
लखनऊ। उत्तर प्रदेश में जमीन खरीदने और बेचने की प्रक्रिया को पारदर्शी और सुरक्षित बनाने के लिए राज्य सरकार ने बड़ा फैसला लिया है। मुख्यमंत्री Yogi Adityanath की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में 31 में से 30 प्रस्तावों को मंजूरी दे दी गई। इन प्रस्तावों में सबसे अहम फैसला जमीन की रजिस्ट्री प्रक्रिया को लेकर लिया गया है। अब प्रदेश में किसी भी जमीन की रजिस्ट्री करने से पहले उसकी खतौनी की जांच अनिवार्य कर दी गई है। बिना खतौनी सत्यापन के अब रजिस्ट्री नहीं हो सकेगी।
रजिस्ट्री प्रक्रिया में पारदर्शिता लाने की तैयारी
सरकार का मानना है कि इस फैसले से जमीन से जुड़े विवादों और धोखाधड़ी के मामलों में काफी कमी आएगी। कई बार देखा गया है कि जमीन की सही जानकारी और खतौनी की स्थिति स्पष्ट न होने के कारण लोगों को बाद में कानूनी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। अब रजिस्ट्री से पहले खतौनी की जांच सुनिश्चित होने से जमीन के वास्तविक मालिक और रिकॉर्ड की स्थिति स्पष्ट हो जाएगी।
फर्जीवाड़े और विवादों पर लगेगी रोक
प्रदेश में जमीन से जुड़े फर्जीवाड़े और विवाद लंबे समय से बड़ी समस्या बने हुए हैं। कई मामलों में गलत दस्तावेजों के आधार पर जमीन की खरीद-फरोख्त कर दी जाती थी, जिससे बाद में मुकदमेबाजी बढ़ जाती थी। सरकार का मानना है कि नई व्यवस्था लागू होने से इस तरह के मामलों पर लगाम लगेगी और खरीदार को सुरक्षित निवेश का भरोसा मिलेगा।
कैबिनेट बैठक में 30 प्रस्तावों को मिली मंजूरी
मुख्यमंत्री Yogi Adityanath की अध्यक्षता में हुई इस अहम कैबिनेट बैठक में कुल 31 प्रस्ताव रखे गए थे, जिनमें से 30 को मंजूरी दे दी गई। विभिन्न विभागों से जुड़े इन प्रस्तावों का उद्देश्य प्रशासनिक व्यवस्था को मजबूत करना और आम लोगों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराना है। हालांकि, जमीन रजिस्ट्री से जुड़ा फैसला सबसे ज्यादा चर्चा में है।
आम लोगों पर क्या पड़ेगा असर
सरकार के इस फैसले का सीधा असर जमीन खरीदने और बेचने वाले लोगों पर पड़ेगा। अब किसी भी संपत्ति की रजिस्ट्री से पहले राजस्व रिकॉर्ड यानी खतौनी की जांच जरूरी होगी। इससे जमीन के रिकॉर्ड में पारदर्शिता आएगी और भविष्य में होने वाले विवादों से भी राहत मिलने की उम्मीद है।
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