
मास्को/नई दिल्ली: वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव के बीच भारत के लिए मुश्किलें बढ़ती दिख रही हैं। एक ओर मध्य-पूर्व संकट के कारण ऊर्जा आपूर्ति प्रभावित है, तो दूसरी ओर रूस ने बड़ा कदम उठाते हुए भारत को खाद निर्यात अस्थायी रूप से रोक दिया है। इस फैसले ने देश में कृषि क्षेत्र को लेकर चिंता बढ़ा दी है। रूस पहले से ही भारत का सबसे बड़ा उर्वरक आपूर्तिकर्ता रहा है, ऐसे में इस रोक का सीधा असर खेती-किसानी पर पड़ सकता है।
खाद निर्यात पर एक महीने की रोक, घरेलू जरूरत बनी वजह
रूस के कृषि मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि वसंत बुवाई के मौसम को देखते हुए घरेलू मांग को प्राथमिकता देना जरूरी है। इसी कारण अमोनियम नाइट्रेट जैसे प्रमुख उर्वरकों के निर्यात पर एक महीने की रोक लगाई गई है। मंत्रालय का कहना है कि बढ़ती वैश्विक मांग के बीच घरेलू आपूर्ति सुनिश्चित करना प्राथमिक लक्ष्य है, ताकि किसानों को किसी तरह की कमी का सामना न करना पड़े।
भारत पर कितना पड़ेगा असर?
रिपोर्ट्स के अनुसार, साल 2025 में रूस से भारत को खाद की आपूर्ति में लगभग 20 प्रतिशत की वृद्धि हुई थी। इससे भारत के कुल उर्वरक आयात में रूस की हिस्सेदारी बढ़कर करीब 33 प्रतिशत तक पहुंच गई थी। जनवरी से जून 2025 के बीच रूस ने भारत को लगभग 25 लाख टन खाद भेजा था। ऐसे में अचानक निर्यात रुकने से भारत में सप्लाई चेन प्रभावित हो सकती है।
अमोनियम नाइट्रेट क्यों है अहम?
अमोनियम नाइट्रेट खेती के लिए बेहद जरूरी उर्वरक है, जिसका उपयोग फसलों की उत्पादकता बढ़ाने में किया जाता है। वैश्विक उत्पादन में रूस की हिस्सेदारी लगभग 25 प्रतिशत है। यही नहीं, इसका इस्तेमाल औद्योगिक क्षेत्रों में भी होता है। इसके उत्पादन में प्रयुक्त अमोनिया की बड़ी मात्रा होर्मुज जलडमरूमध्य से होकर गुजरती है, जो फिलहाल भू-राजनीतिक तनाव के चलते प्रभावित है।
ऊर्जा संकट ने बढ़ाई मुश्किलें
ईरान से जुड़े तनाव के चलते होर्मुज जलडमरूमध्य में तेल और गैस के जहाजों की आवाजाही बाधित हो गई है। इससे भारत समेत कई देशों में ऊर्जा आपूर्ति पर दबाव बढ़ गया है। सीमित जहाजों के जरिए हो रही सप्लाई मांग के मुकाबले काफी कम पड़ रही है।
तेल पर छूट खत्म, महंगा हुआ रूसी क्रूड
खाद निर्यात रोकने से पहले ही रूस भारत को झटका दे चुका है। अब भारतीय रिफाइनरियों को रूसी तेल ब्रेंट क्रूड के मुकाबले 4 से 5 डॉलर प्रति बैरल अधिक कीमत पर मिल रहा है। यानी पहले मिलने वाली छूट लगभग खत्म हो चुकी है। हालांकि अमेरिका ने अस्थायी राहत देते हुए भारत को 30 दिनों की छूट दी थी, जिसके तहत अप्रैल के लिए करीब 60 मिलियन बैरल रूसी तेल खरीदा गया, लेकिन यह सौदा सस्ता नहीं रहा।
पाकिस्तान को सस्ता तेल देने का संकेत
इस बीच रूस ने पाकिस्तान को रियायती दरों पर तेल देने की पेशकश भी की है। इस्लामाबाद में रूसी राजदूत ने संकेत दिया है कि यदि पाकिस्तान आधिकारिक रूप से अनुरोध करता है, तो उसे डिस्काउंट पर तेल उपलब्ध कराया जा सकता है। हालांकि अभी तक पाकिस्तान की ओर से कोई औपचारिक पहल नहीं की गई है।
क्या बढ़ेगा भारत में संकट?
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर यह स्थिति लंबी चली, तो भारत को खाद और ऊर्जा दोनों क्षेत्रों में दबाव झेलना पड़ सकता है। खासतौर पर खरीफ सीजन से पहले उर्वरकों की उपलब्धता सुनिश्चित करना सरकार के लिए बड़ी चुनौती बन सकता है।
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