नई दिल्ली: बॉलीवुड के दिग्गज कॉमेडियन राजपाल यादव के लिए समय कुछ ठीक नहीं चल रहा है। दिल्ली की तिहाड़ जेल से 17 फरवरी की शाम रिहा होने के बाद जहां उनके प्रशंसकों ने राहत की सांस ली, वहीं एक्टर के चेहरे पर दोबारा जेल जाने का डर साफ दिखाई दिया। चेक बाउंस मामले में फंसे राजपाल यादव जब जेल की दहलीज से बाहर आए, तो वे काफी भावुक नजर आए। नम आंखों के साथ उन्होंने इंडस्ट्री और फैंस का शुक्रिया तो अदा किया, लेकिन कानून की तलवार अभी भी उनकी गर्दन पर लटक रही है।
18 मार्च तक की मिली मोहलत, क्या टल पाएगी गिरफ्तारी?
राजपाल यादव की यह रिहाई परमानेंट नहीं है। दिल्ली हाई कोर्ट ने उन्हें केवल 18 मार्च तक की अंतरिम जमानत दी है। दरअसल, यह राहत उन्हें 19 फरवरी को शाहजहांपुर में अपनी भतीजी की शादी में शामिल होने के लिए मिली है। कोर्ट ने स्पष्ट कर दिया है कि सजा पर रोक सिर्फ अगली सुनवाई की तारीख तक ही लागू रहेगी। अगर राजपाल यादव 18 मार्च से पहले पूरी रकम चुकाने में नाकाम रहते हैं या कोर्ट की शर्तों का उल्लंघन करते हैं, तो उन्हें होली से पहले दोबारा जेल की हवा खानी पड़ सकती है।
डेढ़ करोड़ का ड्राफ्ट और पासपोर्ट जब्त: इन शर्तों पर मिली आजादी
सुनवाई के दौरान राजपाल यादव के वकील ने कोर्ट को सूचित किया कि उन्होंने 1.5 करोड़ रुपये का डिमांड ड्राफ्ट जमा करा दिया है। हालांकि, कोर्ट ने एक्टर पर सख्त पाबंदियां भी लगाई हैं। उन्हें अपना पासपोर्ट सरेंडर करने का आदेश दिया गया है और वे बिना कोर्ट की इजाजत के देश छोड़कर नहीं जा सकते। जज ने दो टूक शब्दों में कहा कि यदि एक्टर 18 मार्च तक बकाया राशि का भुगतान कर देते हैं, तभी उन्हें स्थाई रिहाई पर विचार किया जाएगा, अन्यथा कानून अपना काम करेगा।
“27 साल का करियर और 250 फिल्में”, जेल से बाहर आकर हुए रुआंसे
तिहाड़ से बाहर निकलते ही राजपाल यादव मीडिया के सामने बेहद भावुक दिखे। कानूनी दांव-पेंच पर तो उन्होंने अपने वकील भास्कर उपाध्याय को आगे कर दिया, लेकिन अपनी भावनाओं को रोक नहीं पाए। उन्होंने कहा, “इंडस्ट्री में मुझे 27 साल हो गए हैं और मैंने लगभग 250 फिल्मों में काम किया है। मुझे पूरा बॉलीवुड सपोर्ट कर रहा है और देश का बच्चा-बच्चा मेरे साथ है।” खास बात यह रही कि इस मुश्किल घड़ी में उन्होंने किसी बड़े सितारे का नाम लेने के बजाय अपने वकील और पूरी फिल्म इंडस्ट्री के नैतिक समर्थन पर भरोसा जताया।
2010 का वो कर्ज जो आज बन गया गले की फांस
बता दें कि यह पूरा विवाद साल 2010 में शुरू हुआ था, जब राजपाल यादव ने अपनी फिल्म ‘अता पता लापता’ बनाने के लिए भारी-भरकम कर्ज लिया था। फिल्म बॉक्स ऑफिस पर औंधे मुंह गिरी और राजपाल कर्ज के जाल में फंसते चले गए। पैसा न लौटा पाने के कारण यह मामला कोर्ट पहुंचा और तारीखों के अंतहीन सिलसिले के बाद 5 फरवरी को उन्हें सरेंडर करना पड़ा था। अब सबकी नजरें 18 मार्च की सुनवाई पर टिकी हैं कि क्या राजपाल यादव अपना कर्ज चुका कर ‘आजाद’ हो पाएंगे या नहीं।
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