Emergency पर PM Modi का बड़ा बयान, बोले- संविधान पर हुआ था सीधा हमला; कोलकाता गोदाम हादसे के मृतकों के लिए मुआवजे का ऐलान

नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आपातकाल की बरसी पर देश के लोकतांत्रिक इतिहास के उस दौर को याद किया, जिसे उन्होंने संविधान और लोकतंत्र पर सीधा प्रहार बताया। प्रधानमंत्री ने कहा कि 25 जून 1975 को लगाया गया आपातकाल भारतीय लोकतंत्र के लिए एक काला अध्याय था, जब नागरिकों के मौलिक अधिकारों को सीमित कर दिया गया था और लोकतांत्रिक संस्थाओं पर दबाव बनाया गया था।

लोकतंत्र के दमन की याद दिलाई

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि आपातकाल के दौरान देश के संविधान की मूल भावना को कमजोर करने का प्रयास किया गया। उन्होंने कहा कि उस समय अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर प्रतिबंध लगाए गए, राजनीतिक विरोधियों को जेलों में बंद किया गया और लोकतांत्रिक मूल्यों को गंभीर चोट पहुंचाई गई। प्रधानमंत्री ने कहा कि देशवासी उन लोगों के संघर्ष और बलिदान को कभी नहीं भूल सकते, जिन्होंने लोकतंत्र की रक्षा के लिए आवाज उठाई थी।

उन्होंने कहा कि लोकतंत्र भारत की सबसे बड़ी ताकत है और इसे मजबूत बनाए रखना प्रत्येक नागरिक की जिम्मेदारी है। प्रधानमंत्री ने लोकतांत्रिक मूल्यों और संवैधानिक संस्थाओं के प्रति देश की प्रतिबद्धता दोहराई।

कोलकाता गोदाम हादसे पर जताया दुख

इस बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कोलकाता में हुए गोदाम हादसे पर भी गहरा शोक व्यक्त किया। उन्होंने दुर्घटना में जान गंवाने वाले लोगों के परिजनों के प्रति संवेदना प्रकट करते हुए घायलों के जल्द स्वस्थ होने की कामना की।

प्रधानमंत्री ने कहा कि इस कठिन समय में केंद्र सरकार प्रभावित परिवारों के साथ खड़ी है और हर संभव सहायता उपलब्ध कराई जाएगी।

मृतकों के परिजनों को दो-दो लाख रुपये की सहायता

प्रधानमंत्री कार्यालय की ओर से जारी जानकारी के अनुसार, कोलकाता गोदाम हादसे में जान गंवाने वाले प्रत्येक मृतक के परिजनों को प्रधानमंत्री राष्ट्रीय राहत कोष (PMNRF) से दो-दो लाख रुपये की अनुग्रह राशि प्रदान की जाएगी। वहीं हादसे में घायल हुए लोगों को 50 हजार रुपये की आर्थिक सहायता देने की भी घोषणा की गई है।

सरकार की ओर से कहा गया है कि प्रभावित परिवारों को राहत पहुंचाने के लिए संबंधित एजेंसियां लगातार स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं और आवश्यक सहायता उपलब्ध कराई जा रही है।

लोकतंत्र और संवेदना का संदेश

एक ओर जहां प्रधानमंत्री मोदी ने आपातकाल को लोकतंत्र पर हमला बताते हुए इतिहास के उस दौर को याद किया, वहीं दूसरी ओर कोलकाता हादसे के पीड़ित परिवारों के प्रति संवेदना जताते हुए आर्थिक सहायता का ऐलान किया। उनके इन दोनों संदेशों ने लोकतांत्रिक मूल्यों और मानवीय संवेदनाओं को एक साथ सामने रखा है।

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