
नई दिल्ली: भारत और अमेरिका के बीच बढ़ती ट्रेड साझेदारी के बीच रूस ने एक बार फिर साफ संकेत दिया है कि उसे नई दिल्ली पर पूरा भरोसा है। अमेरिकी डील की चर्चाओं के बावजूद मॉस्को को उम्मीद है कि भारत की ओर से रूसी तेल की खरीद पूरी तरह बंद नहीं होगी। वैश्विक ऊर्जा बाजार में जारी उतार-चढ़ाव के बीच यह बयान काफी अहम माना जा रहा है।
रूस बोला- भारत के फैसले राष्ट्रीय हित में
रूस के विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता मारिया जाखारोवा ने कहा कि भारत अपने राष्ट्रीय हितों को ध्यान में रखकर ऊर्जा संबंधी फैसले लेता है। उनके मुताबिक, नई दिल्ली ने अपने रुख को लेकर शीर्ष स्तर पर लगातार संवाद बनाए रखा है और रूस के साथ संपर्क कायम है।
जाखारोवा ने स्पष्ट किया कि तेल खरीद जैसे फैसले कारोबारी व्यवहार्यता और संप्रभु अधिकारों के आधार पर लिए जाते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि ऐसा कोई कारण नहीं है जिससे लगे कि भारत ने अपना नजरिया बदला है।
जनवरी में रूस से आयात में गिरावट
हालांकि आंकड़े बताते हैं कि जनवरी 2026 में रूस से भारत का आयात करीब 40.48 फीसदी घटकर 2.86 बिलियन डॉलर रह गया। पिछले साल इसी अवधि में यह आंकड़ा 4.81 बिलियन डॉलर के आसपास था। आयात में यह गिरावट मुख्य रूप से कच्चे तेल की खरीद में कमी से जुड़ी बताई जा रही है।
बताया जा रहा है कि अमेरिकी टैरिफ दबाव से पहले अप्रैल 2025 में रूस से आयात अपने उच्च स्तर पर था, लेकिन उसके बाद भारतीय रिफाइनरियों ने खरीद में कटौती की। अब कंपनियां वेनेजुएला, अमेरिका और अन्य देशों से भी कच्चा तेल मंगा रही हैं।
US ट्रेड डील के बावजूद पूरी तरह ब्रेक नहीं?
सूत्रों के अनुसार, भारत अमेरिका के साथ व्यापारिक समझ को आगे बढ़ाते हुए रूस से कच्चे तेल का आयात पूरी तरह बंद करने के बजाय सीमित मात्रा में जारी रख सकता है। कुछ रिपोर्ट्स में यह भी दावा किया गया है कि यह आयात प्रतिदिन 10 लाख बैरल तक रह सकता है।
गौरतलब है कि Joe Biden प्रशासन के दौरान अमेरिका का रुख यह था कि नियंत्रित रूप में रूसी तेल का वैश्विक बाजार में बने रहना ऊर्जा स्थिरता के लिए जरूरी है। वहीं Donald Trump के दौर में रूस को लेकर सख्त नीति देखने को मिली थी।
भारत-अमेरिका बयान में रूसी तेल पर चुप्पी
भारत और अमेरिका के बीच जारी ट्रेड वार्ता में जारी साझा बयान में रूसी तेल का उल्लेख नहीं किया गया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी हालिया बातचीत के बाद रूसी तेल आयात पर कोई टिप्पणी नहीं की।
नई दिल्ली का लगातार यही रुख रहा है कि 140 करोड़ की आबादी की ऊर्जा जरूरतों को देखते हुए वह अपने राष्ट्रीय हितों के आधार पर फैसले लेगा।
रूस का दावा- भारत में सबसे बड़ा सप्लायर
रूस की ओर से यह भी कहा गया है कि भारत की ओर से रूसी तेल की खरीद बंद करने की कोई आधिकारिक सूचना नहीं मिली है। रूस के विदेश मंत्री Sergey Lavrov ने पहले भी कहा था कि मॉस्को को ऐसी किसी योजना की जानकारी नहीं है।
नई दिल्ली में रूस के राजदूत Denis Alipov ने भी दोहराया कि रूस अब भी भारत का सबसे बड़ा तेल आपूर्तिकर्ता बना हुआ है।
वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा में भारत की भूमिका अहम
रूसी विदेश मंत्रालय का कहना है कि भारत की तेल खरीद वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। दुनिया के सबसे बड़े ऊर्जा उपभोक्ता देशों में शामिल भारत के फैसले अंतरराष्ट्रीय बाजार पर सीधा असर डालते हैं।
ऐसे में अमेरिका के साथ बढ़ती आर्थिक साझेदारी और रूस से ऊर्जा संबंध—दोनों के बीच संतुलन बनाना नई दिल्ली के लिए रणनीतिक चुनौती भी है और अवसर भी।
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