नई दिल्ली (डिजिटल डेस्क): टीवी की मशहूर ‘गोपी बहू’ यानी देवोलीना भट्टाचार्जी एक बार फिर सोशल मीडिया पर ट्रोल्स के निशाने पर आ गई हैं। मौका था रमजान की इफ्तारी का, जिसकी तस्वीरें देवोलीना ने अपने पति शाहनवाज शेख और नन्हे बेटे जॉय के साथ साझा की थीं। लेकिन, खुशियों भरी इन तस्वीरों पर यूजर्स ने दुआओं के बजाय नसीहतों की बौछार कर दी। किसी को देवोलीना की ‘कट स्लीव’ ड्रेस से दिक्कत हुई, तो किसी ने उनके बैठने के तरीके को ‘बेअदबी’ करार दे दिया।
इफ्तार की टेबल पर दिखा ‘इंटरफेथ’ प्यार, पर ट्रोल्स को खली ड्रेस
देवोलीना ने इंस्टाग्राम पर इफ्तार की तैयारी करते हुए बेहद प्यारी तस्वीरें पोस्ट कीं। टेबल पर मिल्कशेक, ताजे फल और पराठे सजे थे। देवोलीना ने कैप्शन में लिखा कि इस बार का रमजान उनके लिए बेहद खास है, जिसमें प्यार और दया की भावना और गहरी हुई है। हालांकि, ट्रोल्स की नजर देवोलीना की टी-शर्ट और स्लीवलेस ड्रेस पर टिक गई। कट्टरपंथियों और ट्रोल्स ने कमेंट्स में लिखा, “अगर इस्लाम फॉलो कर रही हो तो पूरी तरह करो, कम से कम इफ्तार के समय तो अदब से बैठतीं।”
मंदिर और अलमारी को लेकर भी उठे अजीब सवाल
विवाद सिर्फ कपड़ों तक नहीं थमा। तस्वीरों के बैकग्राउंड में देवोलीना के घर का मंदिर नजर आ रहा था। इसे देखकर कुछ यूजर्स ने बेहद निजी और अजीब सवाल पूछने शुरू कर दिए। एक यूजर ने पूछा, “मंदिर के नीचे वाली अलमारी में क्या रखती हो?” वहीं, कुछ लोग उनकी इंटरफेथ मैरिज (दूसरे धर्म में शादी) को लेकर पुराने घाव कुरेदने लगे और उनके पति के धर्म को लेकर तंज कसे।
शाहनवाज संग शादी और ट्रोल्स को ‘करारा जवाब’
बता दें कि देवोलीना ने 14 दिसंबर 2022 को अपने जिम ट्रेनर शाहनवाज शेख से कोर्ट मैरिज की थी। तब से ही वह अक्सर ट्रोल्स के निशाने पर रहती हैं। हालांकि, देवोलीना कभी भी चुप नहीं रहतीं। जब बेटे जॉय के जन्म के समय उसके धर्म पर सवाल उठे थे, तो एक्ट्रेस ने दो टूक कहा था, “बच्चा मेरा है, उसका धर्म और नाम मैं तय करूंगी। जिन्हें इतनी फिक्र है, वे अनाथालय से बच्चा गोद लेकर उसे अपना मनचाहा धर्म दे दें।”
त्योहारों में दिखता है आपसी सम्मान
तमाम आलोचनाओं के बावजूद देवोलीना और शाहनवाज की जोड़ी मिसाल पेश करती है। देवोलीना जहां अपने हिंदू रीति-रिवाजों को पूरी श्रद्धा से निभाती हैं, वहीं वह अपने पति के साथ रमजान और ईद भी उतनी ही खुशी से मनाती हैं। फिलहाल, इफ्तारी की इन तस्वीरों ने इंटरनेट पर बहस छेड़ दी है कि क्या किसी के पहनावे से उसकी आस्था का पैमाना तय किया जाना चाहिए?
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