New Income Tax Act 2025: 1 अप्रैल से बदल जाएंगे टैक्स के नियम! पुरानी या नई व्यवस्था, जानें कहां होगी आपकी सबसे बड़ी बचत?

नई दिल्ली: नया वित्त वर्ष शुरू होने में अब बस कुछ ही दिन शेष हैं। 1 अप्रैल 2026 से देश में ‘इनकम टैक्स एक्ट 2025’ लागू होने जा रहा है, जो करदाताओं के लिए बचत और निवेश के नए समीकरण लेकर आएगा। हर साल की तरह इस बार भी नौकरीपेशा लोगों के मन में सबसे बड़ा सवाल यही है कि ‘नई टैक्स व्यवस्था’ (New Tax Regime) चुनें या ‘पुरानी व्यवस्था’ (Old Tax Regime) में ही बने रहें? एक्सपर्ट्स का मानना है कि इस बार चुनाव इतना आसान नहीं होने वाला है।

पुरानी टैक्स व्यवस्था: HRA और भत्तों में बड़े बदलाव से लौटी रौनक

गुरुग्राम के वरिष्ठ सीए अमित कुमार के अनुसार, नए एक्ट ने पुरानी व्यवस्था को उन लोगों के लिए फिर से बेहद आकर्षक बना दिया है जो सोच-समझकर निवेश करते हैं। सबसे बड़ा बदलाव हाउस रेंट अलाउंस (HRA) में हुआ है। अब बेंगलुरु, पुणे, हैदराबाद और अहमदाबाद जैसे शहरों में रहने वाले लोग अपनी बेसिक सैलरी का 50% तक HRA क्लेम कर सकेंगे, जो पहले केवल 40% था। इसके अलावा, मील कूपन की लिमिट ₹50 से बढ़ाकर ₹200 और गिफ्ट पर छूट ₹5,000 से बढ़ाकर ₹15,000 कर दी गई है। मोबाइल लीजिंग और बच्चों की शिक्षा जैसे भत्तों पर भी अब पहले से ज्यादा टैक्स बचत संभव है।

नई टैक्स व्यवस्था: सादगी पसंद लोगों के लिए अब भी ‘सुपरहिट’

अगर आप निवेश के कागजी झंझटों, जैसे LIC, PPF या मेडिकल इंश्योरेंस के बिलों से दूर रहना चाहते हैं, तो नई व्यवस्था आपके लिए वरदान है। इसमें टैक्स की दरें काफी कम रखी गई हैं और ₹12 लाख तक की शुद्ध आय पर ‘सेक्शन 87A’ के तहत कोई टैक्स नहीं देना होगा। यह उन युवाओं के लिए सबसे बेहतर है जो अभी अपना करियर शुरू कर रहे हैं और ‘फाइल करो और भूल जाओ’ की नीति में विश्वास रखते हैं। हालांकि, ध्यान रहे कि इसमें आपको 80C या HRA जैसी कटौतियों का लाभ नहीं मिलेगा।

गणित समझिए: कहां बचेगा आपका ₹1.25 लाख तक का टैक्स?

टैक्स एक्सपर्ट्स के मुताबिक, यदि आपकी सालाना आय ₹20 लाख के आसपास है और आप बड़े शहर में किराए पर रहते हैं, होम लोन चुका रहे हैं या अन्य निवेश कर रहे हैं, तो पुरानी व्यवस्था आपके बैंक बैलेंस के लिए ज्यादा फायदेमंद हो सकती है। सही प्लानिंग के जरिए आप नई व्यवस्था की तुलना में पुरानी व्यवस्था में ₹1.25 लाख तक अतिरिक्त बचा सकते हैं। वहीं, कम आय वाले और बिना निवेश वाले लोगों के लिए नई व्यवस्था ही ज्यादा कैश-इन-हैंड सुनिश्चित करेगी।

सीए की सलाह: 1 अप्रैल से पहले करें यह जरूरी काम

सीए अमित कुमार ने करदाताओं को आगाह किया है कि बिना कैलकुलेशन के किसी भी व्यवस्था का चुनाव न करें। 1 अप्रैल से पहले अपने टैक्स सलाहकार से मिलें और ऑनलाइन ‘टैक्स कैलकुलेटर’ का उपयोग करके दोनों व्यवस्थाओं की तुलना जरूर करें। याद रखें, एक छोटी सी लापरवाही आपकी साल भर की गाढ़ी कमाई पर टैक्स की भारी मार पड़वा सकती है।

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