प्रभु की शरणागति का अर्थ: जब अहंकार समाप्त होता है सनातन धर्म और भक्ति मार्ग में प्रभु की शरणागति को आध्यात्मिक जीवन का सर्वोच्च चरण माना गया है। शरणागति का वास्तविक अर्थ केवल पूजा-पाठ तक सीमित नहीं है, बल्कि अपने अहंकार, स्वार्थ और व्यक्तिगत इच्छाओं का त्याग करके स्वयं को पूर्ण रूप से ईश्वर की इच्छा के अधीन कर देना …
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