
असम की राजनीति में एक बार फिर बयानबाजी ने तापमान बढ़ा दिया है। असम के मुख्यमंत्री Himanta Biswa Sarma को ‘जिन्ना’ कहकर संबोधित किए जाने के बाद सियासी घमासान तेज हो गया है। भारतीय जनता पार्टी ने कांग्रेस सांसद गौरव गोगोई पर तीखा हमला बोलते हुए उन्हें ‘पाकिस्तान का मियां’ तक कह डाला और सीधे आठ सवाल दाग दिए। इस बयान को लेकर प्रदेश से लेकर राष्ट्रीय राजनीति तक बहस छिड़ गई है।
बयान से बढ़ी राजनीतिक तल्खी
मामला तब गरमाया जब कांग्रेस सांसद की ओर से असम के मुख्यमंत्री की तुलना Muhammad Ali Jinnah से किए जाने की बात सामने आई। इस टिप्पणी को भाजपा ने न केवल असम की जनता का अपमान बताया, बल्कि इसे विभाजनकारी मानसिकता से भी जोड़ दिया। भाजपा नेताओं का कहना है कि इस तरह की भाषा लोकतांत्रिक परंपराओं के खिलाफ है और इससे सामाजिक सौहार्द को ठेस पहुंचती है।
भाजपा का तीखा पलटवार
Bharatiya Janata Party के नेताओं ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर कांग्रेस सांसद पर निशाना साधते हुए कहा कि जो लोग देश की एकता की बात करते हैं, वही अब मुख्यमंत्री को ‘जिन्ना’ बताकर राजनीतिक लाभ लेने की कोशिश कर रहे हैं। पार्टी प्रवक्ताओं ने सवाल उठाया कि क्या कांग्रेस नेतृत्व इस बयान से सहमत है? क्या यह पार्टी की आधिकारिक सोच है या व्यक्तिगत निराशा का परिणाम?
कांग्रेस पर घेरा, 8 सवालों की सूची
भाजपा की ओर से पूछे गए सवालों में यह भी शामिल है कि क्या कांग्रेस असम में सांप्रदायिक ध्रुवीकरण की राजनीति करना चाहती है? क्या मुख्यमंत्री के विकास कार्यों से बौखलाकर इस तरह की टिप्पणी की गई? क्या पार्टी नेतृत्व इस बयान पर अनुशासनात्मक कार्रवाई करेगा? इसके अलावा राष्ट्रीय सुरक्षा, अवैध घुसपैठ और राज्य की कानून-व्यवस्था जैसे मुद्दों को भी बहस के केंद्र में ला दिया गया।
कांग्रेस की संभावित रणनीति पर चर्चा
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि असम में आगामी चुनावी समीकरणों को देखते हुए बयानबाजी तेज होना स्वाभाविक है। Indian National Congress और भाजपा के बीच वैचारिक टकराव लंबे समय से रहा है, लेकिन व्यक्तिगत टिप्पणियां अक्सर विवाद को और गहरा कर देती हैं। ऐसे में यह देखना अहम होगा कि कांग्रेस नेतृत्व इस विवाद पर क्या रुख अपनाता है।
असम की सियासत में नई हलचल
असम में पहले भी पहचान, घुसपैठ और राष्ट्रवाद जैसे मुद्दों पर तीखी बहस होती रही है। मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने अपने कार्यकाल में कई कठोर निर्णय लिए हैं, जिन पर विपक्ष लगातार सवाल उठाता रहा है। अब ‘जिन्ना’ टिप्पणी ने राजनीतिक माहौल को और गरमा दिया है। आने वाले दिनों में यह मुद्दा संसद से लेकर सड़कों तक गूंज सकता है।
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