
उत्तराखंड में चल रही चारधाम यात्रा के दौरान श्रद्धालुओं की मौत का आंकड़ा लगातार बढ़ता जा रहा है। यात्रा शुरू होने के महज 25 दिनों के भीतर 40 श्रद्धालुओं की जान जा चुकी है। सबसे ज्यादा मौतें केदारनाथ धाम में दर्ज की गई हैं, जहां अब तक 22 यात्रियों की मौत हो चुकी है। वहीं बद्रीनाथ धाम में 7 श्रद्धालुओं ने दम तोड़ा है। गंगोत्री और यमुनोत्री धाम में भी कई यात्रियों की मौत होने से प्रशासन की चिंता बढ़ गई है।
केदारनाथ यात्रा बनी सबसे चुनौतीपूर्ण
चारधाम यात्रा में इस बार सबसे ज्यादा मुश्किलें केदारनाथ यात्रा में सामने आ रही हैं। ऊंचाई, ऑक्सीजन की कमी, लगातार पैदल चढ़ाई और मौसम में अचानक बदलाव श्रद्धालुओं के लिए भारी पड़ रहे हैं। स्वास्थ्य विभाग के अनुसार अधिकतर मौतें हार्ट अटैक, सांस लेने में दिक्कत और हाई ब्लड प्रेशर जैसी समस्याओं के कारण हुई हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि कई श्रद्धालु बिना स्वास्थ्य जांच के यात्रा पर निकल रहे हैं, जिससे जोखिम और बढ़ रहा है। प्रशासन लगातार यात्रियों से मेडिकल जांच कराने और स्वास्थ्य संबंधी दिशा-निर्देशों का पालन करने की अपील कर रहा है।
बद्रीनाथ, गंगोत्री और यमुनोत्री में भी बढ़ी चिंता
केदारनाथ के अलावा बद्रीनाथ धाम में भी 7 श्रद्धालुओं की मौत दर्ज की गई है। वहीं गंगोत्री और यमुनोत्री धाम में भी कई यात्रियों की तबीयत बिगड़ने और मौत की घटनाएं सामने आई हैं। लगातार बढ़ते आंकड़ों ने स्वास्थ्य विभाग और आपदा प्रबंधन टीमों की चिंता बढ़ा दी है।
यात्रा मार्गों पर मेडिकल कैंप, एंबुलेंस और स्वास्थ्य टीमों की संख्या बढ़ाई गई है। प्रशासन ने बुजुर्गों, हृदय रोगियों और गंभीर बीमारियों से पीड़ित लोगों को विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी है।
स्वास्थ्य जांच के बिना यात्रा पड़ सकती है भारी
विशेषज्ञों का मानना है कि चारधाम यात्रा पर जाने वाले श्रद्धालुओं को पहले पूरी मेडिकल जांच करानी चाहिए। खासकर हृदय रोग, अस्थमा, ब्लड प्रेशर और डायोगियों को डॉक्टर की सलाह के बाद ही यात्रा करनी चाहिए। ऊंचाई वाले क्षेत्रों में ऑक्सीजन की कमी शरीर पर गंभीर असर डाल सकती है।
सरकार और प्रशासन लगातार यात्रियों से अपील कर रहे हैं कि यात्रा के दौरान जल्दबाजी न करें, पर्याप्त पानी पिएं और मौसम की जानकारी लेकर ही आगे बढ़ें।
प्रशासन अलर्ट मोड पर
श्रद्धालुओं की लगातार हो रही मौतों के बाद उत्तराखंड सरकार और स्थानीय प्रशासन अलर्ट मोड में आ गए हैं। यात्रा मार्गों पर स्वास्थ्य सुविधाएं बढ़ाने के साथ-साथ निगरानी भी तेज कर दी गई है। कई जगहों पर यात्रियों की हेल्थ स्क्रीनिंग भी की जा रही है ताकि किसी भी आपात स्थिति से समय रहते निपटा जा सके।चारधाम यात्रा में हर साल लाखों श्रद्धालु पहुंचते हैं, लेकिन इस बार शुरुआती दिनों में ही मौतों का बढ़ता आंकड़ा चिंता का बड़ा विषय बन गया है।
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