इस्लामाबाद। पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ के पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (पीओके) को लेकर दिए गए विवादित बयान ने देश की राजनीति में नया तूफान खड़ा कर दिया है। उनके बयान पर न केवल पीओके के राजनीतिक नेताओं ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है, बल्कि पाकिस्तान की प्रमुख विपक्षी पार्टी पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी (PPP) के चेयरमैन बिलावल भुट्टो जरदारी भी खुलकर उनके खिलाफ मैदान में उतर आए हैं। बिलावल ने सवाल उठाते हुए कहा कि ऐसा बयान देने के बाद भी ख्वाजा आसिफ आखिर संघीय कैबिनेट का हिस्सा कैसे बने हुए हैं।
ख्वाजा आसिफ के बयान पर बढ़ा विवाद
दरअसल, एक टीवी इंटरव्यू के दौरान पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने कहा था कि रावलकोट “कश्मीर नहीं है” और वह वहां के निवासियों को कश्मीरी नहीं मानते। उनके इस बयान के सामने आने के बाद पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर में राजनीतिक हलकों से लेकर आम जनता तक में नाराजगी देखने को मिली। सोशल मीडिया पर भी उनके बयान को लेकर तीखी बहस छिड़ गई।
बिलावल भुट्टो ने सरकार पर साधा निशाना
बयान को लेकर प्रतिक्रिया देते हुए बिलावल भुट्टो जरदारी ने कहा कि पाकिस्तान सरकार के कुछ मंत्री प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ की नीतियों को कमजोर करने का काम कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि कश्मीर मुद्दे पर इस तरह के गैर-जिम्मेदाराना बयान पाकिस्तान के आधिकारिक रुख को नुकसान पहुंचाते हैं और देश की राजनीतिक स्थिति को और जटिल बनाते हैं।
बिलावल ने आश्चर्य जताते हुए कहा कि जिस मंत्री ने कश्मीर और कश्मीरी पहचान पर इतना विवादित बयान दिया हो, वह अब तक कैबिनेट में कैसे बना हुआ है। उन्होंने संकेत दिया कि ऐसे बयान देने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए।
बयान के बाद सफाई देने में जुटे ख्वाजा आसिफ
विवाद बढ़ने के बाद ख्वाजा आसिफ ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर अपनी सफाई पेश की। उन्होंने कहा कि कश्मीरियत की पहचान किसी व्यक्ति के जन्मस्थान से नहीं बल्कि पिछले लगभग आठ दशकों से कश्मीर मुद्दे पर पाकिस्तानियों और कश्मीरियों द्वारा दिए गए संघर्ष और बलिदानों से तय होती है।
आसिफ ने अपने बयान को गलत तरीके से पेश किए जाने का आरोप लगाते हुए कहा कि उनका उद्देश्य किसी क्षेत्र या समुदाय की पहचान पर सवाल उठाना नहीं था। हालांकि उनकी इस सफाई के बावजूद विवाद थमता नजर नहीं आ रहा है।
पीओके के नेताओं में भी नाराजगी
ख्वाजा आसिफ के बयान पर पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर के कई राजनीतिक नेताओं ने भी कड़ी आपत्ति जताई है। उनका कहना है कि रावलकोट और पीओके के अन्य क्षेत्रों की पहचान को लेकर इस तरह की टिप्पणी वहां के लोगों की भावनाओं को आहत करती है। नेताओं ने मांग की है कि पाकिस्तान सरकार इस मुद्दे पर स्पष्ट रुख अपनाए और विवाद को बढ़ने से रोके।
कश्मीर मुद्दे पर बढ़ सकती है राजनीतिक मुश्किल
विशेषज्ञों का मानना है कि कश्मीर पाकिस्तान की राजनीति का बेहद संवेदनशील विषय रहा है। ऐसे में रक्षा मंत्री के बयान से सरकार को राजनीतिक नुकसान उठाना पड़ सकता है। विपक्ष इस मुद्दे को लेकर सरकार पर लगातार दबाव बना रहा है और आने वाले दिनों में यह विवाद पाकिस्तान की राजनीति में बड़ा मुद्दा बन सकता है।
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