिकों को संबोधित करते हुए ट्रम्प ने इस रहस्यमयी हथियार को ‘डिसकम्बोबुलेटर’ नाम से संबोधित किया। हालांकि उन्होंने इसकी तकनीक, क्षमता या स्वरूप के बारे में कोई विस्तृत जानकारी साझा नहीं की।
ट्रम्प ने कहा कि ऑपरेशन के दौरान वेनेजुएलाई सेना एक भी गोली नहीं चला सकी। उन्होंने यह भी दावा किया कि रूसी और चीनी उपकरण अचानक निष्क्रिय हो गए। उनके शब्दों में, “सब यह समझने की कोशिश कर रहे हैं कि ऐसा क्यों हुआ। एक दिन आपको इसके बारे में पता चलेगा।”
यह पहला मौका है जब ट्रम्प ने किसी सार्वजनिक मंच से इस गुप्त हथियार का जिक्र किया है। इससे पहले उन्होंने New York Post को दिए इंटरव्यू में संकेत देते हुए कहा था कि उन्हें इसके बारे में खुलकर बोलने की अनुमति नहीं है, लेकिन ऑपरेशन के दौरान “सब कुछ गड़बड़ा दिया गया था।”
150 से ज्यादा विमान, 20 ठिकानों से उड़ान
अमेरिकी जॉइंट चीफ्स ऑफ स्टाफ के चेयरमैन एयर फोर्स जनरल Dan Caine के अनुसार, इस मिशन के लिए 20 अलग-अलग ठिकानों से 150 से अधिक विमानों ने उड़ान भरी। इनमें बॉम्बर्स, फाइटर जेट्स, इंटेलिजेंस और सर्विलांस प्लेटफॉर्म शामिल थे।
रात के अंधेरे में अमेरिकी हेलिकॉप्टर वेनेजुएला की राजधानी Caracas पहुंचे। भारी सुरक्षा घेरे के बीच तत्कालीन राष्ट्रपति Nicolás Maduro और उनकी पत्नी Cilia Flores को हिरासत में ले लिया गया।
वेनेजुएला के अधिकारियों का कहना है कि कार्रवाई की शुरुआत अमेरिकी बमबारी से हुई, जिसमें सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया गया। इस हमले में 83 लोगों की मौत और 112 से अधिक लोगों के घायल होने की जानकारी सामने आई है। ट्रम्प ने दावा किया कि किसी भी अमेरिकी सैनिक की मौत नहीं हुई, हालांकि तीन हेलिकॉप्टर पायलट घायल हुए।
सोनिक या डायरेक्टेड एनर्जी वेपन?
अमेरिका पर इस ऑपरेशन में ‘सोनिक वेपन’ के इस्तेमाल का आरोप भी लगाया गया है। The New York Times की एक रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिकी सेना ने एक ऐसे शक्तिशाली हथियार का उपयोग किया जिससे वेनेजुएला के सैनिक अचानक असहाय हो गए।
एक वेनेजुएलाई सुरक्षा गार्ड ने दावा किया कि ऑपरेशन शुरू होते ही सभी रडार सिस्टम बंद हो गए और कुछ सेकेंड बाद आसमान में बड़ी संख्या में ड्रोन दिखाई दिए। उसने बताया कि इसके तुरंत बाद तेज ध्वनि या तरंग जैसी किसी चीज का प्रभाव महसूस हुआ, जिससे सिर फटने जैसा दर्द हुआ। कई सैनिकों की नाक से खून बहने लगा और कुछ को खून की उल्टियां हुईं।
CNN की रिपोर्ट में एक पूर्व अमेरिकी अधिकारी के हवाले से कहा गया कि ये लक्षण डायरेक्टेड एनर्जी वेपन से मेल खाते हैं। ऐसे हथियार माइक्रोवेव या लेजर एनर्जी का इस्तेमाल करते हैं, जिससे अस्थायी पक्षाघात, तेज दर्द और आंतरिक चोट हो सकती है।
अमेरिकी सेना के पास ‘एक्टिव डिनायल सिस्टम’ नाम का एक नॉन-लीथल हीट रे हथियार पहले से मौजूद है, जो इलेक्ट्रोमैग्नेटिक तरंगों के जरिए शरीर में तीव्र गर्मी का अहसास कराता है। हालांकि यह स्पष्ट नहीं है कि इसी सिस्टम का इस्तेमाल इस ऑपरेशन में हुआ या कोई और उन्नत तकनीक अपनाई गई।
किले जैसी सुरक्षा में थे मादुरो
ट्रम्प के अनुसार, ऑपरेशन के समय मादुरो राष्ट्रपति भवन में मौजूद थे, जो किसी किले की तरह सुरक्षित था। वहां स्टील से बना एक विशेष सेफ रूम भी था। बताया गया कि अमेरिकी सैनिक इतनी तेजी से भीतर पहुंचे कि मादुरो दरवाजा बंद ही नहीं कर पाए।
जनरल डैन केन ने खुलासा किया कि इस मिशन की महीनों तक रिहर्सल की गई। सेना को मादुरो की दिनचर्या, खानपान, निवास, यहां तक कि उनके पालतू जानवरों तक की जानकारी थी। उनके घर जैसा नकली ढांचा बनाकर विशेष प्रशिक्षण भी दिया गया।
ऑपरेशन पूरी तरह अंधेरे में अंजाम दिया गया। कराकास शहर की लाइटें बंद कर दी गईं। हमले के दौरान कम से कम सात धमाकों की आवाज सुनी गई और पूरा मिशन 30 मिनट से भी कम समय में पूरा कर लिया गया।
अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर यह चर्चा तेज है कि आखिर अमेरिका ने कौन-सी तकनीक का इस्तेमाल किया, जिसने कथित तौर पर रूस और चीन के डिफेंस सिस्टम को निष्क्रिय कर दिया। ट्रम्प के इस दावे ने वैश्विक सैन्य संतुलन और आधुनिक युद्ध तकनीक को लेकर नई बहस छेड़ दी है।
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