लखनऊ। नवाबों के शहर की ऐतिहासिक लखनऊ यूनिवर्सिटी (Lucknow University) एक बार फिर सुर्खियों में है। विश्वविद्यालय परिसर स्थित ऐतिहासिक ‘लाल बारादरी’ भवन में नमाज पढ़ने और परिसर का माहौल खराब करने के आरोप में प्रशासन ने सख्त रुख अपनाया है। विश्वविद्यालय की रजिस्ट्रार डॉ. भावना मिश्रा की शिकायत पर पुलिस ने अज्ञात छात्रों और कई बाहरी उपद्रवियों के खिलाफ गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज कर लिया है।
लाल बारादरी में नमाज और तोड़फोड़ का आरोप
विवाद की शुरुआत तब हुई जब सोशल मीडिया पर कुछ मुस्लिम युवाओं द्वारा लाल बारादरी परिसर में नमाज पढ़ते हुए वीडियो वायरल हुए। विश्वविद्यालय प्रशासन के अनुसार, 22 फरवरी 2026 को जब परिसर में फेंसिंग (बाड़ेबंदी) का कार्य चल रहा था, तब कुछ छात्रों और बाहरी लोगों ने वहां पहुंचकर न सिर्फ काम रुकवाया, बल्कि तोड़फोड़ भी की। एफआईआर के मुताबिक, मौके पर सार्वजनिक स्थान पर नमाज और इफ्तार का आयोजन कर सांप्रदायिक सौहार्द बिगाड़ने और दंगा भड़काने का प्रयास किया गया।
इन गंभीर धाराओं में फंसा कानूनी पेंच
रजिस्ट्रार की तहरीर पर पुलिस ने अज्ञात आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता और सीएलए (CLA) एक्ट की कड़ी धाराओं के तहत केस दर्ज किया है। आरोपियों पर मुख्य रूप से इन धाराओं में कार्रवाई की गई है:
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191(2): दंगा करने से संबंधित।
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196(1)(a, b, c): विभिन्न समूहों के बीच शत्रुता को बढ़ावा देना।
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353(2): लोक सेवक के कार्य में बाधा डालना।
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धारा 7 (CLA Act): सार्वजनिक व्यवस्था भंग करना।
सीसीटीवी और वीडियो फुटेज से होगी पहचान
फिलहाल पुलिस ने इस मामले की जांच एसआई शिशिर कुमार को सौंपी है। एफआईआर में भले ही आरोपी अज्ञात हैं, लेकिन विश्वविद्यालय प्रशासन ने पुलिस से मांग की है कि परिसर में लगे सीसीटीवी कैमरों और वायरल वीडियो के आधार पर आरोपियों को चिन्हित कर उनके खिलाफ कठोर अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाए। इस घटना के बाद से ही कैंपस में तनाव की स्थिति को देखते हुए सुरक्षा व्यवस्था चाक-चौबंद कर दी गई है।
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