
देश में आगामी विधानसभा चुनावों और लोकसभा की तैयारियों के बीच चुनाव आयोग ने बड़ा कदम उठाते हुए 19 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) अभियान लागू करने का फैसला किया है। इस प्रक्रिया के तहत करीब 37 करोड़ मतदाताओं के दस्तावेज और पहचान का सत्यापन किया जाएगा। आयोग के इस फैसले को चुनावी पारदर्शिता और फर्जी वोटिंग रोकने की दिशा में अहम माना जा रहा है।
जानकारी के अनुसार यह विशेष सत्यापन अभियान 30 मई से शुरू होकर 23 दिसंबर तक चलेगा। इस दौरान बूथ स्तर पर मतदाता सूची की गहन जांच की जाएगी और पात्र मतदाताओं की पहचान सुनिश्चित की जाएगी। चुनाव आयोग ने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी और समयबद्ध तरीके से पूरी की जाए ताकि आगामी चुनावों में किसी तरह की गड़बड़ी की आशंका न रहे।
पंजाब, उत्तराखंड और मणिपुर में चुनाव से पहले बड़ा अभियान
अगले साल जिन राज्यों में विधानसभा चुनाव प्रस्तावित हैं, उनमें पंजाब, उत्तराखंड और मणिपुर प्रमुख हैं। ऐसे में इन राज्यों में SIR अभियान को काफी अहम माना जा रहा है। राजनीतिक दल भी इस प्रक्रिया पर नजर बनाए हुए हैं क्योंकि मतदाता सूची में बदलाव चुनावी समीकरणों को प्रभावित कर सकता है।
सूत्रों के मुताबिक, आयोग का फोकस ऐसे मतदाताओं की पहचान पर रहेगा जिनके नाम दो जगह दर्ज हैं या जिनके दस्तावेजों में त्रुटियां हैं। इसके अलावा मृत और स्थानांतरित मतदाताओं के नाम हटाने की प्रक्रिया भी अभियान के दौरान तेज की जाएगी।
बूथ स्तर पर होगी सख्त निगरानी
चुनाव आयोग ने बूथ लेवल ऑफिसर्स (BLO) को घर-घर जाकर सत्यापन करने के निर्देश दिए हैं। इसके साथ ही डिजिटल माध्यमों से भी डेटा मिलान किया जाएगा। अधिकारियों का कहना है कि इससे मतदाता सूची ज्यादा सटीक और विश्वसनीय बनेगी।
विशेषज्ञों का मानना है कि इतनी बड़ी संख्या में मतदाताओं का सत्यापन चुनावी व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम है। हालांकि विपक्षी दल इस प्रक्रिया की निष्पक्षता और पारदर्शिता पर सवाल उठा सकते हैं।
चुनावी माहौल के बीच बढ़ी राजनीतिक सरगर्मी
SIR अभियान के ऐलान के बाद चुनावी राज्यों में राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं। कई दल अपने कार्यकर्ताओं को मतदाता सूची पर नजर रखने और नए वोटर्स को जोड़ने के निर्देश दे रहे हैं। वहीं चुनाव आयोग ने साफ किया है कि पूरी प्रक्रिया कानून और तय नियमों के अनुसार ही पूरी की जाएगी।आयोग का कहना है कि मतदाता सूची को अपडेट रखना लोकतांत्रिक प्रक्रिया का महत्वपूर्ण हिस्सा है और इससे निष्पक्ष चुनाव कराने में मदद मिलती है।
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