
नई दिल्ली में चल रहे संसद के विशेष सत्र में महिला आरक्षण और परिसीमन बिल को लेकर सियासी माहौल लगातार गर्माता जा रहा है। गुरुवार को लोकसभा में चर्चा के दौरान विपक्ष और सत्ता पक्ष के बीच तीखी नोकझोंक देखने को मिली। कांग्रेस नेता गौरव गोगोई ने सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि महिला आरक्षण को लेकर दिए जा रहे भाषणों में “90 प्रतिशत बातें पुरानी ही दोहराई जा रही हैं”, जबकि देश ठोस कार्रवाई की उम्मीद कर रहा है।
महिला आरक्षण पर सरकार घिरी, विपक्ष ने उठाए सवाल
महिला आरक्षण बिल पर चर्चा के दौरान विपक्ष ने सरकार की मंशा और समय-सीमा पर सवाल खड़े किए। गौरव गोगोई ने कहा कि सरकार इस मुद्दे को गंभीरता से लेने के बजाय राजनीतिक लाभ के लिए इस्तेमाल कर रही है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि बार-बार एक ही तरह की बातें दोहराकर असल मुद्दों से ध्यान भटकाया जा रहा है। विपक्ष का कहना है कि महिला आरक्षण को लागू करने के लिए स्पष्ट रोडमैप सामने लाया जाना चाहिए।
परिसीमन बिल पर भी जारी रही बहस
संसद के विशेष सत्र में परिसीमन बिल को लेकर भी चर्चा तेज रही। कई विपक्षी दलों ने इस बिल के संभावित प्रभावों को लेकर चिंता जताई। उनका कहना है कि परिसीमन प्रक्रिया से राज्यों के बीच राजनीतिक संतुलन प्रभावित हो सकता है। वहीं, सरकार का पक्ष है कि यह प्रक्रिया संविधान के अनुरूप और देश के विकास के लिए आवश्यक है।
सरकार ने किया बचाव, बताया ऐतिहासिक कदम
सत्ता पक्ष के नेताओं ने महिला आरक्षण को ऐतिहासिक पहल बताते हुए कहा कि यह महिलाओं को सशक्त बनाने की दिशा में बड़ा कदम है। सरकार का दावा है कि इस बिल से संसद और विधानसभाओं में महिलाओं की भागीदारी बढ़ेगी, जिससे नीति निर्माण में विविधता आएगी।
संसद में हंगामे के बीच कार्यवाही जारी
चर्चा के दौरान कई बार हंगामे की स्थिति भी बनी, लेकिन स्पीकर ने सदन की कार्यवाही को सुचारु रूप से चलाने की कोशिश की। दोनों पक्षों के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर जारी रहा, जिससे सदन का माहौल काफी गरम रहा।
आगे क्या होगा?
अब सभी की नजर इस बात पर टिकी है कि महिला आरक्षण और परिसीमन बिल पर सरकार क्या अंतिम रुख अपनाती है और क्या विपक्ष की चिंताओं का समाधान निकल पाता है। संसद का यह विशेष सत्र आने वाले समय की राजनीति के लिए अहम दिशा तय कर सकता है।
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