लखनऊ/कानपुर: उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से एक ऐसी खौफनाक वारदात सामने आई है, जिसने मानवता और गुरु-शिष्य की पवित्र परंपरा को शर्मसार कर दिया है। आलमनगर स्थित एक गुरुकुल में वैदिक शिक्षा लेने गए 11 वर्षीय मासूम दिव्यांश की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई। जिस बेटे को पिता ने संस्कारों की उम्मीद में गुरुकुल भेजा था, उसका क्षत-विक्षत शव जब घर के बाहर फेंका गया, तो पूरे इलाके का कलेजा फट गया। मासूम के शरीर पर बेरहमी के ऐसे निशान मिले हैं, जो चीख-चीख कर वहां हुई हैवानियत की कहानी बयां कर रहे हैं।
संस्कारों की आड़ में हैवानियत: 7 दिन में ही उजड़ गई पिता की दुनिया
कानपुर के महाराजपुर निवासी नरेंद्र कुमार द्विवेदी ने अपने बेटे दिव्यांश का दाखिला 15 अप्रैल को लखनऊ के आलमनगर स्थित ‘रामानुज भागवत वेद विद्यापीठ गुरुकुल’ में कराया था। परिवार को उम्मीद थी कि निशुल्क वैदिक शिक्षा से बेटे का भविष्य उज्जवल होगा। लेकिन दाखिले के महज सातवें दिन ही खुशियां मातम में बदल गईं। मंगलवार रात तक अपनी बहन से हंसकर बात करने वाला दिव्यांश बुधवार सुबह मृत पाया गया।
रोंगटे खड़े कर देने वाली दरिंदगी: शरीर पर डंडों के 45 निशान
दिव्यांश का शव जब उसके घर पहुंचा, तो उसे देखकर परिजनों की रूह कांप गई। आरोप है कि मासूम के शरीर पर डंडों से पिटाई के करीब 40 से 45 गहरे और नीले निशान थे। हैवानियत की हद तो यह थी कि बच्चे के हाथ और पैर रस्सियों से बंधे हुए थे। शरीर पर मौजूद घाव और रस्सियों के निशान साफ इशारा कर रहे हैं कि मौत से पहले मासूम को घंटों तक तड़पाया गया और बेरहमी से प्रताड़ित किया गया।
शव को लावारिस छोड़कर भागा संचालक, कुकर्म की भी आशंका
घटना के बाद गुरुकुल संचालक कन्हैया लाल मिश्रा की भूमिका बेहद संदिग्ध रही। उसने परिजनों को फोन पर बताया कि दिव्यांश सीढ़ियों से गिर गया है, लेकिन उसे अस्पताल ले जाने के बजाय वह खुद कार से शव लेकर कानपुर पहुंचा। संचालक ने साहस दिखाने के बजाय चोरी-छिपे शव को घर से कुछ दूरी पर सड़क किनारे फेंका और मौके से फरार हो गया। परिजनों ने आशंका जताई है कि हत्या से पहले मासूम के साथ कुकर्म जैसी घिनौनी वारदात भी की गई होगी।
पुलिस की कार्रवाई: हत्या का मुकदमा दर्ज, पोस्टमार्टम की वीडियोग्राफी होगी
लखनऊ और कानपुर पुलिस इस सनसनीखेज मामले की जांच में जुट गई है। एडीसीपी पूर्वी अंजलि विश्वकर्मा के मुताबिक, पिता की तहरीर पर संचालक कन्हैया लाल मिश्रा और उसके चालक के खिलाफ हत्या (IPC 302) और साक्ष्य मिटाने की धाराओं में एफआईआर दर्ज कर ली गई है। मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए डॉक्टरों के पैनल से पोस्टमार्टम कराने और पूरी प्रक्रिया की वीडियोग्राफी कराने के निर्देश दिए गए हैं। पुलिस की एक विशेष टीम लखनऊ स्थित गुरुकुल में साक्ष्य जुटाने के लिए भेजी गई है।
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