
जकार्ता/वॉशिंगटन: वैश्विक रणनीतिक समीकरणों के बीच एक बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। दुनिया के सबसे बड़े मुस्लिम देश इंडोनेशिया ने अमेरिका को अपने एयरस्पेस के इस्तेमाल की अनुमति देने को लेकर चल रही बातचीत की आधिकारिक पुष्टि कर दी है। यह कदम इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में अमेरिका की सैन्य मौजूदगी को और मजबूत करने वाला माना जा रहा है।
फरवरी की बैठक के बाद बनी रणनीति
सूत्रों के मुताबिक, यह प्रस्ताव इंडोनेशिया के राष्ट्रपति और अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति के बीच फरवरी 2026 में वॉशिंगटन में हुई उच्चस्तरीय बैठक के बाद आकार में आया। उस दौरान दोनों देशों के बीच रक्षा सहयोग को लेकर महत्वपूर्ण सहमति बनी थी। गोपनीय दस्तावेजों में यह संकेत दिया गया है कि इंडोनेशिया ने अमेरिकी विमानों को अपने हवाई क्षेत्र से उड़ान भरने की अनुमति देने पर सहमति जताई थी।
सैन्य अभियानों के लिए खुल सकता है एयरस्पेस
अमेरिकी रक्षा विभाग द्वारा 26 फरवरी को इंडोनेशिया के रक्षा मंत्रालय को भेजे गए दस्तावेज में इस योजना को लागू करने का खाका पेश किया गया। प्रस्तावित समझौते के तहत अमेरिकी सैन्य विमानों को आपातकालीन मिशन, संकट प्रतिक्रिया और संयुक्त सैन्य अभ्यासों के दौरान इंडोनेशिया के एयरस्पेस से गुजरने की अनुमति मिल सकती है।दस्तावेज में यह भी स्पष्ट किया गया है कि अमेरिका की ओर से सूचना मिलने के बाद उसके सैन्य विमान बिना किसी देरी के इंडोनेशियाई हवाई क्षेत्र का उपयोग कर सकेंगे।
ईरान तनाव के बीच सामने आया खुलासा
इस पूरे घटनाक्रम का खुलासा ऐसे समय हुआ है जब अमेरिका और ईरान के बीच तनाव बना हुआ है और हाल ही में दोनों देशों के बीच अस्थायी युद्धविराम लागू हुआ है। साथ ही पाकिस्तान में चल रही शांति वार्ता का पहला दौर भी बेनतीजा रहा है, जिससे क्षेत्रीय अस्थिरता बनी हुई है।
रणनीतिक रूप से क्यों अहम है इंडोनेशिया
इंडोनेशिया की भौगोलिक स्थिति उसे बेहद महत्वपूर्ण बनाती है। यह देश प्रशांत और हिंद महासागर के बीच स्थित प्रमुख समुद्री और हवाई मार्गों पर नियंत्रण रखता है। ऐसे में उसका एयरस्पेस सैन्य दृष्टि से बेहद अहम माना जाता है, खासकर त्वरित तैनाती और शक्ति प्रदर्शन के लिए।
इंडो-पैसिफिक में अमेरिका की बढ़ेगी पकड़
अमेरिका पहले से ही ऑस्ट्रेलिया, फिलीपींस और जापान जैसे देशों के साथ सैन्य सहयोग और बेस एक्सेस समझौते रखता है। यदि इंडोनेशिया भी इस नेटवर्क में शामिल होता है, तो अमेरिका की क्षेत्रीय पकड़ और मजबूत हो जाएगी और सैन्य अभियानों की निरंतरता में बड़ा सुधार आएगा।
अगले दौर की बातचीत पर नजर
रिपोर्ट्स के अनुसार, दोनों देशों के रक्षा अधिकारियों के बीच इस मुद्दे पर जल्द ही अगली बैठक होने वाली है। इस बैठक में समझौते को अंतिम रूप देने और उसके क्रियान्वयन पर चर्चा हो सकती है।
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