नई दिल्ली: भारतीय लोकतंत्र के इतिहास में एक ऐसा दौर भी रहा है जब ‘सिद्धांत’ गौण हो गए थे और ‘सत्ता’ ही सर्वोपरि थी। आज जब हम एक मजबूत दलबदल विरोधी कानून के साये में खड़े हैं, तब 1967 से 1971 के उस कालखंड को याद करना जरूरी हो जाता है जिसे ‘अस्थिरता का युग’ कहा जाता है। यह वह …
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