
नई दिल्ली। कांग्रेस संसदीय दल की अध्यक्ष Sonia Gandhi ने ईरान के सर्वोच्च नेता Ali Khamenei की कथित टारगेट किलिंग को लेकर केंद्र सरकार की चुप्पी पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने कहा कि ऐसे संवेदनशील अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रम पर भारत की ओर से स्पष्ट प्रतिक्रिया न आना देश की विदेश नीति की दिशा और विश्वसनीयता पर प्रश्नचिह्न लगाता है।
एक अंग्रेजी अखबार में प्रकाशित अपने लेख में सोनिया गांधी ने मांग की कि 9 मार्च से शुरू हो रहे संसद के बजट सत्र के दूसरे चरण में इस मुद्दे पर सरकार को अपना रुख स्पष्ट करना चाहिए। उनके इस लेख के बाद सियासी गलियारों में बहस तेज हो गई है।
संसद में चर्चा की मांग
सोनिया गांधी ने अपने लेख में कहा कि जब किसी विदेशी राष्ट्राध्यक्ष की लक्षित हत्या की खबर सामने आती है और उस पर भारत की ओर से संप्रभुता या अंतरराष्ट्रीय कानून के समर्थन में स्पष्ट बयान नहीं दिया जाता, तो यह स्थिति चिंताजनक है। उन्होंने जोर देकर कहा कि मौन रहना तटस्थता नहीं माना जा सकता।
उन्होंने संयुक्त राष्ट्र चार्टर के अनुच्छेद 2(4) का उल्लेख करते हुए लिखा कि किसी भी देश की क्षेत्रीय अखंडता या राजनीतिक स्वतंत्रता के खिलाफ बल प्रयोग या उसकी धमकी अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन है। ऐसे में यदि दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र सैद्धांतिक आपत्ति दर्ज नहीं करता, तो यह वैश्विक मानदंडों के कमजोर होने का संकेत है।
राहुल गांधी ने भी साधा निशाना
कांग्रेस सांसद Rahul Gandhi ने भी इस मुद्दे पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि जब भारत जैसे देश की ओर से स्पष्ट रूप से अंतरराष्ट्रीय कानून और संप्रभुता की रक्षा की बात नहीं की जाती, तो यह विदेश नीति की विश्वसनीयता पर असर डालता है। उन्होंने अपनी पार्टी की अध्यक्ष द्वारा लिखे गए लेख का समर्थन करते हुए कहा कि भारत को शांति और नैतिक शक्ति के पक्ष में मजबूती से खड़ा होना चाहिए।
निशिकांत दुबे का पलटवार
बीजेपी सांसद Nishikant Dubey ने सोनिया गांधी और राहुल गांधी के बयानों पर तीखा जवाब दिया। दुबे ने खामेनेई की एक पुरानी सोशल मीडिया पोस्ट साझा करते हुए तंज कसा कि “लिखना तो बनता है?”
यह पोस्ट 6 अगस्त 2013 की बताई जा रही है, जिसमें खामेनेई ने भारत के पहले प्रधानमंत्री Jawaharlal Nehru द्वारा लिखित पुस्तक Glimpses of World History का जिक्र किया था। दुबे ने इसी संदर्भ को सामने रखते हुए कांग्रेस पर निशाना साधा।
इंदिरा गांधी का भी किया जिक्र
राहुल गांधी के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए निशिकांत दुबे ने 1984 की घटना का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि जब तत्कालीन प्रधानमंत्री Indira Gandhi की हत्या हुई थी, तब ईरान के तत्कालीन सर्वोच्च धार्मिक नेता Ruhollah Khomeini की ओर से कोई आधिकारिक बयान नहीं आया था। दुबे ने कांग्रेस पर इतिहास भूलने का आरोप लगाया।
सरकार की चुप्पी पर कांग्रेस का सवाल
सोनिया गांधी ने अपने लेख में यह भी कहा कि भारत सरकार ने न तो इस हत्या की स्पष्ट निंदा की और न ही ईरान की संप्रभुता के कथित उल्लंघन पर कोई ठोस बयान दिया। उन्होंने आरोप लगाया कि अमेरिका-इजरायल के व्यापक हमलों की अनदेखी करते हुए प्रधानमंत्री ने केवल ईरान द्वारा संयुक्त अरब अमीरात पर किए गए प्रतिशोधी हमले की आलोचना की, जबकि उससे पहले की घटनाओं का उल्लेख नहीं किया गया।
उन्होंने लिखा कि यह घटना बिना औपचारिक युद्ध घोषणा और चल रही कूटनीतिक प्रक्रिया के बीच हुई। ऐसे में भारत को स्पष्ट और संतुलित रुख अपनाना चाहिए था।
विदेश नीति पर उठे बड़े सवाल
सियासी बयानबाजी के बीच यह मुद्दा अब संसद में गरमाने की संभावना है। कांग्रेस इसे विदेश नीति की पारदर्शिता और नैतिक रुख से जोड़कर देख रही है, वहीं बीजेपी इसे कांग्रेस की राजनीति करार दे रही है। बजट सत्र के दूसरे चरण में इस पर तीखी बहस होने के आसार हैं।
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