
नई दिल्ली। NEET-UG 2026 पेपर लीक मामले में केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने बड़ा दावा किया है। एजेंसी की ओर से दिल्ली के राउज एवेन्यू कोर्ट में दाखिल 94 पन्नों की चार्जशीट के अनुसार, परीक्षा का पेपर लीक होने की साजिश परीक्षा से कई महीने पहले ही रची जा चुकी थी। चार्जशीट में आरोप लगाया गया है कि NTA से जुड़े कुछ एक्सपर्ट्स ने पेपर तैयार करने की प्रक्रिया के दौरान सवाल याद किए और बाद में उन्हें लिखकर बिचौलियों के जरिए आगे पहुंचाया गया।
94 पन्नों की चार्जशीट में कई अहम दावे
CBI ने 28 जुलाई को कोर्ट में चार्जशीट दाखिल की थी, जिसकी जानकारी अब सार्वजनिक हुई है। जांच एजेंसी के मुताबिक, पेपर तैयार करने में शामिल कुछ एक्सपर्ट्स NTA कार्यालय से होटल लौटने के बाद याद किए गए सवालों को पर्चियों पर लिखते थे। इसके बाद कथित तौर पर इन सवालों को कोचिंग नेटवर्क, बिचौलियों और अन्य माध्यमों से छात्रों तक पहुंचाने का सिलसिला शुरू होता था।
CBI ने इस मामले में कुल 13 आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की है। इनमें NTA के तीन एक्सपर्ट्स भी शामिल हैं। एजेंसी का आरोप है कि इन लोगों ने अपने पद का दुरुपयोग करते हुए परीक्षा की गोपनीयता से समझौता किया।
CBI का दावा- महीनों पहले तैयार हुआ था पूरा नेटवर्क
चार्जशीट के अनुसार, यह कथित पेपर लीक किसी एक व्यक्ति की करतूत नहीं थी, बल्कि इसके पीछे एक संगठित नेटवर्क काम कर रहा था। जांच एजेंसी का आरोप है कि इसमें NTA से जुड़े कुछ एक्सपर्ट्स, निजी कोचिंग संचालक, बिचौलिए और कुछ छात्र शामिल थे।
CBI के मुताबिक, परीक्षा से कई महीने पहले ही कथित आरोपियों के बीच संपर्क स्थापित हो चुका था। इस दौरान लगातार बातचीत, मुलाकातें और कथित रूप से पैसों का लेन-देन भी हुआ, जिसके जरिए पूरे नेटवर्क को सक्रिय किया गया।
एक्सपर्ट्स पर सवाल याद करने और लिखने का आरोप
चार्जशीट में मनीषा गुरुनाथ मंधारे, पी.वी. कुलकर्णी और मनीषा संजय हवलदार का नाम शामिल है। CBI का आरोप है कि ये तीनों पेपर तैयार करने और मॉडरेशन के दौरान प्रश्नों को याद कर लेते थे। बाद में होटल पहुंचकर उन सवालों को पर्चियों पर लिखते थे।
जांच एजेंसी के अनुसार, संबंधित प्रश्नों से जुड़े अध्याय और पैराग्राफ NCERT की पुस्तकों में भी चिन्हित किए जाते थे, ताकि आगे उन्हें व्यवस्थित तरीके से साझा किया जा सके।
तलाशी नहीं होने का भी किया गया जिक्र
CBI की चार्जशीट में यह भी दावा किया गया है कि NTA कार्यालय में आने और जाने के दौरान इन एक्सपर्ट्स की तलाशी नहीं ली जाती थी। जांच एजेंसी का कहना है कि इसी कथित व्यवस्था का फायदा उठाकर गोपनीय जानकारी बाहर पहुंचाने की साजिश को अंजाम दिया गया।
डिजिटल माध्यमों से फैलाए गए कथित लीक प्रश्न
चार्जशीट के मुताबिक, कथित तौर पर लीक किए गए प्रश्न टेलीग्राम, व्हाट्सएप, PDF फाइलों और अन्य डिजिटल प्लेटफॉर्म के जरिए विभिन्न लोगों तक पहुंचाए गए। जांच एजेंसी का दावा है कि इस पूरे नेटवर्क का उद्देश्य परीक्षा से पहले चुनिंदा अभ्यर्थियों तक प्रश्न पहुंचाना था।
पहले भी सामने आए थे सवाल
इस मामले में इससे पहले भी NTA के शीर्ष स्तर के अधिकारियों की ओर से संकेत दिए गए थे कि लंबे समय से जुड़े कुछ लोगों की भूमिका जांच के दायरे में है। अब CBI की चार्जशीट में लगाए गए आरोपों ने मामले को और गंभीर बना दिया है। हालांकि, आरोपियों के खिलाफ लगाए गए सभी आरोपों पर अंतिम फैसला अदालत में सुनवाई और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर होगा।
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