
लखनऊ। उत्तर प्रदेश में आगामी विधानसभा चुनाव की आहट के साथ ही राजनीतिक दलों ने अपनी रणनीति तेज कर दी है। समाजवादी पार्टी ने 2024 के लोकसभा चुनाव में कारगर साबित हुए पीडीए (पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक) समीकरण को फिर से मजबूत करने की तैयारी शुरू कर दी है। इसी रणनीति के तहत पार्टी ने हाल ही में कई नए चेहरों को संगठन से जोड़ा है। इस क्रम में रामपुर और मुरादाबाद के कई नेताओं को समाजवादी पार्टी में शामिल कराया गया, जिनमें बहुजन समाज पार्टी से जुड़े रहे रामपुर के वरिष्ठ नेता सुरेंद्र नागर भी प्रमुख हैं।
जॉइनिंग के तुरंत बाद संगठन में मिला बड़ा पद
समाजवादी पार्टी में शामिल होने के कुछ ही दिनों के भीतर सुरेंद्र नागर को संगठन में अहम जिम्मेदारी दे दी गई। दो मार्च को उन्हें सपा का प्रदेश सचिव नियुक्त किया गया। पार्टी नेतृत्व द्वारा इतनी जल्दी बड़ा पद दिए जाने के बाद राजनीतिक हलकों में चर्चा तेज हो गई है। सूत्रों की मानें तो इस फैसले से पार्टी के भीतर असंतोष की भी खबरें सामने आ रही हैं।
आजम खान से पुराने राजनीतिक मतभेद की चर्चा
राजनीतिक गलियारों में सबसे ज्यादा चर्चा इस बात की हो रही है कि रामपुर में बसपा में रहते हुए सुरेंद्र नागर को वरिष्ठ सपा नेता आजम खान का कट्टर विरोधी माना जाता रहा है। ऐसे में उन्हें प्रदेश सचिव बनाए जाने को लेकर पार्टी के कुछ नेताओं में नाराजगी की चर्चा है। बताया जा रहा है कि यह फैसला आजम खान की सहमति के बिना लिया गया, जिससे असहजता की स्थिति बनी हुई है।
आजम खान के समर्थन में बोले सुरेंद्र नागर
हालांकि सपा में शामिल होते समय सुरेंद्र नागर ने सार्वजनिक तौर पर आजम खान के समर्थन में बयान दिया। उन्होंने कहा कि आजम खान समाजवादी आंदोलन के बड़े नेता हैं और पार्टी के लिए उनका योगदान महत्वपूर्ण रहा है। नागर ने कहा कि मौजूदा सरकार ने उनके खिलाफ कई कार्रवाई की हैं और उन्हें झूठे मुकदमों में जेल भेजा गया है।
“कानूनी रास्ते से आजम खान को जल्द बाहर लाने का प्रयास”
सुरेंद्र नागर ने कहा कि उनका प्रयास रहेगा कि कानूनी प्रक्रिया के माध्यम से आजम खान को जल्द से जल्द जेल से बाहर लाया जाए। उनके मुताबिक समाजवादी पार्टी को आजम खान जैसे अनुभवी नेता की जरूरत है और उनके बाहर आने से पार्टी और मजबूत होगी। उन्होंने यह भी कहा कि किसी बड़े नेता पर कार्रवाई होने से संगठन को नुकसान पहुंचता है।
अखिलेश यादव की नजर दलित वोट बैंक पर
राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार सुरेंद्र नागर को संगठन में अहम जिम्मेदारी देने के पीछे समाजवादी पार्टी की व्यापक चुनावी रणनीति भी देखी जा रही है। सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव दलित समुदाय, खासकर जाटव मतदाताओं को पार्टी से जोड़ने की कोशिश में लगे हुए हैं। इसी दिशा में पार्टी ने आगामी 15 मार्च को कांशीराम जयंती के अवसर पर पूरे उत्तर प्रदेश में बड़ा जनसंपर्क अभियान चलाने का फैसला किया है।
मुलायम सिंह और कांशीराम के रिश्तों को बताएगी सपा
इस अभियान के दौरान पार्टी नेता जनता के बीच जाकर समाजवादी आंदोलन के पुराने दौर की चर्चा करेंगे। इसमें मुलायम सिंह यादव और कांशीराम के बीच रहे राजनीतिक संबंधों और सामाजिक न्याय की साझा सोच को प्रमुखता से रखा जाएगा। हालांकि इस रणनीति पर बसपा सुप्रीमो मायावती ने आपत्ति जताई है, लेकिन इसके बावजूद अखिलेश यादव चुनावी तैयारी को लेकर पूरी तरह सक्रिय नजर आ रहे हैं।
यूपी की सियासत में तेज होती चुनावी हलचल
विधानसभा चुनाव से पहले उत्तर प्रदेश की राजनीति में नए समीकरण बनते और बिगड़ते दिखाई दे रहे हैं। एक ओर जहां समाजवादी पार्टी अपने सामाजिक समीकरण को मजबूत करने में जुटी है, वहीं दूसरी ओर अन्य दल भी अपने-अपने वोट बैंक को साधने की रणनीति पर काम कर रहे हैं। ऐसे में सुरेंद्र नागर की एंट्री और उन्हें मिला अहम पद आने वाले दिनों में यूपी की सियासत में नई चर्चाओं को जन्म दे सकता है।
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