भारत के प्रधानमंत्री Narendra Modi अपनी पांच देशों की विदेश यात्रा के पहले चरण में संयुक्त अरब अमीरात की राजधानी Abu Dhabi पहुंच गए। पीएम मोदी के अबू धाबी एयरपोर्ट पहुंचने पर उन्हें गार्ड ऑफ ऑनर दिया गया और यूएई अधिकारियों ने गर्मजोशी के साथ उनका स्वागत किया। प्रधानमंत्री की यह यात्रा ऐसे समय में हो रही है जब मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव का असर अब भारत की अर्थव्यवस्था और आम जनता की जेब पर भी दिखाई देने लगा है।
अबू धाबी एयरपोर्ट पर पीएम मोदी का भव्य स्वागत
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जैसे ही अबू धाबी पहुंचे, वहां भारतीय समुदाय और यूएई प्रशासन की ओर से उनका शानदार स्वागत किया गया। एयरपोर्ट पर औपचारिक सम्मान के तहत पीएम मोदी को गार्ड ऑफ ऑनर दिया गया। माना जा रहा है कि इस दौरे के दौरान भारत और यूएई के बीच व्यापार, ऊर्जा, निवेश और रणनीतिक साझेदारी को लेकर कई अहम मुद्दों पर चर्चा हो सकती है।
प्रधानमंत्री की यह पांच देशों की यात्रा भारत की वैश्विक कूटनीति के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है। यूएई लंबे समय से भारत का अहम आर्थिक और रणनीतिक साझेदार रहा है।
ईरान-अमेरिका-इजरायल तनाव का असर भारत पर
मध्य पूर्व में ईरान, अमेरिका और इजरायल के बीच बढ़ते तनाव ने अब भारत में भी असर दिखाना शुरू कर दिया है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में उछाल आने के बाद केंद्र सरकार ने पेट्रोल, डीजल और सीएनजी की कीमतों में बढ़ोतरी कर दी है।
नई दरों के मुताबिक पेट्रोल और डीजल के दाम में 3 रुपये से ज्यादा की बढ़ोतरी हुई है। वहीं सीएनजी भी 2 रुपये महंगी हो गई है। ईंधन के बढ़ते दामों से आम लोगों पर महंगाई का दबाव और बढ़ने की आशंका जताई जा रही है।
आम आदमी की जेब पर बढ़ेगा बोझ
पेट्रोल-डीजल महंगा होने का सीधा असर परिवहन लागत पर पड़ता है, जिससे रोजमर्रा की जरूरतों का सामान भी महंगा हो सकता है। वहीं सीएनजी की कीमत बढ़ने से ऑटो, टैक्सी और सार्वजनिक परिवहन का किराया बढ़ने की संभावना भी तेज हो गई है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि मध्य पूर्व में तनाव लंबे समय तक जारी रहता है तो आने वाले दिनों में ईंधन की कीमतों में और बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है।
भारत-यूएई संबंधों पर रहेगी दुनिया की नजर
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की यूएई यात्रा को केवल कूटनीतिक दौरा नहीं बल्कि ऊर्जा सुरक्षा और व्यापारिक सहयोग के नजरिए से भी बेहद अहम माना जा रहा है। ऐसे समय में जब वैश्विक स्तर पर तेल बाजार में अस्थिरता बनी हुई है, भारत के लिए यूएई जैसे साझेदार देशों के साथ मजबूत संबंध काफी महत्वपूर्ण हो जाते हैं।
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