बरसाना की होली पर सियासत गरम: सिद्धार्थनाथ सिंह का अखिलेश यादव से सीधा सवाल—‘यदुवंशी होकर बांके बिहारी के दर्शन क्यों नहीं?’

प्रयागराज। उत्तर प्रदेश की राजनीति में होली से पहले रंगों से ज्यादा बयानबाजी की गूंज सुनाई दे रही है। प्रयागराज से भारतीय जनता पार्टी के विधायक और पूर्व मंत्री Siddharthnath Singh ने समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष Akhilesh Yadav पर बरसाना की होली में शामिल न होने को लेकर तीखा हमला बोला है। उन्होंने सवाल उठाया कि जब अखिलेश यादव खुद को यदुवंशी बताते हैं तो फिर मथुरा-वृंदावन और बरसाना की पारंपरिक होली से दूरी क्यों?

इफ्तार बनाम बरसाना की होली पर घिरी सियासत

प्रयागराज में मीडिया से बातचीत के दौरान सिद्धार्थनाथ सिंह ने कहा कि इफ्तार पार्टी में शामिल होना किसी का व्यक्तिगत निर्णय हो सकता है, लेकिन सवाल तब उठता है जब आप अपनी धार्मिक-सांस्कृतिक पहचान से जुड़े आयोजनों से दूरी बनाए रखें। उन्होंने पूछा कि अखिलेश यादव आखिर कब बरसाना की होली खेलने गए थे? क्यों वे बरसाना की लट्ठमार होली या मथुरा में बांके बिहारी मंदिर के दर्शन के लिए नहीं पहुंचते?

भाजपा विधायक ने तंज कसते हुए कहा कि क्या उन्हें लगता है कि इफ्तार में जाने से वोट मिलेंगे, लेकिन अयोध्या में दीपोत्सव मनाने या बरसाना की होली में शामिल होने से वोट कट जाएंगे? उन्होंने यह भी कहा कि मुख्यमंत्री रहते हुए भी अखिलेश यादव इन प्रमुख धार्मिक आयोजनों में सक्रिय नजर नहीं आए।

सॉफ्ट हिंदुत्व और चुनावी रणनीति पर वार

दरअसल, हाल के महीनों में अखिलेश यादव का रुख बदला-बदला नजर आया है। शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती के मुद्दे से लेकर माघ मेले और आगामी महाकुंभ 2025 को लेकर उनकी सक्रियता चर्चा में रही है। इटावा में मंदिर निर्माण को लेकर भी उनके रुख में बदलाव की बातें सामने आई हैं। ऐसे में भाजपा नेता इसे सॉफ्ट हिंदुत्व की राजनीति करार देते हुए सवाल उठा रहे हैं।

सिद्धार्थनाथ सिंह ने कहा कि भारत में हर नागरिक को कहीं भी आने-जाने की स्वतंत्रता है, लेकिन जब कोई खुद को यदुवंशी कहे और फिर भी बरसाना की होली या मथुरा के बांके बिहारी मंदिर से दूरी बनाए रखे तो राजनीतिक प्रश्न उठना स्वाभाविक है।

2027 विधानसभा चुनाव से पहले गरमाया माहौल

प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव को लेकर सियासी जमीन अभी से तैयार की जा रही है। समाजवादी पार्टी पीडीए (पिछड़ा-दलित-अल्पसंख्यक) समीकरण के जरिए भाजपा को चुनौती देने की रणनीति बना रही है। वहीं भाजपा हिंदुत्व और सांस्कृतिक पहचान के मुद्दों को मजबूती से उभार रही है। बरसाना की होली और धार्मिक आयोजनों में भागीदारी का सवाल इसी व्यापक राजनीतिक रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है।

कौन हैं सिद्धार्थनाथ सिंह?

Siddharthnath Singh प्रयागराज से लगातार दूसरी बार विधायक चुने गए हैं। वे उत्तर प्रदेश सरकार के पहले कार्यकाल में मंत्री रह चुके हैं। उनका जन्म 1 अक्टूबर 1963 को हुआ था। वे देश के पूर्व प्रधानमंत्री Lal Bahadur Shastri के नाती हैं और पार्टी के तेज-तर्रार वक्ताओं में गिने जाते हैं।

बरसाना की होली को लेकर छिड़ी यह सियासी बहस आने वाले दिनों में और तेज हो सकती है, क्योंकि चुनावी साल नजदीक आते ही सांस्कृतिक और धार्मिक प्रतीकों की राजनीति उत्तर प्रदेश में हमेशा केंद्र में रही है।

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