
अयोध्या: ऐतिहासिक नगरी अयोध्या में आयोजित भव्य कार्यक्रम के दौरान राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने देशवासियों को नवरात्र की शुभकामनाएं देते हुए अपने संबोधन में भावुक और प्रेरणादायक विचार व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि अयोध्या की पावन धरती पर उपस्थित होना उनके जीवन का एक कृतार्थ करने वाला और गौरवपूर्ण क्षण है।
राम मंदिर से जुड़ी आस्था और सांस्कृतिक विरासत
राष्ट्रपति ने कहा कि राम मंदिर अयोध्या केवल एक धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत का जीवंत प्रतीक है। यह मंदिर देश की आस्था, इतिहास और परंपराओं को एक सूत्र में जोड़ने का कार्य करता है। उन्होंने इस अवसर को अपने जीवन के सबसे महत्वपूर्ण पलों में से एक बताया।
500 वर्षों के संघर्ष के बाद मिला ऐतिहासिक क्षण
अपने संबोधन में राष्ट्रपति मुर्मू ने कहा कि सदियों के लंबे संघर्ष के बाद देश को यह सौभाग्य प्राप्त हुआ है। उन्होंने राम मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा और मंदिर के ध्वजारोहण को भारतीय इतिहास की “स्वर्णिम तिथियां” करार दिया। यह क्षण न केवल धार्मिक बल्कि राष्ट्रीय गौरव का प्रतीक भी है।
श्रीराम यंत्र स्थापना को बताया ईश्वरीय कृपा
राष्ट्रपति ने यह भी साझा किया कि उन्हें श्रीराम यंत्र की स्थापना का अवसर मिला, जिसे उन्होंने प्रभु श्रीराम की विशेष कृपा का प्रतीक बताया। उनके अनुसार, यह उनके लिए आध्यात्मिक रूप से अत्यंत महत्वपूर्ण अनुभव रहा।
श्रीराम और भारत माता के सम्मान को बताया समान
अपने संबोधन के अंत में उन्होंने कहा कि प्रभु श्रीराम को नमन करना और भारत माता का वंदन करना एक समान है। उन्होंने सभी नागरिकों से आह्वान किया कि वे देश के सम्मान, एकता और वैभव को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने का संकल्प लें।
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