Ramayana: ‘मंगल रंग’ गाने में दिखी राम-सीता की शादी, वाल्मीकि रामायण में कैसे हुई थीं विवाह की रस्में?

रणबीर कपूर और साई पल्लवी की फिल्म ‘रामायण’ का नया गाना ‘मंगल रंग’ रिलीज होने के बाद भगवान राम और माता सीता के विवाह से जुड़े प्रसंग एक बार फिर चर्चा में हैं। गाने में राम-सीता के प्रेम, विवाह समारोह और अयोध्या आगमन की झलक दिखाई गई है। खास तौर पर एक दृश्य में भगवान राम को पीला लेप लगाते हुए दिखाया गया है, जिसे लेकर सोशल मीडिया पर अलग-अलग चर्चाएं हो रही हैं। कुछ दर्शक इसे हल्दी की रस्म मान रहे हैं, जबकि कुछ इसे मिथिला की पारंपरिक चुमान रस्म या राज्याभिषेक से जुड़ा दृश्य बता रहे हैं। हालांकि, फिल्म निर्माताओं ने इस दृश्य की रस्म को लेकर आधिकारिक स्पष्टीकरण नहीं दिया है। ऐसे में यह जानना दिलचस्प है कि वाल्मीकि रामायण में राम और सीता के विवाह का वर्णन किस तरह किया गया है और उस प्रसंग में किन रस्मों का उल्लेख मिलता है।

‘मंगल रंग’ में विवाह का दृश्य क्यों बना चर्चा का विषय?

नितेश तिवारी के निर्देशन में बन रही फिल्म ‘रामायण’ में रणबीर कपूर भगवान राम और साई पल्लवी माता सीता की भूमिका निभा रही हैं। फिल्म के ‘मंगल रंग’ गाने को एआर रहमान ने संगीतबद्ध किया है। इसे अरिजीत सिंह और श्रेया घोषाल ने गाया है, जबकि गीत के बोल कुमार विश्वास ने लिखे हैं।

गाने में राम और सीता के स्वयंवर, विवाह समारोह और उनके वैवाहिक जीवन की झलक दिखाई गई है। इसी बीच राम को पीला लेप लगाने वाले दृश्य पर सवाल उठे हैं। कुछ दर्शकों ने इसे आधुनिक हिंदू विवाहों में होने वाली हल्दी की रस्म से जोड़कर देखा, जबकि अन्य ने इसे मिथिला की विवाह परंपरा या राम के राज्याभिषेक की तैयारी से संबंधित बताया।

मिथिला क्षेत्र में प्रचलित चुमान या चुमावन रस्म में वर-वधू को आशीर्वाद देने की परंपरा मिलती है। हालांकि, फिल्म के इस खास दृश्य को इसी रस्म का चित्रण मानने की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।

वाल्मीकि रामायण में कैसे हुआ था राम-सीता का विवाह?

वाल्मीकि रामायण के बालकांड में राम और सीता के विवाह का विस्तृत प्रसंग मिलता है। मिथिला के राजा जनक ने सीता के स्वयंवर में यह शर्त रखी थी कि जो वीर भगवान शिव के धनुष पर प्रत्यंचा चढ़ाने में सफल होगा, उसी से सीता का विवाह किया जाएगा।

स्वयंवर में भगवान राम ने शिव धनुष उठाया। प्रत्यंचा चढ़ाने के प्रयास के दौरान धनुष टूट गया। इसके बाद राजा जनक ने सीता का विवाह राम से करने का निर्णय लिया। विवाह की औपचारिकताएं पूरी करने के लिए अयोध्या के राजा दशरथ को मिथिला बुलाया गया। उनके पहुंचने के बाद राम और उनके भाइयों के विवाह की तैयारियां शुरू हुईं।

विवाह से पहले शुभ मुहूर्त और मंगल रस्में

वाल्मीकि रामायण के बालकांड के सर्ग 73 में विवाह की तैयारियों का उल्लेख मिलता है। विवाह के लिए शुभ मुहूर्त निर्धारित किया गया और राम सहित उनके भाइयों को विवाह के लिए सजाया गया। इस प्रसंग में ‘कौतुक मंगल’ जैसी मंगल रस्मों का भी वर्णन मिलता है।

विवाह की वैदिक प्रक्रिया में ऋषि वशिष्ठ की महत्वपूर्ण भूमिका थी। उन्होंने विवाह के लिए वेदी तैयार कराई। इसके बाद वैदिक मंत्रों के साथ अग्नि स्थापित की गई और उसमें आहुतियां दी गईं। इस तरह विवाह की धार्मिक प्रक्रिया में अग्नि को विशेष स्थान दिया गया।

राजा जनक ने राम को सौंपा सीता का हाथ

विवाह के दौरान राजा जनक ने माता सीता को सजाकर भगवान राम के सामने प्रस्तुत किया। उन्होंने राम से कहा कि सीता उनकी पुत्री हैं और धर्म के पालन में उनकी सहभागी होंगी। इसके बाद जनक ने सीता का हाथ राम के हाथ में सौंपा।

इस प्रसंग को आज की विवाह परंपराओं में कन्यादान और पाणिग्रहण से जोड़कर समझा जाता है। हालांकि, प्राचीन ग्रंथ के वर्णन और वर्तमान में अलग-अलग क्षेत्रों में निभाई जाने वाली रस्मों के बीच अंतर को ध्यान में रखना चाहिए।

सीता का हाथ सौंपते समय राजा जनक ने मंत्रों के साथ पवित्र जल अर्पित किया। विवाह के इस प्रसंग में देवताओं और ऋषियों के प्रसन्न होने, नगाड़े बजने तथा आकाश से फूलों की वर्षा होने का भी वर्णन मिलता है।

अग्नि की परिक्रमा के साथ पूरी हुई विवाह की रस्म

वाल्मीकि रामायण में केवल राम और सीता ही नहीं, बल्कि राम के भाइयों के विवाह का भी उल्लेख है। राजा जनक ने लक्ष्मण, भरत और शत्रुघ्न के विवाह की व्यवस्था भी की थी।

ऋषि वशिष्ठ ने वैदिक विधि से विवाह की रस्में पूरी कराईं। बालकांड के सर्ग 73 के श्लोक 35-36 के अनुसार, चारों भाइयों ने अपनी-अपनी पत्नियों के साथ अग्नि, वेदी, राजा जनक और उपस्थित ऋषियों की परिक्रमा की। इसके साथ विवाह की धार्मिक प्रक्रिया संपन्न हुई।

यह वर्णन बताता है कि वाल्मीकि रामायण में विवाह के दौरान वैदिक मंत्रों, अग्नि, पवित्र जल और परिक्रमा जैसे अनुष्ठानों का विशेष महत्व था।

क्या वाल्मीकि रामायण में हल्दी और मेहंदी का जिक्र है?

राम-सीता विवाह की रस्मों के संदर्भ में अक्सर यह सवाल पूछा जाता है कि क्या उस समय भी आज की तरह हल्दी और मेहंदी समारोह आयोजित किए जाते थे।

वाल्मीकि रामायण के बालकांड के सर्ग 73 में विवाह से पहले की मंगल रस्मों, अग्नि स्थापना, पवित्र जल के प्रयोग और परिक्रमा का वर्णन मिलता है। लेकिन इस प्रसंग में आज प्रचलित हल्दी और मेहंदी समारोहों का स्पष्ट उल्लेख नहीं मिलता।

इसका अर्थ यह नहीं है कि प्राचीन समाज में किसी भी प्रकार की उबटन या सौंदर्य संबंधी परंपरा नहीं थी। इतना जरूर कहा जा सकता है कि इस विशेष विवाह प्रसंग में उन रस्मों का स्पष्ट विवरण उपलब्ध नहीं है।

‘मंगल रंग’ में दिखाई गई रस्म का सही अर्थ समझने के लिए फिल्म निर्माताओं के स्पष्टीकरण और मिथिला की पारंपरिक विवाह परंपराओं के अध्ययन को साथ रखकर देखना होगा।

Check Also

Kartik Maas Tulsi Puja Niyam: कार्तिक मास में कैसे करें तुलसी पूजन? जानें विधि, नियम और धार्मिक महत्व

कार्तिक मास में तुलसी पूजन का विशेष धार्मिक महत्व माना जाता है। हिंदू मान्यताओं के …