
रूसी सरकारी रक्षा निर्यात कंपनी ने T-90MS टैंक के संयुक्त उत्पादन का प्रस्ताव दिया है। स्थानीय निर्माण, तकनीक हस्तांतरण और रक्षा सहयोग को अगले स्तर पर ले जाने की योजना पर जोर दिया गया है।
नई दिल्ली/मॉस्को: भारत और रूस के बीच रक्षा सहयोग को नई दिशा देने वाला एक बड़ा प्रस्ताव सामने आया है। रूस की सरकारी रक्षा निर्यात कंपनी रोसोबोरोनएक्सपोर्ट (ROE) ने भारत को अत्याधुनिक T-90MS टैंक का संयुक्त उत्पादन (Joint Production) करने का प्रस्ताव दिया है। रूसी मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, कंपनी का कहना है कि T-90MS टैंक का भारत में संयुक्त निर्माण दोनों देशों के रक्षा सहयोग का अगला महत्वपूर्ण चरण साबित हो सकता है। यदि इस प्रस्ताव पर सहमति बनती है तो भारत को आधुनिक टैंक तकनीक के साथ घरेलू रक्षा विनिर्माण को भी नई गति मिल सकती है।
T-90MS रूस के सबसे आधुनिक टैंकों में शामिल
रिपोर्ट के मुताबिक, T-90MS रूस के सबसे आधुनिक T-90M टैंक का एक्सपोर्ट संस्करण है। इसका डिजाइन और निर्माण रूस की प्रमुख रक्षा कंपनी यूरालवगोनज़ावॉड ने किया है, जो रोस्टेक समूह का हिस्सा है। इस टैंक को आधुनिक युद्धक्षेत्र की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए विकसित किया गया है और इसमें कई उन्नत तकनीकों का इस्तेमाल किया गया है।
भारत के मौजूदा टैंक बेड़े को मिल सकती है नई मजबूती
भारत के पास पहले से ही बड़ी संख्या में T-72 और T-90S टैंक मौजूद हैं, जिनका लगातार आधुनिकीकरण किया जा रहा है। ऐसे में T-90MS के संयुक्त उत्पादन का प्रस्ताव भारतीय सेना की भविष्य की जरूरतों और स्वदेशी रक्षा निर्माण क्षमता को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
रूसी कंपनी का कहना है कि भारत में T-90MS के निर्माण की प्रक्रिया चरणबद्ध तरीके से लागू की जा सकती है। शुरुआती चरण में भारतीय इकाइयों को असेंबली के लिए टेक्नोलॉजी किट उपलब्ध कराई जाएगी, जबकि अगले चरण में विभिन्न कंपोनेंट्स के निर्माण का स्थानीयकरण किया जाएगा। इससे भारत में रक्षा उत्पादन को बढ़ावा मिलने के साथ आयात पर निर्भरता भी कम हो सकती है।
तकनीक हस्तांतरण से घटेगी लागत और समय
रोसोबोरोनएक्सपोर्ट के प्रतिनिधि ने कहा कि भारत को पहले से हस्तांतरित की गई तकनीकों के कारण यहां T-90MS और इस प्लेटफॉर्म पर आधारित अन्य लड़ाकू वाहनों का उत्पादन अपेक्षाकृत कम समय और कम लागत में शुरू किया जा सकता है। उनका कहना है कि भारत में पहले से मौजूद औद्योगिक आधार इस परियोजना को तेजी से आगे बढ़ाने में मददगार साबित होगा।
आधुनिक सुरक्षा और युद्ध क्षमता से लैस है T-90MS
रिपोर्ट के अनुसार, T-90MS में आधुनिक डिजिटल ऑनबोर्ड आर्किटेक्चर पर आधारित नया फायर कंट्रोल सिस्टम लगाया गया है। इसमें इंटीग्रेटेड इंफॉर्मेशन-कमांड सिस्टम, बेहतर लक्ष्य भेदन क्षमता और नई पीढ़ी के आर्टिलरी राउंड तथा गाइडेड मिसाइलों के उपयोग की सुविधा दी गई है। इससे इसकी फायरपावर पहले की तुलना में अधिक प्रभावी मानी जा रही है।
एडवांस्ड प्रोटेक्शन सिस्टम भी है खास
रूसी कंपनी के मुताबिक, T-90MS को बहुस्तरीय सुरक्षा प्रणाली से लैस किया गया है। इसमें एक्सप्लोसिव रिएक्टिव आर्मर, स्लैट स्क्रीन, ड्रोन (UAV) से सुरक्षा के लिए इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर सिस्टम और एक्टिव प्रोटेक्शन सिस्टम जैसी आधुनिक तकनीकों का इस्तेमाल किया गया है। साथ ही विभिन्न प्रकार के आर्मर प्रोटेक्शन सिद्धांतों को अपनाकर इसकी सुरक्षा क्षमता को और मजबूत बनाया गया है।
पहले भी T-90MS की क्षमता की हो चुकी है सराहना
रिपोर्ट के अनुसार, इस वर्ष की शुरुआत में रोस्टेक के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) सर्गेई चेमेज़ोव ने T-90MS की युद्ध क्षमता की प्रशंसा करते हुए कहा था कि यह कई मामलों में NATO देशों के समान श्रेणी के टैंकों से बेहतर प्रदर्शन करने की क्षमता रखता है। उन्होंने यह भी कहा था कि इस टैंक में शामिल कई नई तकनीकों और तकनीकी समाधानों का परीक्षण वास्तविक युद्ध परिस्थितियों में किया जा रहा है।
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