
लखनऊ: उत्तर प्रदेश में आगामी विधानसभा चुनावों की आहट के साथ ही राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) ने अपनी रणनीतिक गतिविधियों को तेज कर दिया है। अयोध्या और काशी के बाद अब मथुरा संघ की प्राथमिकताओं में तेजी से उभरता नजर आ रहा है। संघ प्रमुख मोहन भागवत का हालिया मथुरा दौरा इसी दिशा में एक अहम संकेत माना जा रहा है। खास बात यह है कि बीते 15 दिनों में यह उनका दूसरा और इस वर्ष का तीसरा दौरा है, जिसने राजनीतिक और वैचारिक हलकों में हलचल बढ़ा दी है।
ब्रज क्षेत्र बना रणनीति का केंद्र
मंगलवार को मथुरा पहुंचे संघ प्रमुख की मौजूदगी महज औपचारिक नहीं मानी जा रही। जानकारों के अनुसार, संघ ब्रज क्षेत्र को आगामी चुनावों से पहले वैचारिक एकीकरण और संगठन विस्तार के केंद्र के रूप में विकसित करना चाहता है। यही वजह है कि मथुरा अब संघ की दीर्घकालिक योजना में प्रमुख स्थान हासिल करता दिख रहा है।
संत समाज से मजबूत होता जुड़ाव
मलूक पीठ में आयोजित मलूक दास जयंती कार्यक्रम में मोहन भागवत की भागीदारी ने धार्मिक नेतृत्व के साथ संघ के गहरे होते संबंधों को सार्वजनिक कर दिया। इस कार्यक्रम में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की मौजूदगी ने इसके राजनीतिक महत्व को और बढ़ा दिया। इसे ब्रज क्षेत्र में सामाजिक और धार्मिक समन्वय को मजबूत करने की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है।
‘हिंदू सभ्यतागत त्रिकोण’ में मथुरा की एंट्री
सूत्रों के मुताबिक, संघ अब अयोध्या और काशी के बाद मथुरा को ‘हिंदू सभ्यतागत त्रिकोण’ के तीसरे महत्वपूर्ण स्तंभ के रूप में स्थापित करने की दिशा में काम कर रहा है। जहां अयोध्या में राम मंदिर आंदोलन अपने निर्णायक चरण तक पहुंच चुका है और काशी में व्यापक विकास कार्यों से पहचान मजबूत हुई है, वहीं मथुरा को सांस्कृतिक अस्मिता के अगले केंद्र के रूप में देखा जा रहा है।
दीर्घकालिक वैचारिक प्रयोगशाला के रूप में मथुरा
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि संघ मथुरा को सिर्फ चुनावी लामबंदी का केंद्र नहीं, बल्कि एक दीर्घकालिक वैचारिक प्रयोगशाला के तौर पर विकसित करना चाहता है। इसका उद्देश्य हिंदू समाज को एक व्यापक मंच पर संगठित करना और सांस्कृतिक मुद्दों को केंद्र में लाना है।
संगठनात्मक बदलावों के बीच बढ़ी सक्रियता
यह पूरा घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है जब उत्तर प्रदेश भाजपा संगठन और सरकार के बीच तालमेल मजबूत करने, कैडर में अनुशासन लाने और बूथ स्तर तक नेटवर्क को सक्रिय करने में जुटी है। संघ की यह सक्रियता इन प्रयासों को मजबूती देने वाली मानी जा रही है।
पहले भी हो चुके हैं अहम दौरे
इससे पहले मोहन भागवत 24 मार्च को जीवन दीप आश्रम के उद्घाटन में शामिल होने मथुरा आए थे, जहां उनके साथ मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव भी मौजूद थे। वहीं 4 जनवरी को सात दिवसीय प्रवास के दौरान उन्होंने केशव धाम में RSS की अखिल भारतीय कार्यकारी समिति की बैठक की अध्यक्षता की थी।उस दौरान उन्होंने अवैध प्रवासन के मुद्दे पर भी चिंता जताई थी और लोगों से सतर्क रहने की अपील की थी। इसे पश्चिम बंगाल और असम जैसे राज्यों के चुनावी संदर्भ में भी महत्वपूर्ण माना गया था।
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